प्र1.
कवि ने गोलगप्पे को ‘भरा मटर से एक बताशा’ क्यों कहा है?
उत्तर
कविता की पहली दो पंक्तियाँ हैं—
भरा मटर से एक बताशा,
मुँह में फूटे फक्क।
मुँह में फूटे फक्क।
गोलगप्पा बताशे जैसा गोल और पोला होता है। बताशा भी मुँह में रखते ही फूट जाता है। गोलगप्पे के भीतर मटर भरा जाता है। इसीलिए कवि ने उसे ‘मटर से भरा हुआ बताशा’ कहा है।
क्यों यह तुलना अच्छी लगती है: बताशा हर बच्चे ने खाया होता है। जानी-पहचानी चीज़ से तुलना करने पर नई चीज़ तुरंत समझ में आ जाती है।