कक्षा ४ हिंदी अध्याय 6 गोलगप्पा के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
कवि ने गोलगप्पे को ‘भरा मटर से एक बताशा’ क्यों कहा है?
उत्तर

कविता की पहली दो पंक्तियाँ हैं—

भरा मटर से एक बताशा,
मुँह में फूटे फक्क।

गोलगप्पा बताशे जैसा गोल और पोला होता है। बताशा भी मुँह में रखते ही फूट जाता है। गोलगप्पे के भीतर मटर भरा जाता है। इसीलिए कवि ने उसे ‘मटर से भरा हुआ बताशा’ कहा है।

क्यों यह तुलना अच्छी लगती है: बताशा हर बच्चे ने खाया होता है। जानी-पहचानी चीज़ से तुलना करने पर नई चीज़ तुरंत समझ में आ जाती है।
प्र2.
कविता में गोलगप्पे के कौन-कौन से नाम आए हैं? कौन-कौन इसे खाता है?
उत्तर

कविता में दो नाम आए हैं — पिचकू और गोलगप्पा

कोई इसको पिचकू बोले,
कोई गोलगप्पा।
दादा-दादी खाएँ मजे से,
खाएँ अम्मा-बप्पा।

कौन खाता है — दादा-दादी और अम्मा-बप्पा। यानी घर के बड़े-बूढ़े भी इसे मजे से खाते हैं।

क्यों कवि ने यह बताया: इससे पता चलता है कि गोलगप्पा केवल बच्चों का नहीं है। घर के हर सदस्य को यह पसंद है।
जानने की बात: एक ही चीज़ के अलग-अलग जगह अलग नाम होते हैं। अपने घर में पूछिए कि आपके यहाँ इसे क्या कहते हैं।
प्र3.
कविता के अनुसार गोलगप्पे का स्वाद कैसा होता है?
उत्तर

कविता कहती है—

खट्टा, तीखा और चटपटा,
पानी निकले भक्क।

गोलगप्पे का स्वाद खट्टा, तीखा और चटपटा होता है। मुँह में रखते ही वह ‘फक्क’ करके फूटता है और उसका पानी ‘भक्क’ से निकलता है।

‘फक्क’ और ‘भक्क’ क्यों: ये आवाज़ बताने वाले शब्द हैं। इन्हें पढ़ते ही कान में वही आवाज़ सुनाई देती है और खाने का दृश्य आँखों के सामने आ जाता है।
प्र4.
कविता में गोलगप्पा खाने का कौन-सा तरीका बताया गया है?
उत्तर

तीसरे पद में तरीका बताया गया है—

मुँह फैलाओ खूब बड़ा-सा,
झटपट अंदर रक्खो।
बड़ी सावधानी से इसका,
स्वाद निराला चक्खो।

तरीका तीन चरणों में है—

  1. मुँह खूब बड़ा फैलाइए।
  2. गोलगप्पे को झटपट मुँह के अंदर रख लीजिए।
  3. फिर बड़ी सावधानी से उसका निराला स्वाद चखिए।
मुँह बड़ा क्यों: गोलगप्पा गोल और बड़ा होता है और उसमें पानी भरा रहता है। मुँह छोटा रखने पर वह टूट जाएगा और सारा पानी बाहर गिर जाएगा।
प्र5.
‘चूक गए थोड़ा-सा भी यदि’ — तो क्या होता है? कविता के आधार पर बताइए।
उत्तर

अंतिम पद इसका उत्तर देता है—

चूक गए थोड़ा-सा भी यदि,
बिगड़ गया जो ढंग।
खाँस-खाँस कर हाल बुरा हो,
कपड़े हों बदरंग।

थोड़ी-सी चूक होने पर दो बातें होती हैं—

  • खाँस-खाँसकर बुरा हाल हो जाता है।
  • कपड़े बदरंग हो जाते हैं।
क्यों ऐसा होता है: गोलगप्पे का पानी तीखा होता है। वह गले में चला जाए तो खाँसी आ जाती है। और यदि गोलगप्पा हाथ में ही फूट जाए, तो पानी कपड़ों पर गिरकर उन पर दाग छोड़ देता है।
कविता की मज़ेदार बात: पूरी कविता में हर दूसरी पंक्ति के अंत में मिलते-जुलते शब्द आते हैं — फक्क–भक्क, गोलगप्पा–बप्पा, रक्खो–चक्खो, ढंग–बदरंग। इसी से कविता गाने में अच्छी लगती है।
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