कक्षा ४ हिंदी अध्याय 7 नकली हीरे के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-19
इस अध्याय के बारे में
काननपुर के बुद्धिमान और वृद्ध राजा का एक ही बेटा था। राजा अपने पुत्र के लिए एक सलाहकार ढूँढ़ना चाहता था। उसने सब दरबारियों से पूछा — ‘क्या मैं बुद्धिमान और ईमानदार राजा हूँ?’ सबने बारी-बारी से यही कहा कि आप-सा राजा और कोई नहीं है। एक नवयुवक दरबारी चुप रहा। उसने विनम्रता से सच कहा कि राजा से भी श्रेष्ठ राजा पहले हो चुके हैं। राजा ने हर दरबारी को एक-एक हीरा दिया। अगली सुबह दरबारियों ने बताया कि जौहरी की जाँच में सारे हीरे नकली निकले। कहानी का मोड़ यहीं है — झूठे उत्तर का इनाम नकली हीरा, और सच्चे उत्तर का इनाम असली हीरा। राजा ने उसी नवयुवक को अपने बेटे का विश्वस्त सलाहकार चुना। पाठ के अंत में श्याम सुशील की कविता हवा और धूल है, जिसमें हवा और धूल दो शरारती बच्चों की तरह एक-दूसरे से खेलती हैं।
अभ्यास
- बातचीत के लिए
- सोचिए और लिखिए
- शब्दों से मित्रता
- हमारी समझ
- भाषा की बात
- पाठ की विशेषताएँ
- आपकी चित्रकथा
- खोजिए और आनंद लीजिए
- पुस्तकालय से
- हवा और धूल