कक्षा ४ हिंदी अध्याय 7 बातचीत के लिए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
राजा ने अपने पुत्र का सलाहकार किसे और क्यों चुना?
उत्तर

राजा ने उस नवयुवक दरबारी को अपने पुत्र का सलाहकार चुना, जिसने सबसे अलग और सच्चा उत्तर दिया था।

बाकी सब दरबारियों ने कहा — “निस्संदेह महाराज, संसार में आप-सा बुद्धिमान और ईमानदार राजा और कोई नहीं है।” पर यह नवयुवक चुप रहा। पूछने पर उसने कहा — “आपसे भी श्रेष्ठ राजा हो चुके हैं जो बुद्धिमत्ता और ईमानदारी में आपसे बढ़-चढ़कर थे।”

क्यों चुना: क्योंकि वह सच बोलता था और विनम्र भी था। राजा के बेटे को ऐसा ही सलाहकार चाहिए, जो मुँह पर सच कहे। खुशामद करने वाला सलाहकार कभी सही रास्ता नहीं दिखाता।

राजा ने स्वयं कहा — “…और मेरे बाद यही मेरे बेटे का विश्वस्त सलाहकार रहेगा।”

प्र2.
दरबारियों ने राजा के उपहार की जौहरी से तुरंत जाँच करवाई। इससे उनके बारे में कौन-कौन सी बातें पता चलती हैं?
उत्तर

इससे दरबारियों के बारे में तीन बातें पता चलती हैं।

  • उन्हें राजा पर पूरा भरोसा नहीं था। भरोसा होता तो वे उपहार की जाँच न करवाते।
  • वे लालची थे। उन्हें उपहार की भावना से नहीं, हीरे के मोल से मतलब था।
  • वे सच बोलने वाले नहीं थे। जो स्वयं झूठ बोलते हैं, वे दूसरों पर भी शक करते हैं।
पाठ से आधार: अगली सुबह वे दरबार में आकर बोले — “महाराज, हमने इन हीरों की जाँच जौहरी से करवाई। पता चला कि सारे हीरे तो नकली हैं!” यानी उन्होंने एक रात भी नहीं रुकी।
प्र3.
नवयुवक दरबारी राजा का प्रश्न सुनकर भी चुपचाप क्यों खड़ा था?
उत्तर

वह चुप था क्योंकि वह झूठ नहीं बोलना चाहता था

राजा का प्रश्न था — “क्या मैं बुद्धिमान और ईमानदार राजा हूँ?” बाकी दरबारी राजा को खुश करने वाला उत्तर दे चुके थे। नवयुवक का उत्तर उनसे अलग था। उसे डर था कि सच सुनकर राजा नाराज़ हो जाएगा।

क्यों: वह विनम्र था, इसलिए बिना पूछे बोलना नहीं चाहता था। जब राजा ने स्वयं पूछा — “आप चुप क्यों हैं?” — तभी उसने क्षमा माँगकर अपनी बात कही।
प्र4.
चित्रकथा के अनुसार काननपुर का राजा बहुत बुद्धिमान था। क्या आप इस बात से सहमत हैं? आपको ऐसा क्यों लगता है?
उत्तर

हाँ, मैं इस बात से सहमत हूँ। काननपुर का राजा सचमुच बुद्धिमान था।

  • उसने सलाहकार चुनने के लिए कोई परीक्षा का पर्चा नहीं बनाया। उसने बस एक प्रश्न पूछा।
  • उस एक प्रश्न से ही सच बोलने वाला अपने-आप अलग दिख गया।
  • उसने इनाम को ही परख बना दिया — झूठ बोलने वालों को नकली हीरे, सच बोलने वाले को असली हीरा।
असली चतुराई यहाँ है: राजा ने किसी को डाँटा नहीं। नकली हीरे ने दरबारियों को स्वयं अपनी गलती दिखा दी।
संकेत: इस प्रश्न में आपका अपना मत भी चलेगा। कोई कह सकता है कि राजा को दरबारियों को धोखा नहीं देना चाहिए था। ऐसा उत्तर भी ठीक है, बस कारण साफ़ लिखिए।
प्र5.
जब राजा ने अपने पुत्र के सलाहकार की घोषणा की, तब सभी दरबारियों को कैसा लगा होगा? उन्होंने क्या-क्या सोचा होगा?
उत्तर

उस समय सभी दरबारियों को बहुत शर्म और पछतावा हुआ होगा।

पुस्तक के अंतिम चित्र-खंड में उनके चेहरे उतरे हुए हैं। कोई मुँह पर हाथ रखे है, किसी की आँखें झुकी हैं।

उन्होंने यह सोचा होगा —

  • “काश! हमने भी सच कह दिया होता।”
  • “हमने खुशामद करके अपना ही नुकसान कर लिया।”
  • “राजा ने हमें पहचान लिया, अब उनकी नज़र में हमारा मान नहीं रहा।”
क्यों: उन्हें अपनी गलती का प्रमाण हाथ में ही मिल गया था — वह नकली हीरा। इसीलिए वे कुछ कह भी नहीं सके।
क्या यह उपयोगी रहा?