इस अंश में कुल तीन चित्र-खंड हैं।
- पहला — राजा का हाथ एक दरबारी को हीरा दे रहा है।
- दूसरा — वह दरबारी हीरा उठाकर खुशी से देख रहा है।
- तीसरा — राजा सिंहासन पर बैठा है और चुप खड़े दरबारी से पूछ रहा है।
अद्यतन2026-09-19
इस अंश में कुल तीन चित्र-खंड हैं।
इस अंश में दो मुख्य पात्र हैं — राजा और एक दरबारी।
बीच के चित्र-खंड में गुलाबी पगड़ी वाला एक और दरबारी है, पर वह मुख्य पात्र नहीं है।
बीच वाले चित्र-खंड में एक दरबारी अपना हीरा उठाकर बड़े चाव से देख रहा है।
वह गुलाबी पगड़ी पहने है। हीरा उसकी उँगलियों में चमक रहा है। उसका चेहरा हँसता हुआ है।
बिना एक भी शब्द पढ़े, केवल चित्र देखकर इतनी बातें पता चल जाती हैं —
नाम ‘नकली हीरे’ इसलिए रखा गया है, क्योंकि पूरी कहानी का मोड़ इन्हीं नकली हीरों पर घूमता है।
राजा ने हर दरबारी को एक-एक हीरा दिया। जिन्होंने झूठा उत्तर दिया, उन्हें नकली हीरे मिले। जिसने सच कहा, उसे असली हीरा मिला। राजा के शब्दों में — “आप सबने मेरे प्रश्न का झूठा उत्तर दिया… इसलिए हीरे भी आपको नकली दिए गए।”
नमूना उत्तर (दूसरे उपयुक्त शीर्षक):
राजा ने नकली हीरों का पुरस्कार उन सभी दरबारियों को दिया, जिन्होंने उसे खुश करने के लिए झूठा उत्तर दिया था।
उन सबने बारी-बारी से यही कहा था — “निस्संदेह महाराज, संसार में आप-सा बुद्धिमान और ईमानदार राजा और कोई नहीं है।”
राजा ने स्वयं समझाया — “आप सबने मेरे प्रश्न का झूठा उत्तर दिया… इसलिए हीरे भी आपको नकली दिए गए।”
राजा ने ऐसा इसलिए किया, क्योंकि केवल एक दरबारी ने सच कहा था। बाकी सबने झूठ बोला था।
दोनों तरफ़ का हिसाब —
| किसने क्या उत्तर दिया | कैसा उत्तर था | कैसा इनाम मिला |
|---|---|---|
| सब दरबारी — ‘आप-सा राजा और कोई नहीं’ | झूठा, खुशामद वाला | नकली हीरा |
| नवयुवक दरबारी — ‘आपसे श्रेष्ठ राजा भी हो चुके हैं’ | सीधा-सादा, सच्चा | असली हीरा |