कक्षा ४ हिंदी अध्याय 7 हवा और धूल के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
‘हवा धूल को छेड़के भागी / सोती धूल अचानक जागी / उड़ी हवा के पीछे-पीछे / हवा हो गई धूल के नीचे’ — इन पंक्तियों में क्या हो रहा है?
उत्तर

इन पंक्तियों में हवा और धूल का पकड़म-पकड़ाई वाला खेल शुरू होता है।

सरल अर्थ —

  • हवा आई और धूल को छेड़कर भाग गई।
  • धूल सो रही थी। छेड़ने से वह अचानक जाग गई।
  • वह हवा के पीछे-पीछे उड़ चली।
  • पर हवा चालाक निकली — वह धूल के नीचे जाकर छिप गई।
कवि क्या चित्र बना रहे हैं: कवि ने हवा और धूल को दो शरारती बच्चों जैसा बना दिया है। एक छेड़कर भागता है, दूसरा पीछे दौड़ता है। इसीलिए कविता पढ़ते ही हँसी आती है।
प्र2.
‘धूल खोजती आँखें मींचे / दाएँ-बाएँ आगे-पीछे’ — इन पंक्तियों का अर्थ अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर

इसका अर्थ है — धूल आँखें बंद किए हवा को हर तरफ़ ढूँढ़ रही है

वह दाईं ओर देखती है, बाईं ओर देखती है, आगे भी और पीछे भी। पर हवा उसे कहीं नहीं मिलती।

क्यों आँखें मींचे: धूल उड़ती है तो आँखों में चली जाती है और आँखें अपने-आप बंद हो जाती हैं। कवि ने इसी सच्ची बात को खेल बना दिया — जैसे धूल आँख-मिचौली खेल रही हो।
याद रखिए: ‘मींचना’ का अर्थ है आँखें कसकर बंद करना।
प्र3.
कविता के अंत में हवा ने क्या किया? ‘हवा-हवाई’ का यहाँ क्या अर्थ है?
उत्तर

अंत में हवा ने धूल की आँख में धूल झोंक दी और स्वयं गायब हो गई

कविता की पंक्तियाँ हैं — ‘धूल की आँख में धूल झोंककर / हवा हो गई हवा-हवाई!’

‘हवा-हवाई’ का अर्थ है — पल भर में गायब, जैसे थी ही नहीं। यहाँ इसका मज़ा दुगुना है, क्योंकि गायब होने वाली स्वयं हवा है।

चतुराई कहाँ है: ‘आँख में धूल झोंकना’ का अर्थ है किसी को चकमा देना। कवि ने इसी मुहावरे को सचमुच की धूल के साथ जोड़ दिया। इसीलिए अंतिम पंक्ति पढ़कर हँसी आ जाती है।
प्र4.
इस कविता में कई शब्द दो बार आए हैं, जैसे — पीछे-पीछे। ऐसे चार शब्द छाँटकर लिखिए।
उत्तर

कविता में दोहराए गए ये शब्द आए हैं —

शब्दकविता की पंक्ति
पीछे-पीछेउड़ी हवा के पीछे-पीछे
दाएँ-बाएँदाएँ-बाएँ आगे-पीछे
आगे-पीछेदाएँ-बाएँ आगे-पीछे
नीचे-नीचेनीचे-नीचे धूल के नीचे
ऐसे शब्द क्यों आते हैं: दोहराने से कविता में लय बन जाती है और गाते हुए पढ़ना अच्छा लगता है। साथ ही भाव भी बढ़ जाता है — ‘नीचे-नीचे’ कहने से लगता है कि हवा बहुत ही नीचे छिपी है।
जोड़िए: ‘नकली हीरे’ पाठ में भी ऐसा एक शब्द आया है — बारी-बारी।
प्र5.
कवि ने हवा और धूल को दो बच्चों की तरह दिखाया है। कविता से उदाहरण देकर बताइए।
उत्तर

हाँ, कवि श्याम सुशील ने हवा और धूल को दो शरारती बच्चों की तरह दिखाया है।

कविता की बातबच्चों जैसा काम
‘हवा धूल को छेड़के भागी’छेड़कर भाग जाना
‘सोती धूल अचानक जागी’नींद से चौंककर उठ जाना
‘उड़ी हवा के पीछे-पीछे’पकड़ने के लिए पीछे दौड़ना
‘धूल खोजती आँखें मींचे’आँख-मिचौली खेलना
‘हवा हो गई हवा-हवाई!’चकमा देकर छिप जाना
यह तरीका क्यों अच्छा लगता है: हवा और धूल तो निर्जीव हैं। पर जब वे छेड़ती, दौड़ती और छिपती हैं, तो हमें अपना ही खेल याद आ जाता है। इसीलिए कविता अपनी-सी लगती है।
क्या यह उपयोगी रहा?