प्र1.
‘हवा धूल को छेड़के भागी / सोती धूल अचानक जागी / उड़ी हवा के पीछे-पीछे / हवा हो गई धूल के नीचे’ — इन पंक्तियों में क्या हो रहा है?
उत्तर
इन पंक्तियों में हवा और धूल का पकड़म-पकड़ाई वाला खेल शुरू होता है।
सरल अर्थ —
- हवा आई और धूल को छेड़कर भाग गई।
- धूल सो रही थी। छेड़ने से वह अचानक जाग गई।
- वह हवा के पीछे-पीछे उड़ चली।
- पर हवा चालाक निकली — वह धूल के नीचे जाकर छिप गई।
कवि क्या चित्र बना रहे हैं: कवि ने हवा और धूल को दो शरारती बच्चों जैसा बना दिया है। एक छेड़कर भागता है, दूसरा पीछे दौड़ता है। इसीलिए कविता पढ़ते ही हँसी आती है।