कक्षा ५ गणित अध्याय 10 आइए अन्वेषण करें के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन2026-09-19
प्र1.
नीचे लकड़ी के ब्लॉक और उनके छाप के एक भाग के चित्र दिए गए हैं। रेखाएँ खींचकर प्रत्येक ब्लॉक को उसके सही छाप से मिलाइए। एक मिलान आपके लिए किया हुआ है।
लकड़ी के ब्लॉक
छापें
पृष्ठ 140 के पाँच लकड़ी के ब्लॉक और पाँच छापें, जो फ़ोटो से सरल रेखाचित्र के रूप में यहाँ बनाई गई हैं। प्रत्येक छाप ब्लॉक की अभिकल्पना का केवल आधा भाग दिखाती है। एक मिलान आपके लिए किया हुआ है: ब्लॉक (iv) की छाप (e) है।
उत्तर
मिलान इस प्रकार हैं: (1)–(ग), (2)–(घ), (3)–(क), (4)–(ङ) (जो आपके लिए पहले ही किया हुआ है) और (5)–(ख)।
नीचे की पंक्ति की हर छाप ब्लॉक की अभिकल्पना का केवल आधा भाग दिखाती है — सममिति रेखा के एक ओर वाला आधा। इसलिए मिलाने के लिए आधा भाग देखकर मोड़ की कल्पना कीजिए।
ब्लॉक
ब्लॉक में क्या है
छाप
छाप में क्या है
(1)
आम जैसी बूटी (पैज़ली), जिसके चारों ओर छोटे-छोटे कंगूरों की माला है
(ग)
आधी बूटी, वैसे ही कंगूरेदार किनारे के साथ
(2)
नुकीली पंखुड़ियों वाला कमल और नीचे एक पत्ती
(घ)
आधा नुकीला कमल और नीचे आधी पत्ती
(3)
गोल फूल, जिसके चारों ओर पंखुड़ियाँ हैं
(क)
आधा गोल फूल
(4)
अर्धवृत्त जैसा पंखा और नीचे एक छोटी घुंडी
(ङ)
चौथाई पंखा और आधी घुंडी — यह मिलान किया हुआ है
(5)
सीधे तने वाला ऊँचा पौधा, जिसकी दोनों ओर पत्तियाँ हैं
(ख)
आधा पौधा — तना और केवल एक ओर की पत्तियाँ
आप स्वयं कैसे मिलाएँ:
छाप की बाहरी रूपरेखा देखिए। वह गोल है, नुकीली है, ऊँची-पतली है या पंखे जैसी?
वैसी ही रूपरेखा वाला ब्लॉक ढूँढ़िए। ऊँची-पतली छाप ऊँचे-पतले ब्लॉक से ही बनी होगी।
छोटी-छोटी बातें जाँचिए। किनारे के कंगूरे गिनिए, या पंखुड़ियों का आकार देखिए।
मोड़ की कल्पना कीजिए। छाप के सीधे किनारे पर दर्पण रखिए। जो चित्र दिखे वह पूरे ब्लॉक जैसा होना चाहिए।
बिंदुदार रेखा पर रखा दर्पण आधी अभिकल्पना को पूरी अभिकल्पना बना देता है।
छापों में आधा भाग ही क्यों दिखाया गया है: उत्कीर्ण ब्लॉक सममित होता है, इसलिए उसका आधा भाग ही सब कुछ बता देता है। ठप्पा छापने वाले इसी बात का उपयोग करते हैं — प्रतिरूप के दोनों भाग सदा मेल खाते हैं, इसीलिए छपा हुआ कपड़ा इतना सुंदर लगता है।
क्या आप जानते हैं? ठप्पा छपाई (ब्लॉक प्रिंट) राजस्थान का एक पारंपरिक शिल्प है। शिल्पकार लकड़ी के ठप्पे पर अभिकल्पना उत्कीर्ण करते हैं, उसे रंग में डुबोकर कपड़े पर बार-बार दबाते हैं। यह कला कई शताब्दियों से प्रचलित है और राजस्थानी वस्त्रों को विशेष बनाती है।