कक्षा ५ गणित अध्याय 10 एक ब्लॉक से बनी छाप के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन2026-09-19
प्र1.
नीचे दिए गए लकड़ी के गुटके से बनाई गई अभिकल्पना को ध्यान से देखें। गुटके को 4 बार प्रयोग करने पर पूरी अभिकल्पना बनकर तैयार होती है। अभिकल्पना ‘क’ को देखिए। प्रत्येक 1/4 मोड़ के बाद यह समान है।लकड़ी के गुटके पर एक ही पत्ती है। गुटके को चार बार प्रयोग करने पर छाप ‘क’ बनती है।
उत्तर
एक पत्ती वाला ठप्पा चार बार छापा गया — ऊपर, दाएँ, नीचे और बाएँ मुँह करके — और पूरी अभिकल्पना 'क' बन गई।
लकड़ी के गुटके को देखिए: उस पर केवल एक पत्ती है। अब छाप देखिए: उसमें चार पत्तियाँ हैं, जोड़ के चिह्न (+) की तरह जमी हुईं।
एक छाप और दूसरी छाप के बीच गुटके को एक-चौथाई घुमाया जाता है।
छाप कैसे बनती है:
एक बार छापिए, पत्ती का मुँह ऊपर की ओर रखकर।
गुटके को 1/4 घुमाइए और फिर छापिए — अब पत्ती दाईं ओर मुँह किए है।
एक और 1/4 घुमाइए और छापिए — पत्ती नीचे की ओर।
एक बार और घुमाइए और छापिए — पत्ती बाईं ओर।
चार छापों में अभिकल्पना 'क' पूरी हो जाती है।
पत्तियों की संख्या = 4, सब एक जैसी और बराबर दूरी पर एक पूरा घुमाव ÷ 4 = 1/4 घुमाव इसलिए अभिकल्पना 'क' हर 1/4 घुमाव पर समान दिखती है वह एक पूरे घुमाव में 4 बार समान दिखती है
छाप में सममिति क्यों आ जाती है: दो छापों के बीच गुटके को ही एक-चौथाई घुमाया गया था। प्रतिरूप बनाते समय जो हलचल आप करते हैं, वही हलचल बाद में उस प्रतिरूप को अनबदला छोड़ देती है।
अभिकल्पना 'क' मुड़ती भी है। हर पत्ती अपनी बाईं और दाईं ओर से एक जैसी है। इसलिए 'क' में 4 सममिति रेखाएँ भी हैं — खड़ी, लेटी और दोनों तिरछी।
प्र2.
अभिकल्पना ‘ख’ को देखिए। प्रत्येक ____________ मोड़ के बाद समान है। इस अभिकल्पना में _________________ सममिति है।अभिकल्पना ‘ख’, पुस्तक में छपी दो बिंदुदार रेखाओं के साथ।
उत्तर
अभिकल्पना 'ख' प्रत्येक 1/4 मोड़ के बाद समान है। इस अभिकल्पना में घूर्णन और परावर्तन — दोनों सममिति है।
अभिकल्पना 'ख' चार दिल जैसी पंखुड़ियों से बनी है — एक ऊपर, एक दाएँ, एक नीचे और एक बाएँ, सब केंद्र पर मिलती हुईं।
बिंदुदार रेखाएँ वही हैं जो आपकी पुस्तक में छपी हैं। किसी पर भी मोड़िए, दोनों भाग मेल खाएँगे।
चरण-दर-चरण तर्क:
पंखुड़ियाँ गिनिए। कुल 4 हैं, सब बिल्कुल एक जैसी।
पूरे घुमाव को उनमें बाँटिए। 1 पूरा घुमाव ÷ 4 = 1/4 घुमाव।
पन्ने को एक-चौथाई घुमाइए। हर पंखुड़ी वहीं आ जाती है जहाँ अगली थी, इसलिए अभिकल्पना वैसी ही दिखती है। यही घूर्णन सममिति है।
अब मोड़िए। पुस्तक ने दोनों मोड़ने की रेखाएँ पहले ही खींच दी हैं — एक खड़ी और एक लेटी। किसी पर भी मोड़िए, दोनों भाग एक-दूसरे को ढक लेते हैं। यही परावर्तन सममिति है।
इसलिए अभिकल्पना 'ख' में दोनों सममितियाँ हैं।
समान दिखती है: 1/4, 1/2, 3/4 और पूरे घुमाव पर पूरे घुमाव में कितनी बार = 4 सममिति रेखाएँ = 2 (खड़ी और लेटी)
यह 'क' जैसी क्यों है: दोनों अभिकल्पनाएँ एक ही तरीके से बनी हैं — एक उत्कीर्ण आकृति, चार बार छापी गई, और हर बार एक-चौथाई घुमाई गई। एक ही तरीका, इसलिए एक ही सममिति।