सुझाव: सेकंड की सुई सदा सबसे पतली और सबसे लंबी बनाई जाती है। यदि आपकी सुई छोटी और मोटी बन गई तो वह घंटे की सुई जैसी दिखेगी।
प्र2.
(2) रानी एक आयत को रंगने में 30 सेकंड लगाती है।
उत्तर
सेकंड की सुई 6 की ओर बनाइए — सीधे नीचे की ओर।
डायल का आधा चक्कर 30 सेकंड का होता है, और 12 से आधा चक्कर 6 पर आकर रुकता है।
बाईं घड़ी: लाल सुई 12 पर → आरंभिक पाठ्यांक 0 सेकंड।
जोड़िए: 0 + 30 = 30 सेकंड।
अंक ज्ञात कीजिए: 30 ÷ 5 = 6।
पतली सुई सीधे नीचे 6 तक खींचिए।
30 सेकंड = 30 ÷ 5 = अंक 6 30 सेकंड आधा मिनट भी होता है, क्योंकि 60 ÷ 2 = 30
चित्र में देखिए: गोल डायल का आधा भाग 30 सेकंड, चौथाई भाग 15 सेकंड और तीन-चौथाई भाग 45 सेकंड का होता है। ये तीन बातें याद कर लीजिए, फिर सेकंड की सुई एक नज़र में पढ़ी जाएगी।
प्र3.
(3) राघव को अपने घर से बगीचे तक जाने में 60 सेकंड लगते हैं।
उत्तर
सेकंड की सुई ठीक 9 की ओर बनाइए — वहीं जहाँ वह पहले थी।
एक पूरा चक्कर लगाकर सेकंड की सुई फिर 9 पर आ जाती है। मिनट की सुई एक छोटा निशान आगे बढ़ जाती है।
बाईं घड़ी: लाल सुई 9 पर है, अत: आरंभिक पाठ्यांक 45 सेकंड है।
लगा समय जोड़िए: 45 + 60 = 105 सेकंड।
उनमें से 60 सेकंड बदलकर 1 मिनट बना लीजिए: 105 − 60 = 45। अर्थात 1 मिनट 45 सेकंड बाद का समय।
पूरा मिनट मिनट की सुई दिखाती है, लाल सुई नहीं। अत: लाल सुई फिर 45 सेकंड पर, यानी अंक 9 पर आ जाएगी।
60 सेकंड बाद सुई उसी स्थान पर क्यों आ जाती है: डायल का एक पूरा चक्कर ही 60 सेकंड का होता है। अत: ठीक 60 सेकंड बाद सुई घर लौट आती है। 120 सेकंड में वह दो बार घर लौटेगी।
यह भी दर्शाइए: हरी मिनट की सुई अब एक छोटा निशान आगे होनी चाहिए, क्योंकि पूरा एक मिनट बीत चुका है।
प्र4.
(4) ऋतु को एक प्लेट को धोने में 40 सेकंड लगते हैं।
उत्तर
सेकंड की सुई 7 की ओर बनाइए।
सेकंड की सुई 11 (55 सेकंड) से चलती है, 12 को पार करती है और 7 (35 सेकंड) पर रुकती है।
बाईं घड़ी: लाल सुई 11 पर है। पाँच-पाँच करके गिनिए: 5, 10, … , 55 सेकंड।
लगा समय जोड़िए: 55 + 40 = 95 सेकंड।
95, 60 से बड़ा है, अत: सुई 12 को पार कर चुकी है। 60 सेकंड बदलकर 1 मिनट बना लीजिए: 95 − 60 = 35।
55 सेकंड + 40 सेकंड = 95 सेकंड 95 सेकंड = 60 सेकंड + 35 सेकंड 60 सेकंड = 1 मिनट (मिनट की सुई को दे दिया) सेकंड की सुई दिखाएगी 35 सेकंड → अंक 7
60 ही क्यों घटाया, 100 क्यों नहीं: यहीं समय साधारण संख्याओं से अलग हो जाता है। साधारण गिनती में हम दस-दस के बंडल बनाते हैं। समय में साठ-साठ के बंडल बनते हैं: 60 सेकंड से एक मिनट बनता है, इसलिए 60 पर पहुँचते ही उसे मिनट की सुई को सौंपकर हम फिर 0 से गिनने लगते हैं।
डायल पर गिनकर देखिए: 11 से 12 तक 5 सेकंड। बचे 40 − 5 = 35 सेकंड, जो ऊपर से आगे चलेंगे। 12 से 35 सेकंड आगे अंक 7 है ✓