प्र1.
उन्होंने देखा कि उनकी दुकान में अनेक प्रकार की बहुत सारी वस्तुएँ हैं और प्रत्येक वस्तु का चित्र बनाना सरल कार्य नहीं है। “मैं इन्हें चित्रों के माध्यम से कैसे दिखा सकता हूँ?” उन्हें कुछ उपाय सुझाइए।
उत्तर
एक चित्र को केवल एक वस्तु का नहीं, बहुत-सी वस्तुओं का बनाइए। पूरी युक्ति यही है, और इसे पैमाना कहते हैं।
जोसेफ चाचा ये उपाय आज़मा सकते हैं।
- एक चित्र = 5 वस्तुएँ लीजिए। हर 5 खिलौनों के लिए एक रेलगाड़ी बनाइए। तब 40 खिलौनों के लिए 40 नहीं, केवल 8 रेलगाड़ियाँ चाहिए।
- संख्याएँ बहुत बड़ी हों तो एक चित्र = 10 वस्तुएँ लीजिए। तब 40 खिलौनों के लिए केवल 4 रेलगाड़ियाँ चाहिए।
- आधे पैमाने के लिए आधा चित्र बनाइए। यदि एक रेलगाड़ी 10 खिलौने हैं, तो आधी रेलगाड़ी 5 खिलौने। अत: 45 खिलौने = 4 रेलगाड़ियाँ और आधी रेलगाड़ी।
- कुंजी अवश्य लिखिए। आरेख पर कहीं लिखना होगा — एक रेलगाड़ी = 5 खिलौने, नहीं तो कोई उनका आरेख पढ़ ही नहीं सकेगा।
- हर प्रकार की वस्तु के लिए अलग चित्र लीजिए — खिलौनों के लिए रेलगाड़ी, बोर्ड-खेल के लिए बोर्ड, खेल-कूद के लिए रैकेट। तब तीनों पंक्तियाँ कभी नहीं गड्डमड्ड होंगी।
- चित्रों की जगह दंड बनाइए। खिलौनों के लिए एक ऊँचा दंड, बोर्ड-खेल के लिए एक, खेल-कूद के लिए एक। यही दंड-आरेख है और यह तो और भी जल्दी बन जाता है।
ऐसा क्यों होता है: चित्र-आरेख इसलिए बनता है कि एक नज़र में पढ़ा जा सके। एक पंक्ति में चालीस छोटी रेलगाड़ियाँ एक नज़र में गिनी नहीं जा सकतीं — गिनते-गिनते जगह भूल जाती है। आठ रेलगाड़ियाँ गिनी जा सकती हैं।