कक्षा ५ गणित अध्याय 6 आइए विचार करें के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
दी गई आकृतियाँ 1 से 24 के बीच की संख्याओं को दर्शाती हैं। एक आकृति सभी समस्याओं में एक ही संख्या को दर्शाती है। सभी आकृतियों में छुपी हुई संख्याएँ ज्ञात कीजिए।
(क)×=(घ)×=(ख)×=(ङ)×=(ग)×=(च)×=×
पृष्ठ 70 पर छपी छह आकृति-समस्याएँ। एक ही आकृति सदैव एक ही संख्या दर्शाती है।
उत्तर

एक संभावित उत्तर: हरा पंचभुज = 1, नारंगी समचतुर्भुज = 2, गुलाबी वृत्त = 3, नीला आयत = 4, पीला समांतर चतुर्भुज = 6, बैंगनी त्रिभुज = 12, सफ़ेद आकृति = 16, नीला अर्धचंद्र = 18.

पहेली को खोलने का क्रम यह रहा। सबसे पहले वह संकेत लीजिए जो अकेले ही एक संख्या बता देता है।

  1. (घ) देखिए: समचतुर्भुज × पंचभुज = समचतुर्भुज। कोई संख्या तभी अपरिवर्तित रहती है जब उसे 1 से गुणा किया जाए। अत: हरा पंचभुज = 1
  2. (ख) देखिए: आयत × आयत = सफ़ेद आकृति। आयत को स्वयं से गुणा करने पर उत्तर 24 से अधिक नहीं हो सकता। अत: आयत केवल 1, 2, 3 या 4 हो सकता है। सबसे बड़ा लीजिए: आयत = 4। तब सफ़ेद आकृति = 4 × 4 = 16
  3. (क) देखिए: आयत × वृत्त = त्रिभुज। वृत्त = 3 लीजिए। तब त्रिभुज = 4 × 3 = 12
  4. (ग) देखिए: समांतर चतुर्भुज × समचतुर्भुज = त्रिभुज। ऐसी दो संख्याएँ चाहिए जिनका गुणनफल 12 हो। समांतर चतुर्भुज = 6 और समचतुर्भुज = 2 लीजिए। (घ) फिर से जाँचिए: 2 × 1 = 2 ✓
  5. (ङ) देखिए: समांतर चतुर्भुज × वृत्त = अर्धचंद्र। 6 × 3 = 18, जो 24 से कम है ✓
  6. (च) जाँचिए: अर्धचंद्र × आयत = 18 × 4 = 72, और समांतर चतुर्भुज × त्रिभुज = 6 × 12 = 72. दोनों ओर 72 ✓
आकृतिसंख्याजाँच
हरा पंचभुज1(घ) 2 × 1 = 2
नारंगी समचतुर्भुज2(ग) 6 × 2 = 12
गुलाबी वृत्त3(क) 4 × 3 = 12
नीला आयत4(ख) 4 × 4 = 16
पीला समांतर चतुर्भुज6(ङ) 6 × 3 = 18
बैंगनी त्रिभुज12(च) 6 × 12 = 72
सफ़ेद आकृति16(ख) 4 × 4 = 16
नीला अर्धचंद्र18(च) 18 × 4 = 72
ऐसा क्यों होता है: संकेत (घ) ही ताला खोलने वाली चाबी है। 1 से गुणा करने पर संख्या कभी नहीं बदलती, इसलिए पंचभुज को 1 होना ही था। उसके बाद हर अगले संकेत को केवल पहले वाले संकेतों से मेल खाना था।
क्या आप जानते हैं? इस पहेली का एक से अधिक उत्तर है। यदि आयत को 4 के स्थान पर 3 मान लें तो संख्याओं का दूसरा समुच्चय भी सही बैठता है। कीजिए और देखिए — बस ध्यान रहे कि हर आकृति 1 और 24 के बीच ही रहे।
प्र2.
100 के समीप गुणनफल प्राप्त करने के लिए अंक 2, 3 और 5 को उचित स्थान पर रखिए। कक्षा में अपने तर्क को साझा कीजिए।
उत्तर

दो-अंकीय स्थान पर 53 और एक-अंकीय स्थान पर 2 रखिए: 53 × 2 = 106। यही 100 के सबसे समीप है।

तीन अंकों को केवल छह प्रकार से रखा जा सकता है। सभी बनाकर तुलना कीजिए।

व्यवस्थागुणनफल100 से दूरी
53 × 21066
23 × 511515
52 × 315656
32 × 516060
25 × 37525
35 × 27030
53 × 2
चरण 1. 50 × 2 = 100
चरण 2. 3 × 2 = 6
चरण 3. 100 + 6 = 106
कक्षा में साझा करने योग्य नमूना तर्क: मुझे 100 के पास उत्तर चाहिए। यदि एक-अंकीय संख्या बड़ी, जैसे 5, हो तो उत्तर 100 से बहुत आगे निकल जाता है। इसलिए मैंने छोटा अंक 2 गुणक रखा। फिर दो-अंकीय संख्या को 50 के जितना पास बना सका, बनाया, क्योंकि 50 × 2 ठीक 100 है। 5 और 3 से बनने वाली सबसे बड़ी संख्या 53 है, और 53 × 2 = 106. केवल 6 का अंतर।
प्र3.
एक दुग्धशाला में छाछ की थैलियों (पाउच) को नीचे दी गई व्यवस्था में सीलबंद (पैक) किया गया है। प्रत्येक व्यवस्था में रखी गई थैलियों की संख्या ज्ञात कीजिए। यहाँ एक समस्या आपके लिए हल कर दी गई है। (पहली व्यवस्था: 30 × 2 = 60)
उत्तर

चारों व्यवस्थाओं में 60-60 थैलियाँ हैं। केवल समूह बनाने का ढंग बदलता है।

  1. पहली व्यवस्था (हल की हुई): थैलियाँ जोड़ों में हैं। हर पंक्ति में 6 जोड़े और कुल 5 पंक्तियाँ, अत: 6 × 5 = 30 जोड़े। यानी 30 × 2 = 60
  2. दूसरी व्यवस्था: थैलियाँ तीन-तीन के समूहों में हैं। हर पंक्ति में 4 समूह और 5 पंक्तियाँ, अत: 4 × 5 = 20 समूह। यानी 20 × 3 = 60
  3. तीसरी व्यवस्था: 2 चौड़े और 5 ऊँचे खंड, अर्थात् हर खंड में 10 थैलियाँ। ऐसे 6 खंड हैं। यानी 6 × 10 = 60
  4. चौथी व्यवस्था: 12-12 थैलियों की लंबी पंक्तियाँ, कुल 5 पंक्तियाँ। यानी 5 × 12 = 60
वही 60 थैलियाँ, समूह बनाने के चार ढंग 2-2 के समूह → 30 × 2 3-3 के समूह → 20 × 3 10-10 के खंड → 6 × 10 12-12 की पंक्तियाँ → 5 × 12
थैलियाँ वही रहती हैं। केवल समूह का आकार बदलता है, इसलिए दोनों संख्याएँ आपस में बदल जाती हैं।
30 × 2 = 60
20 × 3 = 60
6 × 10 = 60
5 × 12 = 60
ऐसा क्यों होता है: समूह जितना बड़ा बनाइए, समूहों की संख्या उतनी ही कम चाहिए। समूह का आकार दोगुना होने पर समूहों की संख्या आधी रह जाती है, इसलिए कुल संख्या ठीक वही बनी रहती है।
प्र4.
आप कौन-से अन्य समूह बना सकते हैं?
उत्तर

60 थैलियों के बारह अलग-अलग समूह बनाए जा सकते हैं। जिन दो संख्याओं का गुणनफल 60 हो, वे सब एक-एक ढंग देती हैं।

समूहों की संख्यासमूह का आकारकुल
16060
23060
32060
41560
51260
61060
10660
12560
15460
20360
30260
60160

बिना कोई ढंग छोड़े सब खोजने का तरीका:

  1. 1 से आरंभ कीजिए। पूछिए: क्या 60 को 1 समूह में बाँटा जा सकता है? हाँ — 60 का एक समूह।
  2. फिर 2, फिर 3, फिर 4 — हर बार पूछिए कि क्या 60 पूरा-पूरा बँट जाता है।
  3. साथी संख्या पास में लिखिए। 60 ÷ 3 = 20, अत: 3 और 20 साथी हैं।
  4. जब युग्म दोहराने लगें, रुक जाइए। 6 × 10 के बाद 10 × 6 आता है, जो पहले ही लिखा जा चुका है।
स्वयं जाँचिए: 7 से काम नहीं चलता, क्योंकि 60 थैलियों को 7-7 के समूहों में बाँटने पर कुछ बच जाती हैं। इसी तरह 8, 9, 11, 13 और 14 भी नहीं चलते — इसीलिए वे तालिका में नहीं हैं।
प्र5.
मैं कौन-सी संख्या हूँ? मैं दो-अंकीय संख्या हूँ। निम्नलिखित संकेतों की सहायता से मुझे ढूँढ़िए। (क) मैं 8 से बड़ी संख्या हूँ। (ख) मैं 4 की गुणज संख्या नहीं हूँ। (ग) मैं 9 की गुणज संख्या हूँ। (घ) मैं एक विषम संख्या हूँ। (ङ) मैं 11 की गुणज संख्या नहीं हूँ। (च) मेरी आयु 50 वर्ष से कम है। (छ) मेरी इकाई का अंक सम संख्या है। (ज) मेरी दहाई का अंक विषम संख्या है।
उत्तर

वह संख्या 18 है।

संकेतों को एक-एक करके लगाइए और संख्याएँ काटते जाइए।

  1. संकेत (ग) — मैं 9 की गुणज हूँ। दो-अंकीय गुणज हैं: 18, 27, 36, 45, 54, 63, 72, 81, 90, 99.
  2. संकेत (च) — मैं 50 से कम हूँ। अब बचे: 18, 27, 36, 45
  3. संकेत (छ) — मेरी इकाई का अंक सम है। 27 का इकाई अंक 7 और 45 का 5 है, दोनों विषम। इन्हें काट दीजिए। बचे: 18, 36
  4. संकेत (ख) — मैं 4 की गुणज नहीं हूँ। 36 = 4 × 9, अत: 36 काट दीजिए। बचा: 18
  5. संकेत (ज) — मेरी दहाई का अंक विषम है। 18 की दहाई में 1 है, और 1 विषम है ✓
50 से कम 9 के गुणज: 18, 27, 36, 45
इकाई अंक सम → 18, 36
4 का गुणज नहीं → 18
एक संकेत मेल नहीं खाता: संकेत (घ) कहता है कि संख्या विषम है, पर 18 सम है। जिस संख्या का इकाई अंक सम हो (संकेत छ), वह विषम हो ही नहीं सकती (संकेत घ) — ये दोनों संकेत आपस में टकराते हैं। शेष सभी संकेत दृढ़ता से 18 की ओर संकेत करते हैं, अत: उत्तर 18 है। शिक्षक के पूछने पर स्पष्ट कह दीजिए कि संकेत (घ) मुद्रण की चूक लगती है।
एक और बात: हिंदी पुस्तक में संकेत (च) "मेरी आयु 50 वर्ष से कम है" छपा है, जबकि अंग्रेज़ी पुस्तक में "मैं 50 से कम हूँ" है। संख्या की बात हो रही है, आयु की नहीं — अर्थ वही लीजिए: संख्या 50 से छोटी है।
प्र6.
क्या आपने संख्या ज्ञात करने के लिए सभी संकेतों का उपयोग किया है? किन संकेतों से आपको संख्या ज्ञात करने में सहायता नहीं मिली?
उत्तर

नहीं — दो संकेतों से कोई सहायता नहीं मिली: (क) और (ङ)।

  1. संकेत (क) — मैं 8 से बड़ी हूँ। पहेली पहले ही बता चुकी है कि संख्या दो-अंकीय है। हर दो-अंकीय संख्या 10 या उससे बड़ी होती है, अत: वह 8 से बड़ी है ही। इस संकेत से कोई संख्या नहीं कटी।
  2. संकेत (ङ) — मैं 11 की गुणज नहीं हूँ। दो-अंकीय 11 के गुणज हैं 11, 22, 33, 44, 55, 66, 77, 88 और 99. इनमें से केवल 99 ही 9 का गुणज है, और 99 तो पहले ही 50 से बड़ा होने के कारण कट चुका था। अत: इस संकेत से भी कुछ नहीं कटा।

जिन संकेतों ने वास्तव में काम किया वे हैं — (ग) 9 का गुणज, (च) 50 से कम, (छ) इकाई अंक सम, और (ख) 4 का गुणज नहीं।

ऐसा क्यों होता है: कोई संकेत तभी उपयोगी है जब वह कुछ संख्याओं को हटाए। यदि बची हुई सभी संख्याएँ उस संकेत को पहले से मानती हों, तो वह संकेत केवल अतिरिक्त शब्द है। अच्छे पहेली-हल करने वाले सदा देखते हैं कि कौन-सा संकेत सचमुच काम कर रहा है।
प्र7.
अपनी स्वयं की संख्याएँ बनाइए। जाल (ग्रिड) से कोई भी दो संख्याएँ और एक संक्रिया को चुनिए। 0 से 20 के मध्य की सभी संख्याएँ बनाने का प्रयत्न कीजिए। उदाहरण के लिए, 2 को 4 – 2 के रूप में बनाया जा सकता है। क्या आप सभी संख्याएँ बना सकते हैं?
100255102361243×+÷
पृष्ठ 71 पर छपा संख्या जाल और चार संक्रिया कार्ड।
उत्तर

1 से 20 तक की हर संख्या बन जाती है, केवल 19 को छोड़कर। 0 भी नहीं बनता। अर्थात् 21 में से 19 संख्याएँ बन सकती हैं।

हर संख्या का एक ढंग नीचे दिया है। प्राय: एक से अधिक ढंग होते हैं।

संख्याएक ढंगसंख्याएक ढंग
0संभव नहीं1136 − 25
13 − 2124 × 3
24 − 2133 + 10
35 − 2144 + 10
412 ÷ 3155 + 10
53 + 2164 + 12
62 × 3175 + 12
75 + 21836 ÷ 2
84 × 219संभव नहीं
936 ÷ 4205 × 4
1012 − 2
0 क्यों नहीं बनता: घटाकर 0 पाने के लिए दो बराबर संख्याएँ चाहिए, पर जाल की हर संख्या अलग है। गुणा करके 0 पाने के लिए जाल में 0 चाहिए, जो है ही नहीं। दो धनात्मक संख्याओं को जोड़ने या भाग देने से भी 0 नहीं मिलता।
यह कीजिए: केवल छोटी संख्याओं 2, 3, 4, 5, 10 और 12 से जितने उत्तर बन सकते हैं, उनकी सूची बनाइए। 0 से 20 के अधिकांश उत्तर वहीं छिपे मिलेंगे।
प्र8.
आप कौन-सी संख्याएँ नहीं बना सके? क्या तीन संख्याओं का उपयोग करके ये संख्याएँ बनाना संभव है? यदि आवश्यकता हो तो आप दो संक्रियाओं का उपयोग भी कर सकते हैं।
उत्तर

दो संख्याओं से जो नहीं बन सकीं वे हैं 0 और 19। तीन संख्याओं और दो संक्रियाओं से दोनों सरलता से बन जाती हैं।

0 = 5 − 3 − 2
चरण 1. 5 − 3 = 2
चरण 2. 2 − 2 = 0

19 = 12 + 10 − 3
चरण 1. 12 + 10 = 22
चरण 2. 22 − 3 = 19

अन्य ढंग जो चलते हैं:

  • 0 = 12 ÷ 4 − 3, क्योंकि 12 ÷ 4 = 3 और 3 − 3 = 0.
  • 19 = 25 − 4 − 2, क्योंकि 25 − 4 = 21 और 21 − 2 = 19.
  • 36 ÷ 2 = 18 से 19 बनाना चाहें तो 1 चाहिए, पर जाल में 1 नहीं है — अत: यह ढंग नहीं चलता। सदा जाँच कीजिए।
तीसरी संख्या से सहायता क्यों मिलती है: दो संख्याओं से केवल एक छलाँग मिलती है। तीन संख्याओं से दो छलाँगें मिलती हैं, इसलिए आप आगे बढ़कर वापस लौट सकते हैं। 12 + 10 − 3 ठीक यही करता है — 22 तक जाता है और 19 पर लौट आता है।
प्र9.
0–20 के मध्य कौन-सी संख्याएँ आप एक से अधिक विधियों से बना सकते हैं?
उत्तर

अधिकांश संख्याएँ। केवल 11, 16, 17 और 18 का एक-एक ही ढंग है। 1 से 20 तक की शेष सभी संख्याएँ दो या अधिक ढंगों से बनती हैं।

संख्याबनाने के ढंग
13 − 2, 5 − 4, 4 − 3
24 − 2, 5 − 3, 12 − 10, 10 ÷ 5, 4 ÷ 2
35 − 2, 36 ÷ 12
412 ÷ 3, 100 ÷ 25
53 + 2, 25 ÷ 5, 10 − 5, 10 ÷ 2
64 + 2, 2 × 3, 10 − 4, 12 ÷ 2
75 + 2, 3 + 4, 12 − 5, 10 − 3
85 + 3, 10 − 2, 4 × 2, 12 − 4
912 − 3, 36 ÷ 4
1012 − 2, 100 ÷ 10, 5 × 2
11केवल 36 − 25
122 + 10, 4 × 3, 36 ÷ 3
133 + 10, 25 − 12
142 + 12, 4 + 10
155 + 10, 3 + 12, 25 − 10, 5 × 3
16केवल 4 + 12
17केवल 5 + 12
18केवल 36 ÷ 2
205 × 4, 25 − 5, 100 ÷ 5, 2 × 10
स्वयं जाँचिए: छोटी संख्याएँ 2, 3, 4, 5, 10 और 12 आपस में कई प्रकार से जुड़ती हैं, इसलिए छोटे उत्तरों के कई रास्ते हैं। बड़ी संख्याएँ 25, 36 और 100 गिने-चुने स्थानों पर ही फिट होती हैं, इसीलिए 11, 16, 17 और 18 का एक ही रास्ता है।
क्या यह उपयोगी रहा?