कक्षा ५ गणित अध्याय 7 विंशतिफलक एवं द्वादशफलक के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
उपर्युक्त नामों का क्या अर्थ है? जब आप इनके फलकों को गिनेंगे तो आपको ज्ञात होगा।
उत्तर

नाम बस यह बताते हैं कि ठोस में कितने फलक हैं।

नामटुकड़ों मेंअर्थफलकों की संख्या
विंशतिफलकविंशति + फलकबीस + फलक20
द्वादशफलकद्वादश + फलकबारह + फलक12

अपने मॉडल के फलक बिना गलती किए कैसे गिनें

  1. मॉडल को एक फलक मेज़ पर टिकाकर पकड़िए। ऊपर और चारों ओर दिखने वाले फलक गिनिए।
  2. हर गिने हुए फलक पर पेंसिल से छोटा निशान लगाइए, ताकि वही फलक दोबारा न गिना जाए।
  3. मॉडल पलटिए और बाकी फलक गिनिए।
  4. जोड़िए। विंशतिफलक में 20 और द्वादशफलक में 12 आना चाहिए।
नाम कहाँ से आए: ये संस्कृत के शब्द हैं। फलक का अर्थ है सतह। ऐसे ही और शब्द आप पहले से जानते हैं — पंचभुज में 5 भुजाएँ होती हैं क्योंकि पंच का अर्थ पाँच है, और षट्भुज में 6 क्योंकि षट् का अर्थ छह है।
परिवार के दो और सदस्य: चतुष्फलक में 4 फलक होते हैं (चतुर् = चार) और अष्टफलक में 8 (अष्ट = आठ)। घन के साथ मिलाकर ये पाँच ही ऐसे ठोस हैं जिनके सभी फलक एक ही सम आकृति के होते हैं।
प्र2.
विंशतिफलक एवं द्वादशफलक में आपको कौन-सी आकृतियाँ दिखाई देती हैं? विंशतिफलक — ........ द्वादशफलक — ........
उत्तर

विंशतिफलक: समबाहु त्रिभुज।  द्वादशफलक: सम पंचभुज।

द्वादशफलक का एक फलक एक सम पंचभुज — ऐसे 12 विंशतिफलक का एक फलक एक समबाहु त्रिभुज — ऐसे 20
विंशतिफलक का हर फलक एक ही त्रिभुज है; द्वादशफलक का हर फलक एक ही पंचभुज।
विंशतिफलक = 20 समबाहु त्रिभुज
द्वादशफलक = 12 सम पंचभुज
ये ही दो आकृतियाँ क्यों: किसी ठोस के बंद होने के लिए हर कोने पर मिलने वाले फलकों को मुड़ना पड़ता है, चपटा नहीं रहना चाहिए। त्रिभुज और पंचभुज के कोने इतने छोटे होते हैं कि यह मुड़ाव हो जाता है। इसीलिए सम षट्भुजों से कोई ठोस नहीं बनता — एक कोने पर तीन षट्भुज ठीक चपटे बैठ जाते हैं, जैसा आपने टाइल्स वाली गतिविधि में देखा था।
आपने कहाँ देखा है: फुटबॉल पंचभुजों और षट्भुजों को सिलकर बनाई जाती है। बोर्ड-गेम में इस्तेमाल होने वाला बीस फलकों वाला पासा विंशतिफलक ही होता है।
प्र3.
क्या सभी फलक एक समान दिखाई देते हैं? विंशतिफलक — ........ द्वादशफलक — ........
उत्तर

विंशतिफलक: हाँ।  द्वादशफलक: हाँ। दोनों ठोसों में हर फलक ठीक एक ही आकृति और एक ही माप का है।

पक्का कैसे करें

  1. जाल के बचे हुए कागज से एक अतिरिक्त फलक काट लीजिए — एक त्रिभुज, या एक पंचभुज।
  2. उसे मॉडल के हर फलक पर बारी-बारी रखिए।
  3. वह हर फलक को ठीक ढक लेता है — न कुछ बाहर निकलता है, न कोई जगह बचती है।
  4. अतः सभी फलक एक जैसे हैं।
वे एक जैसे होने ही थे: पुस्तक के अंत का जाल देखिए। वह 20 एक जैसे त्रिभुजों (या 12 एक जैसे पंचभुजों) से बना है जो अगल-बगल छपे हैं। मोड़ने से किसी आकृति का माप नहीं बदलता, इसलिए बने हुए मॉडल का हर फलक दूसरे हर फलक जैसा ही रहता है।
हर ठोस ऐसा नहीं होता। ईंट जैसे डिब्बे के 6 आयताकार फलक होते हैं, पर वे सब एक माप के नहीं होते। जिस ठोस के सभी फलक एक जैसे हों और हर कोने पर उतने ही फलक मिलते हों, उसे सम ठोस कहते हैं। पूरे गणित में ऐसे केवल पाँच ही ठोस हैं।
प्र4.
कितने फलक एक शीर्षबिंदु (बिंदु) पर मिलते हैं? विंशतिफलक — ........ द्वादशफलक — ........ क्या प्रत्येक शीर्षबिंदु पर समान संख्या में फलक मिलते हैं? विंशतिफलक — ........ द्वादशफलक — ........
उत्तर

विंशतिफलक: हर शीर्षबिंदु पर 5 फलक मिलते हैं। द्वादशफलक: हर शीर्षबिंदु पर 3 फलक मिलते हैं। और हाँ — दोनों ठोसों में यह संख्या हर शीर्षबिंदु पर एक जैसी है।

ठोसहर फलक की आकृतिएक शीर्षबिंदु पर फलकक्या हर शीर्ष पर समान?शीर्षबिंदुओं की संख्या
विंशतिफलकसमबाहु त्रिभुज5हाँ12
द्वादशफलकसम पंचभुज3हाँ20

शीर्षबिंदु पर गिनने का तरीका

  1. मॉडल का कोई एक कोना चुनिए और उस पर उँगली रखिए।
  2. मॉडल को धीरे-धीरे घुमाइए और उँगली को छूने वाले फलक गिनिए।
  3. दो-तीन और कोनों पर भी यही कीजिए ताकि पक्का हो जाए कि हर बार वही संख्या आती है।
विंशतिफलक: 20 फलक × हर फलक के 3 कोने = 60 कोना-टुकड़े
हर शीर्षबिंदु उनमें से 5 लेता है, अतः शीर्षबिंदु = 60 ÷ 5 = 12

द्वादशफलक: 12 फलक × हर फलक के 5 कोने = 60 कोना-टुकड़े
हर शीर्षबिंदु उनमें से 3 लेता है, अतः शीर्षबिंदु = 60 ÷ 3 = 20
यह संख्या हर जगह एक जैसी क्यों: ये सम ठोस हैं। सम का अर्थ है कि नियम हर जगह एक-सा लागू होता है — एक जैसे फलक, और हर कोने पर उतने ही फलक। यदि एक कोने पर 4 फलक होते और दूसरे पर 5, तो ठोस ऊबड़-खाबड़ हो जाता, सम नहीं रहता।
एक सुंदर अदला-बदली: विंशतिफलक में 20 फलक और 12 कोने हैं। द्वादशफलक में 12 फलक और 20 कोने। दोनों संख्याएँ आपस में जगह बदल लेती हैं। ये दोनों ठोस एक-दूसरे के साथी हैं।
प्र5.
आपको कितने किनारे दिखाई देते हैं? विंशतिफलक — ........ द्वादशफलक — ........ आपने किनारों की गिनती किस ढंग से की जिससे कि कोई किनारा गिनने में छूट न गया हो या किसी किनारे की गिनती दो बार न हुई हो?
उत्तर

दोनों ठोसों में 30-30 किनारे हैं।

गिनने की तरकीब — फलक-दर-फलक गिनिए, फिर आधा कीजिए

  1. एक फलक के किनारे गिनिए। त्रिभुज में 3; पंचभुज में 5।
  2. फलकों की संख्या से गुणा कीजिए। विंशतिफलक: 20 × 3 = 60। द्वादशफलक: 12 × 5 = 60।
  3. दोहरी गिनती पहचानिए। ठोस का हर किनारा ठीक 2 फलकों में साझा है, इसलिए हर किनारा दो बार गिना जा चुका है।
  4. 2 से भाग दीजिए। दोनों के लिए 60 ÷ 2 = 30।
विंशतिफलक: (20 × 3) ÷ 2 = 60 ÷ 2 = 30 किनारे
द्वादशफलक: (12 × 5) ÷ 2 = 60 ÷ 2 = 30 किनारे

दूसरा तरीका, यदि मॉडल पर ही गिनना हो:

  1. जिस किनारे को गिनें उस पर पेंसिल से छोटा निशान लगा दीजिए।
  2. घेरों में काम कीजिए — पहले सबसे ऊपर वाले शीर्ष के चारों ओर के किनारे, फिर उसके नीचे का घेरा, और आगे।
  3. जिस किनारे पर निशान है वह गिना जा चुका है, उसे छोड़ दीजिए।
2 से भाग देना क्यों सही है: किनारा वह रेखा है जहाँ दो फलक मिलते हैं, जैसे कमरे की दो दीवारों के बीच का कोना। जब आप फलक-दर-फलक गिनते हैं तो वही कोना दोनों दीवारें अपना बता लेती हैं। आधा करने से यह दोहरा दावा हट जाता है।
ऑयलर के नियम से जाँचिए: ऐसे हर ठोस में फलक + शीर्षबिंदु − किनारे = 2 होता है। विंशतिफलक: 20 + 12 − 30 = 2 ✓ द्वादशफलक: 12 + 20 − 30 = 2 ✓ घन पर भी देखिए: 6 + 8 − 12 = 2 ✓
प्र6.
क्या आप ऐसी किसी अन्य ठोस आकृतियों के बारे में सोच सकते हैं जिसके सभी समान फलक दिखाई देते हों? क्या प्रत्येक उभयनिष्ठ शीर्षबिंदु पर समान संख्या में फलक मिलते हैं?
उत्तर

हाँ — घन, चतुष्फलक और अष्टफलक। इन सभी में हर शीर्षबिंदु पर उतने ही फलक मिलते हैं।

ठोसफलकहर फलक की आकृतिहर शीर्ष पर फलकशीर्षबिंदुकिनारे
चतुष्फलक4समबाहु त्रिभुज346
घन6वर्ग3812
अष्टफलक8समबाहु त्रिभुज4612
द्वादशफलक12सम पंचभुज32030
विंशतिफलक20समबाहु त्रिभुज51230
चतुष्फलक 4 त्रिभुज घन 6 वर्ग अष्टफलक 8 त्रिभुज
तीन और ठोस जिनके सभी फलक एक जैसे हैं और हर कोने पर उतने ही फलक मिलते हैं।
ऐसे केवल पाँच ही क्यों: किसी कोने पर कम से कम 3 फलक चाहिए, और उनके कोनों का जोड़ 360 से कम होना चाहिए — वरना फलक चपटे बैठ जाएँगे और ठोस बनेगा ही नहीं। त्रिभुज (60) से एक कोने पर 3, 4 या 5 फलक बन सकते हैं। वर्ग (90) से केवल 3। पंचभुज (108) से भी केवल 3। षट्भुज (120) से एक भी नहीं, क्योंकि 3 षट्भुज ठीक 360 बना देते हैं और चपटे रह जाते हैं। इसलिए ठीक पाँच ठोस बनते हैं, और अधिक नहीं।
क्या हर उभयनिष्ठ शीर्षबिंदु पर समान संख्या में फलक मिलते हैं? हाँ — इन पाँचों में से हर एक में। यही उन्हें सम बनाता है।
प्र7.
आप स्ट्रॉ अथवा आइसक्रीम स्टिक व मिट्टी अथवा खेल-मिट्टी (क्ले) का उपयोग करके कुछ 3-विमीय (3-D) आकृतियाँ भी बना सकते हैं। आपने कौन-सी आकृतियाँ बनाईं?
उत्तर

कैसे बनाएँ

  1. मिट्टी की छोटी-छोटी गोलियाँ बनाइए, कंचे जितनी। ये कोने (शीर्षबिंदु) बनेंगी।
  2. स्ट्रॉ को एक ही लंबाई में काटिए — ये किनारे बनेंगे।
  3. दो कोनों को जोड़ने के लिए स्ट्रॉ को मिट्टी की गोली में दबाइए।
  4. पहले नीचे का चपटा आधार बनाइए, फिर ऊपर जाने वाले स्ट्रॉ लगाकर उन्हें सिरे पर मिला दीजिए।
  5. साथ-साथ गिनते जाइए: कोने, स्ट्रॉ और फलक। तीनों संख्याएँ लिख लीजिए।

नमूना उत्तर — पुस्तक के तीनों मॉडल

मॉडलवह क्या हैमिट्टी की गोलियाँ (शीर्षबिंदु)स्ट्रॉ (किनारे)फलक
नीला वालाअष्टफलक6128 त्रिभुज
हरा वालापिरामिड584 त्रिभुज + 1 वर्गाकार आधार
लाल वालापंचभुजाकार प्रिज़्म10152 पंचभुज + 5 आयत
हर एक को ऑयलर के नियम से जाँचिए (फलक + शीर्षबिंदु − किनारे = 2):
अष्टफलक: 8 + 6 − 12 = 2
वर्गाकार पिरामिड: 5 + 5 − 8 = 2
पंचभुजाकार प्रिज़्म: 7 + 10 − 15 = 2
स्ट्रॉ के मॉडल में छूने को फलक क्यों नहीं होते: स्ट्रॉ केवल किनारे दिखाते हैं। फलक तो उनके बीच की खाली जगह हैं। किसी आकृति को सिर्फ़ किनारों के रूप में देखने से गिनना बहुत आसान हो जाता है — कोई चीज़ दीवार के पीछे छिपती नहीं।
यह कीजिए: 12 स्ट्रॉ और 8 मिट्टी की गोलियों से घन बनाइए, फिर एक कोने को हल्के से दबाइए। वह डगमगाता है। अब दो सामने वाले फलकों पर आड़े 2 स्ट्रॉ और लगाकर त्रिभुज बना दीजिए — डगमगाना बंद हो जाएगा। त्रिभुज मज़बूत होते हैं, और इसीलिए पुल और मीनारें त्रिभुजों से भरी होती हैं।
क्या यह उपयोगी रहा?