कक्षा ५ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 10 गतिविधि 2 के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
1. आप अपने क्षेत्र में आने वाले पाँच पक्षियों का पोस्टर बनाइए। यह जानने का प्रयास कीजिए कि वे कहाँ से आते हैं।
उत्तर

ऐसे पाँच पक्षी चुनिए जो सचमुच सर्दियों में भारत आते हैं, हर एक का चित्र बनाइए या चिपकाइए, और नीचे लिखिए कि वह कहाँ से आता है। ठीक से बनाया गया पाँच पक्षियों का पोस्टर पुस्तक से नकल किए पंद्रह नामों से कहीं अच्छा है।

कैसे बनाएँ:

  1. एक चार्ट पेपर लीजिए और ऊपर शीर्षक के लिए एक पट्टी छोड़कर उसे पाँच बराबर खानों में बाँटिए।
  2. शीर्षक लिखिए — “हमारे शीतकालीन अतिथि”, और नीचे अपनी कक्षा तथा वर्ष लिखिए।
  3. हर खाने में पक्षी का चित्र बनाइए या पुराने समाचार-पत्र या पत्रिका से काटकर चिपकाइए।
  4. हर पक्षी के नीचे चार छोटी पंक्तियाँ लिखिए — नाम, स्थानीय नाम, कहाँ से आता है, यहाँ कहाँ दिखता है
  5. हर खाने में एक छोटा तीर बनाइए जो उस दिशा की ओर हो जहाँ से पक्षी आता है। हमारे अधिकांश शीतकालीन पक्षी उत्तर से आते हैं।
  6. पूरा करने से पहले किसी किसान, मछुआरे या पक्षी देखने वाले से पूछ लीजिए और जो ग़लत हो उसे सुधार लीजिए।

नमूना पोस्टर — सर्दियों में भारत आने वाले पाँच पक्षी

पक्षीकहाँ से आता हैभारत में कहाँ दिख सकता हैध्यान देने योग्य बात
गुलाबी मैना (तिलियर)रूस का दक्षिणी भाग, मंगोलिया और आस-पास के देशखेतों के ऊपर, फूलों वाले पेड़ों पर, सूर्यास्त के समय बड़े पेड़ों पर बसेरा करते हुएविशाल झुंड जो आकाश में मुड़ता-घूमता है; टिड्डे और टिड्डियाँ खाती है
पट्ट-शीर्ष हंस (बार-हेडेड गूज़)मंगोलिया और मध्य एशियाउत्तर और मध्य भारत की झीलें तथा नदियों के रेतीले किनारेसिर के पीछे दो गहरी पट्टियाँ। यह हिमालय के ऊपर से उड़कर आता है
कुरजाँ (डेमोइज़ेल सारस)मध्य एशिया और मंगोलियाराजस्थान का खींचन गाँव, तथा गुजरात-राजस्थान के खेतखींचन के ग्रामीण हर सर्दी की सुबह इन्हें अनाज खिलाते हैं
सींखपर (नॉर्दर्न पिनटेल बत्तख)साइबेरिया और मध्य एशियालगभग पूरे भारत के तालाब, ताल और झीलेंनर की पूँछ लंबी, पतली और नुकीली होती है
अमूर बाज़ (अमूर फ़ाल्कन)साइबेरिया और उत्तरी चीननागालैंड का दोयांग — अफ़्रीका जाते समय यह वहीं रुकता हैनागालैंड के जो गाँव कभी इसका शिकार करते थे, अब उसकी रक्षा करते हैं
यह पता करना क्यों ज़रूरी है कि वे कहाँ से आते हैं: पक्षी का घर केवल वहीं नहीं है जहाँ आप उसे देखते हैं। आपके गाँव के तालाब पर तैरती यह बत्तख संभवतः साइबेरिया में जन्मी थी। यह बात देखने भर से नहीं पता चलती — इसे पता करना पड़ता है। और एक बार पता चल जाए तो विद्यालय के पीछे का तालाब केवल तालाब नहीं रह जाता। वह हज़ारों किलोमीटर दूर से आरंभ हुई एक यात्रा का अंतिम पड़ाव बन जाता है।
बनाने से पहले पूछिए: हर स्थान की अपनी सूची होती है। समुद्र तट पर राजहंस और गंगा-चिल्ली जुड़ सकते हैं; बड़ी झील के पास हंसावर और सारंग; पहाड़ों में कस्तूरा और थिरथिरा। पोस्टर पर वे पक्षी लगाइए जो आपके क्षेत्र में सचमुच आते हैं।
प्र2.
2. एक धागे की सहायता से गुलाबी मैना की यात्रा को ग्लोब पर एक स्थान से दूसरे स्थान तक दर्शाइए। इनकी रूस या मंगोलिया से भारत तक की यात्रा को दर्शाइए।
उत्तर

धागे का एक सिरा रूस के दक्षिणी भाग और मंगोलिया पर लगाइए और दूसरा सिरा भारत तक लाइए। धागे को ग्लोब से सटाकर रखिए और आप देखेंगे कि मार्ग मध्य एशिया से होते हुए दक्षिण-पश्चिम की ओर मुड़ता है और भारत में उत्तर-पश्चिम से प्रवेश करता है।

कैसे करें:

  1. लगभग 40 सेंटीमीटर लंबा मोटा रंगीन ऊन का धागा लीजिए। रंगीन ऊन सादे धागे से कहीं स्पष्ट दिखता है।
  2. ग्लोब पर मंगोलिया और रूस का दक्षिणी भाग ढूँढ़िए। धागे का एक सिरा वहाँ टेप या थोड़ी-सी मिट्टी से चिपका दीजिए।
  3. धागे को नीचे और बाईं ओर, मध्य एशिया से होकर लाइए — कज़ाकिस्तान, उज़्बेकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान।
  4. फिर उसे पर्वतों के ऊपर से उत्तर-पश्चिमी भारत — राजस्थान और गुजरात — तक लाइए।
  5. दूसरा सिरा वहाँ चिपका दीजिए। अब वहाँ से एक छोटा धागा शेष भारत तक फैलाइए, क्योंकि पहुँचने के बाद झुंड पूरे देश में बिखर जाते हैं।
  6. पीछे हटकर देखिए और बताइए कि धागे ने कितने देश पार किए।
दक्षिणी रूस · मंगोलिया ग्रीष्म-घर — यहाँ घोंसले बनते हैं मध्य एशिया के ऊपर से पर्वतों को पार करते हुए भारत — शीत-घर वसंत में वापसी हर शरद में दक्षिण की ओर
मार्ग का सरल रूप। ग्लोब पर यही यात्रा कई देशों के ऊपर से दक्षिण-पश्चिम की ओर मुड़ती है।
धागा क्या दिखाता हैउसका अर्थ
धागा लंबा हैएक ओर की यात्रा कई हज़ार किलोमीटर की है — लगभग 4,000 से 5,000 किलोमीटर
वह कई देश पार करता हैपक्षी ऐसे देशों के ऊपर से उड़ता है जहाँ अलग भाषा और अलग मुद्रा है। उसे इनमें से कुछ भी पता नहीं चलता
वह ऊँचे पर्वतों के ऊपर से जाता हैरास्ते में ठंडी, विरल हवा और तेज़ हवाओं का सामना करना पड़ता है
वही धागा दोनों ओर काम आता हैशरद में वे दक्षिण आते हैं और वसंत में लगभग उसी मार्ग से उत्तर लौट जाते हैं
सपाट मानचित्र की रेखा से ग्लोब का धागा बेहतर क्यों है: पृथ्वी गेंद जैसी है। सपाट मानचित्र पर ऊपर की दूरियाँ खिंचकर ग़लत हो जाती हैं। ग्लोब पर रखा धागा पृथ्वी की असली गोलाई पर चलता है, इसलिए वह असली मार्ग और असली दूरी दिखाता है। इसीलिए नाविक और वायुयान-चालक सदा ग्लोब का प्रयोग करते आए हैं।
यह भी कीजिए: दूसरे रंग के धागे से मिर्च की यात्रा दक्षिण अमेरिका से भारत तक दर्शाइए (गतिविधि 3)। अब आपके पास एक धागा भीतर आता हुआ और एक बाहर जाता हुआ होगा — यही गतिविधि 5 के मानचित्र की शुरुआत है।
प्र3.
3. कल्पना कीजिए कि आप एक पक्षी हैं जो विश्व की यात्रा कर रहे हैं। एक छोटा-सा पोस्टकार्ड या संदेश लिखिए जिसमें आप यह बताएँगे कि रास्ते में आपने क्या-क्या देखा है और यात्रा के दौरान आपकी कौन-कौन सहायता करता है (हवा, समुद्री धाराएँ, गर्म मौसम)। इसे अपने साथियों के साथ भी साझा कीजिए।
उत्तर

इसे पक्षी की अपनी ज़ुबानी लिखिए और कम से कम तीन सहायकों का उल्लेख कीजिए — हवा, गर्म मौसम, और वे स्थान जहाँ आप विश्राम तथा भोजन के लिए रुकते हैं। इसे छोटा रखिए — पोस्टकार्ड में स्थान बहुत कम होता है।

अच्छे पोस्टकार्ड में क्या होना चाहिए:

  1. आप कहाँ से चले और कहाँ जा रहे हैं।
  2. रास्ते में देखी दो-तीन बातें।
  3. किसने सहायता की — पीछे से चलती हवा, गर्म हवा, समुद्र, पीने के लिए झील, कीड़ों से भरा खेत, सोने के लिए ऊँचा पेड़।
  4. क्या कठिन रहा — ठंड, तूफ़ान, थकान, भूख, शिकारी, या पाटा जा चुका कोई तालाब।
  5. अपनी भावना की एक पंक्ति।

नमूना उत्तर

पोस्टकार्ड
कक्षा 5 के प्यारे मित्रो,

मैं एक गुलाबी मैना हूँ। छह दिन पहले मैं अपने लगभग चार सौ भाई-बहनों के साथ मंगोलिया से चली, क्योंकि वहाँ की घास भूरी पड़ चुकी थी और रातें जमने लगी थीं।

पहले दिन हमने एक पीला-भूरा मरुस्थल पार किया जहाँ कहीं पानी नहीं था। तीसरे दिन एक चौड़ी झील मिली और हमने चोंच दुखने तक पानी पिया। कल हमने बर्फ़ से ढके पर्वत पार किए। ऊपर की हवा इतनी पतली और ठंडी थी कि हम गर्म रहने के लिए एक कसे हुए गोले की तरह उड़े।

तीन चीज़ें मेरी सहायता कर रही हैं। पीछे से तेज़ हवा धकेल रही है, इसलिए मैं पंख कम फड़फड़ाकर तैरती-सी चल रही हूँ। दक्षिण बढ़ने के साथ हर दिन हवा गर्म होती जा रही है। और रास्ते में खेत और झीलें हैं जहाँ हम रुक पाते हैं — उनके बिना यह यात्रा हो ही नहीं सकती थी।

कल हम भारत पहुँच जाएँगे। वहाँ टिड्डों से भरे ज्वार के खेत होंगे, गुनगुनी धूप होगी, और एक बड़ा पीपल का पेड़ होगा जहाँ सारा झुंड सूर्यास्त के समय शोर मचाते हुए सोएगा।

कृपया उस पेड़ को खड़ा रहने दीजिए। पूरी सर्दी वही मेरा घर है।

थके हुए पंखों सहित आपकी,
गुलाबी
सेवा में:कक्षा 5, राजकीय प्राथमिक विद्यालय, रामपुर, भारत, ग्रह — पृथ्वी
पक्षी बनकर लिखना इतना अच्छा क्यों काम करता है: जैसे ही आप “मैं” कहते हैं, आपको सोचना पड़ता है कि यह यात्रा वास्तव में कैसी लगती होगी — ठंड, भूख, हवा, डर। केवल पढ़े हुए तथ्य भूल जाते हैं। भीतर से महसूस किए गए तथ्य ठहर जाते हैं। और पते की अंतिम पंक्ति देखिए — पक्षी के पोस्टकार्ड पर भी वही लिखा है — ग्रह, पृथ्वी
साझा करते समय: कक्षा में चार-पाँच पोस्टकार्ड पढ़वाइए और फिर एक प्रश्न पूछिए — “सबसे अधिक लोगों ने किस सहायक का नाम लिखा?” लगभग सब हवा लिखेंगे। और यही सच भी है — पीछे से चलती हवा के साथ उड़ना पक्षी की बहुत बड़ी शक्ति बचाता है।
क्या यह उपयोगी रहा?