अनुमान मत लगाइए — पूछकर पता कीजिए। गुलाबी मैना सर्दियों में भारत के अधिकांश भागों में आती है, परंतु कुछ स्थानों पर बहुत अधिक और कुछ में कम। इसलिए सच्चा उत्तर वही है जो आपको अपने आस-पास के किसान, किसी बुज़ुर्ग या पक्षी देखने वाले से मिले।
कैसे पता कीजिए:
- पृष्ठ 164 का चित्र घर के किसी बड़े को या किसी किसान को दिखाइए और पूछिए, “क्या यह पक्षी यहाँ आता है? कब आता है?”
- पूछिए कि आपकी अपनी भाषा में इसे क्या कहते हैं। किसान प्रायः इसका नाम जानते हैं, क्योंकि वे इसे खेतों में देखते हैं।
- लगभग अक्तूबर से मार्च के बीच स्वयं देखिए — खेतों के पास, फूलों से लदे पेड़ों पर, और सूर्यास्त के समय किसी बड़े पेड़ पर।
- तीन बातें लिखिए — स्थानीय नाम, किन महीनों में दिखती है, और आपने कहाँ देखा।
नमूना उत्तर: हाँ, गुलाबी मैना हमारे क्षेत्र में हर सर्दी में आती है। यह अक्तूबर के अंत में दिखने लगती है और मार्च तक रहती है। हम इसे ज्वार के खेतों के ऊपर और नहर के पास के सेमल के पेड़ पर बड़े झुंडों में देखते हैं। हमारी भाषा में लोग इसे तिलियर कहते हैं; मेरी दादी इसे गुलाबी मैना भी कहती हैं।
| क्या लिखना है | नमूना |
|---|---|
| क्या यह यहाँ आती है? | हाँ — हर सर्दी में, बड़े झुंडों में |
| कब? | लगभग अक्तूबर से मार्च तक |
| कहाँ दिखती है? | खेतों के ऊपर, फूलों वाले पेड़ों पर, और सूर्यास्त के समय बड़े पेड़ पर बसेरा करते हुए |
| स्थानीय नाम | उत्तर भारत के अनेक भागों में तिलियर; पाठ्यपुस्तक में गुलाबी मैना या गुलाबी सारिका; महाराष्ट्र के कुछ भागों में भोरडी |
| यदि यहाँ नहीं आती | यह बात सच्चाई से लिखिए, और कोई दूसरा शीतकालीन अतिथि पक्षी लिखिए जो सचमुच आता है — बत्तख, सारस, खंजन या राजहंस |