कक्षा ५ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 10 लिखिए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
1. क्या गुलाबी मैना आपके क्षेत्र में आती है? इसे आपकी स्थानीय भाषा में क्या कहते हैं?
उत्तर

अनुमान मत लगाइए — पूछकर पता कीजिए। गुलाबी मैना सर्दियों में भारत के अधिकांश भागों में आती है, परंतु कुछ स्थानों पर बहुत अधिक और कुछ में कम। इसलिए सच्चा उत्तर वही है जो आपको अपने आस-पास के किसान, किसी बुज़ुर्ग या पक्षी देखने वाले से मिले।

कैसे पता कीजिए:

  1. पृष्ठ 164 का चित्र घर के किसी बड़े को या किसी किसान को दिखाइए और पूछिए, “क्या यह पक्षी यहाँ आता है? कब आता है?”
  2. पूछिए कि आपकी अपनी भाषा में इसे क्या कहते हैं। किसान प्रायः इसका नाम जानते हैं, क्योंकि वे इसे खेतों में देखते हैं।
  3. लगभग अक्तूबर से मार्च के बीच स्वयं देखिए — खेतों के पास, फूलों से लदे पेड़ों पर, और सूर्यास्त के समय किसी बड़े पेड़ पर।
  4. तीन बातें लिखिए — स्थानीय नाम, किन महीनों में दिखती है, और आपने कहाँ देखा।

नमूना उत्तर: हाँ, गुलाबी मैना हमारे क्षेत्र में हर सर्दी में आती है। यह अक्तूबर के अंत में दिखने लगती है और मार्च तक रहती है। हम इसे ज्वार के खेतों के ऊपर और नहर के पास के सेमल के पेड़ पर बड़े झुंडों में देखते हैं। हमारी भाषा में लोग इसे तिलियर कहते हैं; मेरी दादी इसे गुलाबी मैना भी कहती हैं।

क्या लिखना हैनमूना
क्या यह यहाँ आती है?हाँ — हर सर्दी में, बड़े झुंडों में
कब?लगभग अक्तूबर से मार्च तक
कहाँ दिखती है?खेतों के ऊपर, फूलों वाले पेड़ों पर, और सूर्यास्त के समय बड़े पेड़ पर बसेरा करते हुए
स्थानीय नामउत्तर भारत के अनेक भागों में तिलियर; पाठ्यपुस्तक में गुलाबी मैना या गुलाबी सारिका; महाराष्ट्र के कुछ भागों में भोरडी
यदि यहाँ नहीं आतीयह बात सच्चाई से लिखिए, और कोई दूसरा शीतकालीन अतिथि पक्षी लिखिए जो सचमुच आता है — बत्तख, सारस, खंजन या राजहंस
स्थानीय नाम क्यों पूछा गया है: अपनी भाषा में किसी पक्षी का नाम होना इस बात का प्रमाण है कि आपके आस-पास के लोग उसे बहुत लंबे समय से जानते हैं। वैज्ञानिक उसे कुछ कहते हैं, आपका गाँव कुछ और, और हिंदी की पुस्तक गुलाबी मैना। तीनों नाम एक ही पक्षी के हैं। स्थानीय नाम इकट्ठा करना उस ज्ञान को बचाने का छोटा-सा उपाय है जो धीरे-धीरे भुलाया जा रहा है।
सच लिखिए: यदि आपके क्षेत्र में किसी ने इसे नहीं देखा तो लिखिए — “मुझे ऐसा कोई नहीं मिला जिसने इसे यहाँ देखा हो।” यह पूरी तरह उचित उत्तर है और सच है। बनावटी उत्तर से कुछ नहीं सीखा जाता।
प्र2.
2. यह कहानी प्रकृति के विषय में क्या बताती है?
उत्तर

यह बताती है कि प्रकृति एक जुड़ी हुई इकाई है और वह मनुष्यों द्वारा खींची गई सीमाओं को नहीं मानती। मंगोलिया में जन्मा पक्षी भारतीय किसान का खेत बचाता है, और दोनों कभी एक-दूसरे से मिलते तक नहीं।

कहानी की चार सीखें:

  1. प्रकृति की कोई सीमा नहीं होती। पक्षी को पासपोर्ट नहीं चाहिए। वह एक ही यात्रा में कई देश पार कर जाता है, क्योंकि वायु और भूमि निरंतर हैं।
  2. जीव एक-दूसरे पर निर्भर हैं। पक्षी को भारत की गर्म सर्दी और कीट चाहिए। किसान की फ़सल को पक्षी चाहिए। कीट, पक्षी, फ़सल और किसान — एक ही शृंखला की चार कड़ियाँ हैं।
  3. छोटा जीव भी बड़ा काम कर सकता है। हथेली में समा जाने वाला पक्षी एक महाद्वीप पार करता है और खेत की रक्षा करता है। आकार और महत्व एक बात नहीं हैं।
  4. देखभाल भी साझा करनी होगी। पक्षी का ग्रीष्म-घर दूसरे देश में है, शीत-घर यहाँ है और बीच में कई स्थानों पर वह रुकता है। इनमें से एक भी स्थान नष्ट हो जाए तो पक्षी सब जगह से लुप्त हो जाएगा। इसलिए कोई एक देश अकेले उसे नहीं बचा सकता।
घास और फ़सल उगती है टिड्डे फ़सल खाते हैं गुलाबी मैना टिड्डे खाती है फ़सल बचती है एक शृंखला, चार कड़ियाँ — और तीसरी कड़ी मंगोलिया से उड़कर आती है पक्षी हटा दीजिए तो दूसरी कड़ी बेकाबू हो जाएगी।
पक्षी खेत का अतिथि नहीं है। वह इस बात का हिस्सा है कि खेत चलता कैसे है।
एक वाक्य में: प्रकृति देशों में नहीं, कामों में बँटी है, और हर जीव उनमें से कोई एक काम कर रहा है। भारत में गुलाबी मैना का काम है उन कीटों को खाना जो हमारा अन्न खाते हैं — और यह काम वह हर सर्दी में, बिना कहे, बिना किसी शुल्क के करती है।
क्या यह उपयोगी रहा?