कक्षा ५ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 10 आइए विचार करें के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
1. कोई एक विचार चुनकर उसके विषय में लिखिए कि किस प्रकार इसने कई वर्ष पूर्व एक स्थान से दूसरे स्थान तक की यात्रा की होगी? सोचिए कि यह कैसे लोगों के जीवन या चिंतन को परिवर्तित करने में सहायक रहा होगा?
उत्तर

अध्याय से कोई एक विचार चुनिए, कल्पना कीजिए कि उसे कोई एक व्यक्ति ले जा रहा है, और उस व्यक्ति के साथ यात्रा पर चलिए। कहानी में एक व्यक्ति, एक स्थान और एक परिवर्तन चाहिए — तथ्यों की सूची नहीं।

आपकी कहानी में क्या-क्या होना चाहिए:

  1. आपने जो विचार चुना है, उसका नाम पहली कुछ पंक्तियों में।
  2. वह व्यक्ति जो उसे ले जा रहा है — नाविक, व्यापारी, रसोइया, शिक्षक या किसान।
  3. यात्रा — कितनी दूर, कितनी लंबी और कितनी कठिन।
  4. वह क्षण जब नई भूमि पर किसी ने पहली बार उसे आज़माया।
  5. परिवर्तन — उसके बाद लोगों ने क्या अलग करना आरंभ किया। प्रश्न वास्तव में यही पूछ रहा है, इसलिए इसे छोड़िए मत।

नमूना उत्तर — छोटी लाल आग

दिओगो एक पुर्तगाली जहाज़ पर रसोइया था और समुद्र से ऊब चुका था। चार महीने से जहाज़ पानी पार कर रहा था, फिर और पानी। अब आख़िरकार सामने भारत का नीचा हरा तट था और हवा में गीली मिट्टी और धुएँ की गंध थी।

दिओगो की जेब में कपड़े की एक छोटी थैली थी। उसमें सूखी लाल फलियाँ थीं, जो उसने दुनिया के दूसरी ओर, दक्षिण अमेरिका के एक बाज़ार से उठाई थीं। वहाँ लोग उन्हें पीसकर भोजन में डालते थे और उससे उसका मुँह जल उठा था। वह हँसा था, खाँसा था और और माँगा था।

किनारे पर उसे मीनाक्षी नाम की एक रसोइया मिली, जो पत्थर पर काली मिर्च पीस रही थी। वह व्यापारियों के लिए तरी बना रही थी। दिओगो ने अपनी थैली की ओर इशारा किया, फिर उसकी हाँडी की ओर। उसने भौंहें सिकोड़ीं, एक फली तोड़ी, एक बीज जीभ से लगाया — और उसकी आँखें फैल गईं।

उस दिन उसने हाँडी में आधी फली डाली। व्यापारी हाँडी ख़ाली कर गए। अगले सप्ताह उसने रसोई के पीछे, नारियल के पेड़ों के किनारे की भुरभुरी लाल मिट्टी में चार बीज बो दिए। वर्षा हुई। पौधे तेज़ी से बढ़े; उन्हें यह भूमि अपनी भूमि से भी अधिक भाई।

पड़ोसन ने बीज माँगे। पड़ोसन का भाई, जो भीतर की ओर जा रहा था, मुट्ठीभर बीज धोती के छोर में बाँधकर ले गया। सौ वर्षों के भीतर वह छोटी लाल आग तट से पर्वतों तक हर रसोई पहुँच गई — आंध्र, कश्मीर, नागालैंड, राजस्थान।

और इससे बहुत कुछ बदला। अब भोजन सस्ते में तीखा बनाया जा सकता था, क्योंकि मिर्च हर आँगन में उगती थी जबकि काली मिर्च ख़रीदनी पड़ती थी। अचार अधिक दिन चलने लगे। ऐसे-ऐसे व्यंजन बने जो पहले हो ही नहीं सकते थे। आज भारत में बच्चा लगभग अपने पहले ठोस भोजन में ही मिर्च का स्वाद चख लेता है — और हज़ार में एक व्यक्ति भी नहीं जानता कि वह किसी पुर्तगाली नाविक की जेब में यहाँ आई थी।

इनके विषय में भी लिखा जा सकता है

विचारकिस दिशा में गयाक्या परिवर्तन आया
योगभारत से बाहर, यात्रियों, विद्वानों और शिक्षकों के साथदूसरे देशों के लोगों को बिना मशीन और बिना धन के शरीर स्वस्थ और मन शांत रखने का उपाय मिला
शक्कर और गुड़भारत से बाहर, व्यापार और यात्रा के माध्यम सेइससे पहले विश्व भोजन को शहद से मीठा करता था। शक्कर के चारों ओर मिठाइयाँ, पर्व और पूरे व्यापार खड़े हुए
शून्यभारत से बाहर, पूरे विश्व तक‘कुछ नहीं’ को एक संख्या मानने के विचार ने सब जगह बड़ी गणनाएँ संभव बना दीं
कागज़चीन से व्यापार के माध्यम से भारत मेंइससे पहले हम ताड़ के पत्तों और छाल पर लिखते थे। कागज़ ने पुस्तकें और विद्यालय कहीं सरल बना दिए
गेंदामैक्सिको से भारत मेंकुछ सौ वर्षों में ही वह हमारे मंदिरों, विवाहों और दीपावली का फूल बन गया
पुस्तक का अंत कहानी लिखवाकर ही क्यों होता है: तथ्यों की सूची बताती है कि चीज़ों ने यात्रा की। कहानी महसूस कराती है कि उन्हें कोई सचमुच का व्यक्ति ले गया — कोई ऐसा जो थका था, भूखा था, घर से बहुत दूर था, और जिसे तनिक भी अनुमान नहीं था कि उसकी जेब की चीज़ करोड़ों रसोइयों को बदल देगी। इतिहास केवल राजा नहीं बनाते। उसे रसोइए, नाविक, किसान और व्यापारी भी बनाते हैं।
लिखने का सुझाव: अपने पात्र का नाम पहली ही पंक्ति में दे दीजिए। जैसे ही व्यक्ति का नाम हो जाता है, लिखना सरल हो जाता है और पढ़ने वाले को उससे लगाव होने लगता है।
प्र2.
2. पृथ्वी के संरक्षण या देखभाल का कोई एक उपाय लिखिए।
उत्तर

एक स्पष्ट उपाय: “मैं दाँत साफ़ करते समय और हाथ पर साबुन लगाते समय नल बंद रखूँगा।” इसे एक वाक्य में, अपने विषय में और ऐसे काम के विषय में लिखिए जो आप सचमुच करेंगे — “हमें जल बचाना चाहिए” नहीं, बल्कि “मैं यह करूँगा”।

कुछ वास्तविक उपाय — इनमें से एक चुनकर अपने ढंग से लिखिए

क्षेत्रजो आप सचमुच कर सकते हैंइससे क्या बचता है
जलब्रश करते और साबुन लगाते समय नल बंद रखिए; विद्यालय में टपकते नल की सूचना उसी दिन दीजिएखुला नल एक मिनट में कई लीटर बहा देता है। टपकता नल रातभर, हर रात पानी बहाता रहता है
बिजलीख़ाली कमरे का पंखा और बत्ती बंद कीजिए। कक्षा से सबसे अंत में निकलकर जाँचने वाले आप बनिएउस बिजली के लिए कम कोयला जलेगा और घर का बिल भी कम आएगा
प्लास्टिककपड़े का थैला और स्टील की बोतल साथ रखिए। दुकानदार से प्लास्टिक की थैली मत लीजिएवर्षभर काम आने वाला एक कपड़े का थैला कुछ सौ प्लास्टिक थैलियों की जगह ले लेता है
कचरादो कूड़ेदान रखिए — गीला (भोजन, पत्तियाँ) और सूखा (कागज़, प्लास्टिक, धातु)। प्लास्टिक या पत्ते कभी मत जलाइएगीले कचरे से विद्यालय के बगीचे की खाद बनती है; प्लास्टिक जलाने से वही वायु विषैली होती है जिसमें आप साँस लेते हैं
पेड़एक पौधा लगाइए और पूरे दो वर्ष उसे पानी दीजिए — असली काम यही दूसरा भाग हैबच गया एक पेड़ पचास वर्ष तक छाया देता है, मिट्टी बाँधता है और पक्षियों को भोजन देता है
भोजनथाली में उतना ही लीजिए जितना आप पूरा खा सकेंबरबाद भोजन के साथ जल, मिट्टी और किसान का पूरे वर्ष का परिश्रम भी बरबाद होता है
आवागमनविद्यालय पास हो तो पैदल या साइकिल से जाइए; दूर हो तो रिक्शा साझा कीजिए या बस लीजिएआपकी अपनी गली में कम धुआँ और साँस लेने के लिए स्वच्छ हवा
पशु-पक्षीगर्मियों में छत या खिड़की पर उथला कटोरा भरकर रखिए और रोज़ पानी बदलिएवर्ष के सबसे गर्म सप्ताहों में गौरैया, गिलहरी और कौवे
कागज़हर पन्ने के दोनों ओर लिखिए। बचे हुए पन्नों की रफ़ कॉपी बनाइएकागज़ पेड़ों से बनता है और उसे बनाने में बहुत जल लगता है

नमूना उत्तर: पृथ्वी की देखभाल का मेरा एक उपाय है — प्रतिदिन कपड़े का थैला और स्टील की बोतल साथ रखना। पहले हमारे घर में हर सप्ताह बाज़ार से चार-पाँच प्लास्टिक की थैलियाँ आ जाती थीं और मैं विद्यालय की यात्रा में प्लास्टिक की बोतल में पानी ख़रीदता था। जब से मैंने अपना थैला और बोतल साथ रखना शुरू किया है, घर में प्लास्टिक लगभग आता ही नहीं। मैंने एक थैला अपनी दादी के लिए भी बना दिया है, ताकि वे भी दुकानदार की थैली न लें।

यह कितना मायने रखता है — इसका सीधा और सच्चा उत्तर। आपके काम वास्तविक हैं और जुड़ते जाते हैं — ब्रश करते समय बंद किया गया नल सचमुच लीटरों पानी बचाता है और वर्षभर चलने वाला एक थैला सचमुच सैकड़ों प्लास्टिक थैलियों की जगह लेता है। दो बातें इन्हें और बड़ा बनाती हैं — ये आदत बन जाती हैं जो बड़े होकर भी बनी रहेगी, और दूसरे लोग इनकी नकल करते हैं, इसलिए एक बच्चे का थैला प्रायः पूरे परिवार का थैला बन जाता है। पर यह भी सच है कि सबसे बड़ी समस्याएँ — शहरों की दूषित हवा, समुद्र में प्लास्टिक, पृथ्वी का गर्म होते जाना — इतनी बड़ी हैं कि बच्चे अकेले उन्हें हल नहीं कर सकते। उनके लिए सरकारों, कारखानों, खेतों और पूरे देशों को अपना काम करने का ढंग बदलना होगा। यह न आपकी ग़लती है, न अकेले आपका काम। आपका काम है अपना हिस्सा ठीक से करना, और जब बड़े अपना हिस्सा न करें तो खुलकर प्रश्न पूछना। ये दोनों काम करने योग्य हैं और इनमें से किसी में भी अपराधबोध की कोई बात नहीं है।
निभाना सरल बनाइए: दस बातों का संकल्प मत कीजिए। एक चुनिए और तीस दिन तक कीजिए, जब तक वह प्रयास लगना बंद न हो जाए। फिर अगली जोड़िए। आदतें वास्तव में ऐसे ही बनती हैं — एक-एक करके, सब एक साथ नहीं।
प्र3.
3. किसी एक ऐसी वस्तु का पता लगाइए जिसने भारत से अन्य देशों तक यात्रा की है और उसके विषय में लिखिए।
उत्तर

कोई एक भारतीय वस्तु चुनिए और उसके विषय में चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए — वह क्या है, भारत में कहाँ से आती है, दूसरे देश उसे क्यों चाहेंगे, और उनके लिए वह क्या बदलेगी। इससे एक नाम पूरा उत्तर बन जाता है।

नमूना उत्तर — मोटे अनाज (बाजरा, ज्वार और रागी)

मैं भारत से विश्व तक मोटे अनाज — बाजरा, ज्वार और रागी — भेजना चाहूँगा। ये भारत के प्राचीन अनाज हैं। राजस्थान, महाराष्ट्र, कर्नाटक और भारत के अनेक शुष्क भागों में ये हज़ारों वर्षों से उगाए जाते रहे हैं, गेहूँ और चावल के मुख्य भोजन बनने से बहुत पहले से।

मोटे अनाजों में एक ऐसा गुण है जिसकी विश्व को इस समय बहुत आवश्यकता है — ये बहुत कम जल में उगते हैं। धान को खेत में भरे पानी में खड़ा रहना पड़ता है। बाजरा वहाँ भी उग जाता है जहाँ रेतीली मिट्टी हो और वर्षा वर्षभर में कुछ ही बार होती हो। आज अनेक देशों में जल की कमी है और उनकी गर्मियाँ और तीखी होती जा रही हैं। ऐसे स्थानों को ठीक ऐसा ही अनाज चाहिए जिसे इतना कम जल चाहिए।

ये स्वास्थ्य के लिए भी बहुत अच्छे हैं। रागी में कैल्सियम अधिक होता है, जो हड्डियों के लिए अच्छा है। बाजरे और ज्वार में लोहा और रेशा भरपूर होता है। ये देर तक पेट भरा रखते हैं। जिस दुनिया में बहुत-से लोग अत्यधिक परिष्कृत भोजन से अस्वस्थ हो रहे हैं, वहाँ यह बात महत्वपूर्ण है।

मोटे अनाज उसी तरह यात्रा करेंगे जैसे कभी शक्कर ने भारत से की थी — व्यापार के माध्यम से, और इस तरह कि कुछ लोग उन्हें पकाएँ और दूसरों को स्वाद भा जाए। शुष्क देशों के किसान इन्हें उगाकर कम जल ख़र्च करेंगे। परिवारों को सस्ता और स्वास्थ्यकर अनाज मिलेगा। और इन्हें उगाने वाले भारतीय किसानों की आय बढ़ेगी, जिससे वे पुराने बीज भुलाए जाने के बजाय सँभाले जाएँगे।

इनके विषय में भी लिखा जा सकता है

वस्तुभारत में कहाँविश्व उसे क्यों चाहेगा
आमउत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और अनेक राज्यभारत में सैकड़ों किस्में उगती हैं। पहले ही स्वाद में सबको भा जाता है
बासमती चावलपंजाब, हरियाणा, उत्तराखंडलंबे दाने और ऐसी सुगंध जो और किसी चावल में नहीं
हल्दीतेलंगाना, तमिलनाडु, महाराष्ट्रभोजन को रंग देती है और भारतीय घरों में घाव तथा सर्दी की औषधि की तरह काम आती है
खादी और हथकरघे का कपड़ापूरे भारत के गाँवों में बुना जाता हैहाथ से बनता है, मशीन और बिजली बहुत कम लगती है, और बुनकरों को काम मिलता है
चन्नपटना के लकड़ी के खिलौनेकर्नाटकप्लास्टिक के स्थान पर लकड़ी और सुरक्षित वनस्पति रंगों से बने
योग और आयुर्वेदपूरे भारत मेंये यात्रा कर ही चुके हैं — और अब भी फैल रहे हैं
कबड्डी और खो-खोपूरे भारत के गाँवों के मैदानों मेंइनमें कोई सामान नहीं चाहिए — केवल समतल ज़मीन और खिलाड़ी
कोई वस्तु सचमुच यात्रा करेगी या नहीं, यह किससे तय होता है: इस अध्याय में जिन वस्तुओं ने यात्रा की, उन्हें फिर देखिए — शक्कर, चावल, आम, मसाले, गायें, योग, शून्य। हर एक उपयोगी थी, ले जाने या अपनाने योग्य थी, और ऐसी थी जो दूसरे स्थान के पास पहले से नहीं थी। अपनी चुनी हुई वस्तु को इन तीनों कसौटियों पर कसिए। तीनों पर खरी उतरे तो आपका उत्तर अच्छा है।
जानने योग्य एक बात: कुछ भारतीय वस्तुओं पर एक विशेष चिह्न लगता है जो बताता है कि वे किस स्थान की हैं — दार्जिलिंग की चाय, कांचीपुरम का रेशम, नागपुर के संतरे, मैसूर का रेशम। इस चिह्न का अर्थ है कि उस नाम से कोई और अपना सामान नहीं बेच सकता। यह किसी स्थान द्वारा अपनी उस वस्तु की रक्षा करने का उपाय है जिसे वह बहुत लंबे समय से अच्छी तरह बनाता आ रहा है।
क्या यह उपयोगी रहा?