अपनी भिन्नताओं को समस्या नहीं, सामान्य बात मानकर — और रोज़ के छोटे-छोटे काम करके जिनसे सम्मान और अपनापन दिखे। परिवार एक-जैसे लोगों से नहीं बनता। आपके अपने परिवार में भी एक बुज़ुर्ग हैं, एक शिशु है, कोई किसान है और कोई विद्यार्थी — फिर भी परिवार चलता है।
जो आप सचमुच कर सकते हैं — इसी सप्ताह, अपने विद्यालय और अपनी गली में:
- किसी साथी की भाषा के कुछ शब्द सीखिए। उसमें ‘धन्यवाद’ और ‘कैसे हो’ कहना सीखिए। किसी को अपनापन महसूस कराने का इससे अच्छा उपाय नहीं।
- किसी के भोजन, कपड़ों, बोली या नाम का मज़ाक कभी मत उड़ाइए। इस पूरी सूची का यह सबसे उपयोगी नियम है।
- किसी नए साथी के पास बैठिए। सप्ताह में एक बार अपनी जगह बदलिए। उस बच्चे से बात कीजिए जिसे सब अलग छोड़ देते हैं।
- बाँटिए। अपना टिफ़िन, रंग, छाता बाँटिए। बाँटने से ही बच्चों का समूह एक कक्षा बनता है।
- टीम मिलाकर बनाइए। खेल में टीम चुनते समय केवल अपने मित्र मत चुनिए। जो बच्चा अंत में चुना गया, अगली बार उसे पहले चुनिए।
- बहस से पहले सुनिए। झगड़ा हो तो दोनों पक्षों को एक-एक बार बिना टोके पूरी बात कहने दीजिए। अधिकांश झगड़े वहीं छोटे हो जाते हैं।
- दूसरों के त्योहारों में सम्मिलित होइए। उनका भोजन चखिए, जानिए कि वह किस बात का उत्सव है, और बधाई दीजिए। जिज्ञासा भी सम्मान का एक रूप है।
- साझा वस्तुओं का ध्यान रखिए। कक्षा, नल, शौचालय, मैदान, बस-स्टॉप। साझा स्थान स्वच्छ रखना यह कहने का तरीका है कि ‘ये लोग मेरे अपने हैं’।
- पशु-पक्षियों और पौधों को भी परिवार में गिनिए। गर्मियों में पानी का कटोरा रखिए। टहनियाँ मत तोड़िए। अध्याय के अनुसार वे भी इसी परिवार के अंग हैं।
- बिना कहे सहायता कीजिए। भारी बैग उठाइए, गिरी हुई चीज़ उठाइए, जिसे सवाल समझ न आया हो उसे समझाइए।
भिन्नताएँ बाधा नहीं, लाभ क्यों हैं: पूरे अध्याय पर फिर दृष्टि डालिए। इसमें जो कुछ भी अच्छा हुआ, वह इसीलिए हुआ क्योंकि कोई स्थान भिन्न था — दक्षिण अमेरिका से मिर्च, मैक्सिको से गेंदा, चीन से कागज़, और भारत से बाहर जाता योग। यदि हर स्थान एक-जैसा होता तो न कुछ देने को होता, न कुछ पाने को। भिन्नता ही वह चीज़ है जिससे साझा करना संभव होता है।
याद रखने योग्य एक पंक्ति: विश्व किसी बड़ी घोषणा से एक परिवार नहीं बनेगा। वह छोटे-छोटे टुकड़ों में परिवार बनता है — एक कक्षा, एक गली, एक बस और एक बाँटे हुए टिफ़िन से।