कक्षा ५ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 10 गतिविधि 5 के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
1. अपने दादा-दादी, नाना-नानी या पड़ोसी का साक्षात्कार लीजिए— उनसे व्यंजन, वस्तुओं, किसी गीत या किसी रीति-रिवाज, परंपरा या अभ्यास के विषय में चर्चा कीजिए जो उनके बचपन में प्रचलन में नहीं थी किंतु आज प्रचलन में है। पता लगाइए कि यह कहाँ से आया?
उत्तर

किसी बुज़ुर्ग से पूछिए कि आज जो बात बिलकुल सामान्य है, वह उनके बचपन में थी ही नहीं। लगभग हर बुज़ुर्ग एक साथ तीन-चार बातें बता देंगे, और उनमें से हर एक कहीं न कहीं से आई है।

साक्षात्कार ठीक से कैसे लें:

  1. साठ वर्ष से अधिक आयु का कोई व्यक्ति चुनिए — दादा-दादी, नाना-नानी, पड़ोसी, दुकानदार या कोई सेवानिवृत्त शिक्षक।
  2. ऐसा समय तय कीजिए जब वे खाली हों, और कॉपी-पेन साथ ले जाइए। बताइए कि आप क्यों आए हैं।
  3. ये प्रश्न एक-एक करके पूछिए और उन्हें बोलने दीजिए — “आप बचपन में क्या खाते थे जो अब नहीं खाया जाता?” · “आज हम क्या खाते हैं जिसका नाम भी आपने नहीं सुना था?” · “विवाह में कौन-से गीत गाए जाते थे?” · “त्योहारों पर अब क्या होता है जो तब नहीं होता था?” · “आपकी गली में पहला टेलीविज़न, टेलीफ़ोन, गैस चूल्हा या स्कूटर कब आया?”
  4. जहाँ तक हो सके उनके अपने शब्द लिखिए, अपना सारांश नहीं।
  5. अंत में पूछिए, “आपको क्या लगता है यह कहाँ से आया?” — और फिर स्वयं भी पता कीजिए।
  6. पृष्ठ के ऊपर उस व्यक्ति का नाम और आयु लिखिए।

नमूना उत्तर

मेरी दादी कमला देवी, आयु 72 वर्ष, से बातचीत।

उन्होंने बताया कि जब वे छोटी थीं तो उनके गाँव में न नूडल्स थे, न मोमोज़, न पिज़्ज़ा, न जन्मदिन का केक। जन्मदिन केक और मोमबत्ती से मनाया ही नहीं जाता था — माँ खीर या हलवा बनाती थीं और बच्चा बड़ों के पैर छूता था। केक और ‘हैप्पी बर्थडे’ का गीत बहुत बाद में, यूरोप और अमेरिका से, पहले शहरों में और फिर गाँवों तक, फ़िल्मों और टेलीविज़न के माध्यम से आया।

उन्होंने यह भी बताया कि उनके बचपन में चाय रोज़ नहीं पी जाती थी। वह केवल तब बनती थी जब कोई अतिथि आता था। अब सब दिन में दो-तीन बार पीते हैं। उन्होंने कहा कि यह बदलाव तब आया जब चाय पैकेटों में बिकने लगी और उसका ख़ूब प्रचार होने लगा।

तीसरी बात उन्होंने गैस चूल्हे की बताई। वे लकड़ी और उपलों के चूल्हे पर खाना बनाती थीं और धुएँ से रोज़ आँखें जलती थीं। गैस का सिलेंडर उनके घर तब आया जब वे स्वयं माँ बन चुकी थीं।

बुज़ुर्ग क्या-क्या बता सकते हैंवह कहाँ से आया
नूडल्स, चाउमीन, मोमोज़चीन, तिब्बत और नेपाल — ये पहाड़ी कस्बों और ठेलों के माध्यम से भारतीय शहरों तक पहुँचे
पिज़्ज़ा, बर्गर, केक, शीतल पेययूरोप और अमेरिका, शहरों, फ़िल्मों और टेलीविज़न के रास्ते
जन्मदिन का केक और ‘हैप्पी बर्थडे’ गीतयूरोप और अमेरिका की रीति; पहले भारतीय जन्मदिन का अर्थ था मिठाई और बड़ों का आशीर्वाद
दिन में कई बार चायचाय का पौधा असम में उगता है, पर रोज़ पीने की आदत पिछले लगभग सौ वर्षों में ही फैली
सिले-सिलाए कपड़े, जींस, स्कूल के जूतेपहले लगभग सब कुछ गाँव का दर्ज़ी सिलता था
प्लास्टिक की बाल्टी, मग और बोतलइन्होंने एक ही पीढ़ी में पीतल, ताँबे और मिट्टी के बर्तनों की जगह ले ली
टेलीविज़न, मोबाइल फ़ोन, विवाह में फ़िल्मी गीतमशीनें विदेश से आईं; दादी-नानी के गाए विवाह-गीत अब कम ही सुनाई देते हैं
पाव-भाजी, इडली, ढोकला अपने मूल स्थान से बहुत दूर खाए जानाये भारत के भीतर ही एक राज्य से दूसरे राज्य तक गए
पूछने के लिए बुज़ुर्ग ही सही व्यक्ति क्यों हैं: पुस्तक बताती है कि चीज़ें बदलती हैं। दादी बताती हैं कि कितनी तेज़ी से बदलती हैं। इस सूची की हर बात एक ही व्यक्ति के जीवनकाल में आई — एक जीवन में, सौ पीढ़ियों में नहीं। परिवर्तन केवल इतिहास की पुरानी बात नहीं है। वह आपके चारों ओर अभी हो रहा है, और एक दिन आप ही वे बुज़ुर्ग होंगे जिनका साक्षात्कार लिया जाएगा।
धन्यवाद कहिए और लौटकर जाइए: लिख लेने के बाद अपनी टिप्पणियाँ उन्हें पढ़कर सुनाइए और जाँच लीजिए कि कुछ ग़लत तो नहीं लिखा। सुनते ही उन्हें प्रायः दो बातें और याद आ जाती हैं।
प्र2.
2. आपने जो कहानियाँ पढ़ीं उनके आधार पर उन वस्तुओं की सूची बनाइए जो अन्य देशों से भारत आईं और भारत की वे वस्तुएँ जो यात्रा करके अन्य देशों में पहुँचीं। इसके पश्चात दो रंगीन धागों की सहायता से इन्हें मानचित्र पर दर्शाने का प्रयत्न कीजिए।
उत्तर

दो सूचियाँ बनाइए — जो भारत आईं और जो भारत से गईं — फिर आने वाली हर वस्तु के लिए एक रंग का धागा और जाने वाली हर वस्तु के लिए दूसरे रंग का धागा लगाइए। मानचित्र पूरा होने पर भारत एक गाँठ जैसा दिखेगा जिससे चारों दिशाओं में धागे निकल रहे हैं।

मानचित्र कैसे बनाएँ:

  1. विश्व का मानचित्र लगाइए, या चार्ट पेपर पर मोटा-मोटा बना लीजिए। बिलकुल सटीक होना आवश्यक नहीं।
  2. मानचित्र पर भारत लिखा एक छोटा कार्ड पिन कर दीजिए।
  3. भारत आने वाली वस्तुओं के लिए लाल धागा और भारत से जाने वाली वस्तुओं के लिए हरा धागा लीजिए।
  4. हर वस्तु के लिए धागे का एक सिरा संबंधित देश पर और दूसरा भारत पर पिन कीजिए।
  5. हर धागे पर एक छोटी पर्ची लगाइए — एक शब्द पर्याप्त है: मिर्च, गेंदा, योग, शक्कर
  6. पीछे हटकर गिनिए। किस रंग के धागे अधिक हैं? कक्षा से पूछिए कि उन्हें ऐसा क्यों लगता है।
भारत आईं (लाल धागा)कहाँ सेभारत से विश्व तक गईं (हरा धागा)कहाँ तक
मिर्चदक्षिण अमेरिका, पुर्तगाली यात्री लाएयोगविश्व के लगभग सभी देश
आलू, टमाटर, मूँगफली, काजू, मक्कादक्षिण अमेरिका और मैक्सिकोशक्कर तथा गुड़ बनाने की विधिव्यापार और यात्रा के माध्यम से अनेक देशों तक
गेंदामैक्सिकोचावल, आम और केलाअनेक देश
गुलाबी मैना, हर सर्दी मेंदक्षिणी रूस और मंगोलियागिर, कांकरेज और ओंगोल गायेंब्राजील
कागज़चीनकाली मिर्च और इलायची — व्यापारी इन्हें ‘काला सोना’ कहते थेअनेक देश
खजूर और नींबूअरब व्यापारी लाएचावल और कपड़ा, जो वही अरब व्यापारी लौटते समय ले गएअरब देश
जींसअमेरिकानील (इंडिगो) — वह गहरा नीला रंग जो कभी केवल राजपरिवार पहनते थेअफ़्रीका और यूरोप
फ़ुटबॉल, क्रिकेट, हारमोनियमइंग्लैंड और यूरोपशून्य — ‘कुछ नहीं’ की वह अवधारणा जिसने सबका गणित सरल कियापूरा विश्व
कॉफ़ीअफ़्रीका, अरब देशों से होकरशतरंज तथा साँप-सीढ़ीपूरा विश्व
यूकेलिप्टस और गुलमोहर के वृक्षऑस्ट्रेलिया और मेडागास्करआयुर्वेद तथा यहाँ जन्मे चार धर्मों के विचारअनेक देश; कंबोडिया का अंगकोरवाट इसका एक प्रमाण है
भारत एक मिलन-स्थल मिर्च, आलू, टमाटर गेंदा — मैक्सिको कागज़ — चीन खजूर, नींबू — अरब देश गुलाबी मैना — रूस जींस, फ़ुटबॉल —अमेरिका, इंग्लैंड योग शक्कर और गुड़ चावल, आम, केला काली मिर्च, इलायची, नील गिर, कांकरेज, ओंगोल — ब्राजील शून्य, शतरंज, आयुर्वेद लाल = भारत आईं · हरा = भारत से गईं। दोनों सूचियाँ लंबी हैं।
यही मानचित्र आप दो रंगीन धागों से बनाएँगे — एक ओर आती हुई वस्तुएँ, दूसरी ओर जाती हुई।
पूरा मानचित्र क्या दिखाता है: धागे दोनों दिशाओं में जाते हैं और दोनों गुच्छे मोटे हैं। भारत केवल लेने वाला देश नहीं है और केवल देने वाला देश भी नहीं। वह एक चौराहा है — जिसने जो उपयोगी लगा वह लिया और जो उसके पास था वह दिया। यदि आप विश्व की किसी भी संस्कृति का ऐसा मानचित्र बनाएँ तो वह भी ऐसा ही दिखेगा। अध्याय इसी को परस्पर जुड़ा हुआ जीवन कहता है।
मानचित्र दीवार पर लगा रहने दीजिए: कुछ पिन खाली छोड़ दीजिए। जब भी कक्षा में किसी को कोई और यात्री मिले — कोई फल, खेल, शब्द या वाद्ययंत्र — वह एक और धागा जोड़ दे। वर्ष के अंत तक मानचित्र भर जाएगा।
क्या यह उपयोगी रहा?