प्र1.
1. अपने शिक्षक या किसी बड़े की सहायता से गायों की कम से कम पाँच नस्लों के नाम पता कीजिए।
उत्तर
भारतीय गाय की पाँच नस्लें हैं — गिर, साहीवाल, लाल सिंधी, थारपारकर और कांकरेज। भारत में इनसे कहीं अधिक नस्लें हैं। किसी बुज़ुर्ग या पशुपालक से अवश्य पूछिए, क्योंकि वे आपके ज़िले की नस्लों के नाम बताएँगे — यही इस गतिविधि का असली उद्देश्य है।
कैसे पता कीजिए:
- अपने गाँव या मोहल्ले में गाय पालने वाले किसी व्यक्ति से, या दूध देने वाले से पूछिए।
- तीन प्रश्न पूछिए — “यह किस नस्ल की गाय है?”, “यह नस्ल कहाँ की है?”, “यह किस बात के लिए जानी जाती है?”
- पास में पशु चिकित्सालय या डेयरी हो तो वहाँ भी पूछिए।
- उत्तर नीचे जैसी तालिका में लिखिए और अंत में अपने ज़िले की नस्ल जोड़िए।
| नस्ल | मूल राज्य | किसके लिए जानी जाती है |
|---|---|---|
| गिर | गुजरात | भरपूर दूध; चौड़ा, गोलाकार मस्तक और लंबे लटकते कान। ब्राजील जाने वाली तीन नस्लों में से एक |
| साहीवाल | पंजाब क्षेत्र | लाल-भूरे रंग की; भारत की सर्वोत्तम दुधारू नस्लों में से एक; शांत स्वभाव |
| लाल सिंधी | अब उत्तर और दक्षिण भारत में पाली जाती है | गहरा लाल रंग; गर्म स्थानों में भी अच्छा दूध |
| थारपारकर | राजस्थान | सफ़ेद या धूसर; बहुत कम जल और चारे में सूखे क्षेत्रों में रह लेती है |
| कांकरेज | गुजरात और राजस्थान | बलवान; दूध के लिए भी और हल तथा गाड़ी खींचने के लिए भी। यह भी ब्राजील गई |
| ओंगोल | आंध्र प्रदेश | बहुत बड़ी और शक्तिशाली। ब्राजील जाने वाली तीसरी नस्ल |
| हल्लीकर | कर्नाटक | गाड़ी खींचने की शक्ति के लिए प्रसिद्ध |
| वेचूर | केरल | विश्व की सबसे छोटी गोवंश नस्लों में से एक — वयस्क गाय लगभग कमर तक ही ऊँची होती है |
| राठी | राजस्थान | भूरे रंग पर सफ़ेद धब्बे; मरुस्थली ज़िलों की अच्छी दुधारू नस्ल |
| देवनी | महाराष्ट्र | काली-सफ़ेद; निरंतर दूध और बलवान बैल |
इतनी नस्लें क्यों हैं: भारत बहुत बड़ा है और एक भाग का मौसम दूसरे भाग जैसा बिलकुल नहीं है। जो गाय केरल के आर्द्र तट पर फलती-फूलती है, वह थार मरुस्थल की सूखी गर्मी में कष्ट पाएगी। सैकड़ों वर्षों में हर क्षेत्र के किसानों ने वही पशु रखे जो वहाँ सबसे अच्छे रहे — और इसी से हर क्षेत्र की अपनी नस्ल बन गई। हर नस्ल अपने स्थान का लेखा-जोखा है।
एक बात जिसमें लोग प्रायः भ्रमित होते हैं: मुर्रा भारत की प्रसिद्ध नस्ल है, परंतु वह भैंस की नस्ल है, गाय की नहीं। भारत में पिया जाने वाला अधिकांश दूध वास्तव में भैंसों से आता है। पूछिए कि आपके घर का दूध किस पशु का है — उत्तर सुनकर बहुत-से बच्चे चौंक जाते हैं।