कक्षा ५ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 4 आइए विचार करें के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
आपके विद्यालय की सभी कक्षाओं में से आपको कौन-सी कक्षा सबसे अच्छी लगती है और क्यों?
उत्तर

उत्तर देने से पहले तीन-चार कक्षाओं में जाकर ध्यान से देखिए। अच्छा उत्तर कक्षा का नाम लेता है और ऐसे कारण देता है जो दिखाई देते हैं, केवल “अच्छी लगती है” नहीं कहता।

क्या देखेंअच्छी कक्षा किसे बनाता है
प्रकाशएक से अधिक ओर खिड़कियाँ; बिना ट्यूबलाइट के भी पढ़ने लायक उजाला
हवाहवा आर-पार निकलती है; दोपहर में घुटन नहीं होती
ठंडकखिड़की के बाहर पेड़, या हल्के रंग की छत
स्वच्छतासाफ़ फ़र्श, साफ़ बेंच, कोई लिखावट नहीं, कोने में कूड़ेदान
दीवारों पर क्या हैबच्चों के अपने चित्र और चार्ट, एक पढ़ने का कोना, कक्षा का सूचना-पट्ट
वहाँ कैसा लगता हैलोग मित्रवत हैं; कोई अकेला नहीं बैठता; बिना हँसी उड़े शंका पूछी जा सकती है

नमूना उत्तर: “मुझे लगता है कि हमारे विद्यालय की सबसे अच्छी कक्षा भूतल पर कक्षा 3 का कमरा है। उसमें दो ओर बड़ी खिड़कियाँ हैं, इसलिए हवा आर-पार निकलती है और दोपहर तक बत्तियों की आवश्यकता नहीं पड़ती। खिड़की के ठीक बाहर गुलमोहर का पेड़ खड़ा है जो मई में भी कमरा ठंडा रखता है, और अप्रैल में उसके फूल खिड़की की छड़ों तक आ जाते हैं। दीवारों पर बच्चों के अपने चित्र और एक बड़ा हाथ से बना कैलेंडर लगा है, और एक कोने में चटाई तथा कहानी की पुस्तकों की अलमारी वाला पढ़ने का कोना है। वहाँ कोने में एक हरा और एक नीला कूड़ेदान भी है, और बेंचों पर कोई लिखावट नहीं है क्योंकि वह कक्षा हर शुक्रवार अपनी मेज़ें स्वयं साफ़ करती है।

पर सच कहूँ तो मुझे सबसे अच्छी अपनी ही कक्षा 5ख लगती है। वह सबसे उजली कक्षा नहीं है और उसका रंग-रोगन पुराना है। वह मुझे इसलिए सबसे अच्छी लगती है क्योंकि उसमें भोजन के समय कोई अकेला नहीं बैठता, और जब मुझसे कोई सवाल ग़लत हो जाता है तो कोई हँसता नहीं।”

अंतिम भाग ही सबसे अच्छा उत्तर क्यों है: प्रकाश, हवा और रंग कमरे को सुविधाजनक बनाते हैं। उसे आनंदमय केवल उसमें रहने वाले लोग बनाते हैं। एक साधारण कमरा जहाँ आपके साथ अच्छा व्यवहार होता है, उस सुंदर कमरे से कहीं बेहतर है जहाँ बोलने में डर लगे।
प्र2.
प्रसन्नता का वृक्ष बनाइए— किसी दीवार या चार्ट पेपर पर एक बड़ा वृक्ष बनाइए जिसमें कई शाखाएँ हों। प्रत्येक विद्यार्थी उसमें एक-एक ‘पत्ता’ जोड़े और उस पर एक छोटा-सा कार्य लिखे जो विद्यालय को अधिक आनंददायक बना सकता है (जैसे किसी को प्रणाम करना, बत्तियाँ बंद करना, स्थान साझा करना आदि)।
उत्तर

कैसे बनाएँ — 6 चरण

  1. एक बड़ा चार्ट पेपर लीजिए, या दीवार पर भूरा कागज़ चिपका दीजिए।
  2. एक मोटा भूरा तना और फैली हुई कई शाखाएँ बनाइए — इतनी कि हर बच्चे का एक पत्ता आ जाए और आगे के लिए भी जगह बचे।
  3. हरे कागज़ से पत्तों के आकार काटिए। कुछ पीले, नारंगी और गुलाबी भी बनाइए, ताकि वृक्ष जीवंत लगे।
  4. हर बच्चा एक पत्ते पर एक छोटा-सा कार्य अपनी लिखावट में लिखे, और कोने में छोटे अक्षरों में अपना नाम।
  5. नियम — वह ऐसा काम हो जो आप इसी सप्ताह सचमुच कर सकें, और छोटा हो। “मैं सबको ख़ुश कर दूँगा” नहीं।
  6. पत्ते चिपकाइए और वृक्ष वहाँ लगाइए जहाँ से पूरा विद्यालय गुज़रता है — बरामदे में, अपनी कक्षा के भीतर नहीं।

वृक्ष के पत्ते — सच्चे उदाहरण

दयालुताविद्यालय की देखभालधरती की देखभाल
मैं हर सुबह चौकीदार और सफ़ाईकर्मी को उनके नाम से नमस्ते कहूँगामैं भोजन के बाद अपने रैपर स्वयं उठाऊँगामैं पानी पीने के बाद नल कसकर बंद करूँगा
मैं नए लड़के को अपने साथ खेलने बुलाऊँगामैं बेंच पर नहीं लिखूँगाकक्ष से अंत में निकलते समय मैं पंखा बंद करूँगा
किसी का उत्तर ग़लत होने पर मैं नहीं हँसूँगामैं अपनी मेज़ और बस्ता व्यवस्थित रखूँगामैं सोमवार को अपने पौधे को पानी दूँगा
मैं अपने रंग साथी के साथ साझा करूँगासभा के बाद मैं कुर्सियाँ वापस रखूँगामैं पन्ने के दोनों ओर लिखूँगा
ग़लती होने पर मैं क्षमा माँगूँगाटपकते नल की सूचना मैं कार्यालय को दूँगामैं टिफ़िन पन्नी में नहीं, स्टील के डिब्बे में लाऊँगा
मध्याह्न भोजन के लिए मैं रसोइया दीदी को धन्यवाद कहूँगासीढ़ी पर मैं छोटों के लिए जगह छोड़ूँगामैं छिलके हरे कूड़ेदान में डालूँगा
मैं अपनी बेंच पर एक और के लिए जगह बनाऊँगामैं पीछे आने वाले के लिए दरवाज़ा पकड़ूँगाबोतल में बचा जल मैं पौधों में डालूँगा
यह वृक्ष नियमों की सूची से बेहतर क्यों काम करता है: नियम आपको कोई और देता है। पत्ता वह वादा है जो आपने स्वयं, अपनी लिखावट में, सबके सामने लिखा है — और वह दीवार पर वहीं रहता है जहाँ से आप हर दिन गुज़रते हैं। सूचना-पट्ट पर लगे नियम से यह बिल्कुल अलग बात है।
इसे जीवित रखिए: एक महीने बाद जिसने अपना वादा सचमुच निभाया हो, वह अपने पत्ते के पास एक छोटा कागज़ी फूल या फल जोड़े। सत्र के अंत तक वृक्ष फूलों से भर जाना चाहिए — और यदि न भरे, तो कक्षा में उस पर भी ईमानदारी से बात होनी चाहिए।
प्र3.
अपनी भावनाएँ व्यक्त करना बहुत रोमांचक होता है। अपने शिक्षक को ‘हमारा विद्यालय— एक आनंदमय स्थान’ पर एक पत्र लिखिए।
उत्तर

अच्छे पत्र में क्या होना चाहिए: ऊपर तिथि और पता, संबोधन (“आदरणीय महोदया/महोदय”), तीन-चार छोटे अनुच्छेद, और अंत में अपना नाम तथा कक्षा। बीच में अपने ही विद्यालय की सच्ची बातें लिखिए — एक स्थान, एक व्यक्ति, एक क्षण। एक सच्चा विवरण दस सामान्य वाक्यों से अधिक मूल्यवान है।

नमूना उत्तर

कक्षा 5ख
राजकीय प्राथमिक विद्यालय, रामपुर
12 अगस्त 2025

आदरणीय महोदया,

मैं आपको यह बताने के लिए लिख रहा हूँ कि मेरा विद्यालय मेरा आनंदमय स्थान क्यों है। मैं बहुत समय से यह कहना चाहता था, पर कहने से लिखना सरल लगा।

सबसे पहले मुझे खेल के मैदान के कोने वाला नीम का पेड़ बहुत प्रिय है। मैं और मेरी मित्र मीरा हर मध्यावकाश में उसी के नीचे बैठकर अपना टिफ़िन बाँटते हैं — वह बुधवार को आलू का परांठा लाती है और मैं माँ का बनाया चना। मई में भी वहाँ ठंडक रहती है। पिछले महीने हमने उस पेड़ पर एक कठफोड़वा देखा था, और पूरे विद्यालय में केवल हम दो ने ही उसे देखा।

दूसरी बात है गुरुवार का पुस्तकालय कालांश। इस वर्ष मैंने उस अलमारी से ग्यारह पुस्तकें पढ़ी हैं। जब कक्षा 3 में मुझे ठीक से पढ़ना नहीं आता था, तब आपने किसी को बताया नहीं। आपने मुझे बड़े अक्षरों वाली एक पतली पुस्तक दी और कहा कि रोज़ एक पन्ना पढ़ना। अब मैं एक सप्ताह में पूरी पुस्तक पढ़ लेता हूँ। मुझे लगता है मैंने आपको इसके लिए कभी धन्यवाद नहीं कहा, इसलिए आज कह रहा हूँ।

मुझे इस वर्ष हमारी कक्षा के किए काम भी अच्छे लगे। हमने जल-प्रहरी और हरित-संरक्षक — दो समूह बनाए, चार टपकते नल ढूँढ़े और उन्हें ठीक करवाया। हमने द्वार के पास अमरूद का एक पौधा लगाया, जिसे मैं हर सोमवार और गुरुवार पानी देता हूँ। जब उसमें फल आएँगे तब मैं इस विद्यालय में नहीं रहूँगा, पर कोई न कोई वह अमरूद खाएगा, और यह सोचकर मुझे अच्छा लगता है।

मेरा विद्यालय मेरा आनंदमय स्थान इसलिए है क्योंकि यहाँ मैं स्वयं को सुरक्षित अनुभव करता हूँ, क्योंकि कुछ ग़लत होने पर कोई मुझ पर हँसता नहीं, और क्योंकि सुबह उठते ही मेरे पास कुछ न कुछ ऐसा होता है जिसका मुझे इंतज़ार रहता है।

धन्यवाद, महोदया।

आपका आज्ञाकारी शिष्य,
समीर कुमार
कक्षा 5ख, अनुक्रमांक 14

अपना पत्र लिखिए: यही ढाँचा लीजिए, पर ये बातें नहीं। चार बातें लिखिए — एक स्थान, एक व्यक्ति, एक काम जो आपने किया, और एक धन्यवाद। सामान्य रूप से विद्यालयों के बारे में नहीं, अपने विद्यालय के बारे में लिखिए। इसी से पत्र पढ़ने योग्य बनता है।
प्र4.
आप अपने घर, पड़ोस और समुदाय को आनंददायक स्थान बनाने के लिए कौन-से कार्य करेंगे? उनमें से किसी एक कार्य का विस्तार से वर्णन कीजिए।
उत्तर

इस अध्याय की हर बात विद्यालय के द्वार के बाहर भी काम करती है। पहले एक छोटी सूची, फिर प्रश्न के अनुसार एक कार्य का विस्तृत वर्णन।

स्थानमैं वहाँ क्या ले जाऊँगा
घरदो कूड़ेदान — हरा और नीला; छिलकों के लिए खाद का गमला; नल कसकर बंद करना; कमरे से निकलते समय बत्ती बंद करना; पुराने समाचार-पत्र रद्दीवाले के लिए सँभालना
पड़ोसगली या नाली में कचरा न फेंकना; गली में पेड़ लगाना और पानी देना; गर्मियों में पक्षियों के लिए जल रखना; गली के साझा नल को बहने न देना
समुदायसफ़ाईकर्मी, चौकीदार, डाकिया और सब्ज़ीवाले का अभिवादन करना; किसी बुज़ुर्ग पड़ोसी का सामान उठाने में सहायता करना; जिन बच्चों के साथ कोई नहीं खेलता उन्हें साथ लेना; उद्यान और तालाब स्वच्छ रखना

जिसका मैं विस्तार से वर्णन करूँगा: घर पर खाद का गमला

  1. क्यों। हमारे घर से फेंके जाने वाले कचरे का आधे से अधिक भाग रसोई का कचरा होता है — छिलके, जूठन, चाय की पत्ती। यह सब कूड़े के ढेर में जाने के बजाय खाद बन सकता है।
  2. क्या चाहिए। एक पुरानी प्लास्टिक की बाल्टी या मिट्टी का गमला जिसके तल में कुछ छेद हों, नीचे रखने के लिए एक तश्तरी, एक छोटी खुरपी, और सूखी मिट्टी या सूखे पत्तों की एक थैली। ख़र्च लगभग कुछ भी नहीं।
  3. कहाँ। बालकनी या आँगन के छायादार कोने में, दो ईंटों पर, ज़मीन से थोड़ा ऊपर।
  4. कैसे आरंभ करें। तल पर सूखे पत्तों की एक परत डालिए। फिर हर शाम दिन भर के छिलके छोटे-छोटे काटकर उसमें डालिए।
  5. सबसे महत्वपूर्ण नियम। हर दिन के छिलकों के ऊपर मुट्ठी भर सूखी मिट्टी या सूखे पत्ते डालिए। यही बदबू और मक्खियाँ रोकता है। जो लोग यह चरण छोड़ देते हैं वे एक सप्ताह में हार मान लेते हैं।
  6. ठीक रखिए। प्लास्टिक नहीं, काँच नहीं, धातु नहीं, तेल वाला भोजन नहीं। सप्ताह में एक बार खुरपी से पलटिए। यह निचोड़े स्पंज जैसा नम रहे, कीचड़ जैसा गीला नहीं।
  7. प्रतीक्षा कीजिए। लगभग दो महीने में गमले का तल गहरी, भुरभुरी, सोंधी मिट्टी बन जाता है।
  8. उपयोग कीजिए। उसे तुलसी, मनीप्लांट और कढ़ी पत्ते के गमलों में डालिए। उनकी बढ़त स्पष्ट दिखाई देगी।
  9. फिर फैलाइए। एक पड़ोसी को यह करना सिखाइए और आरंभ करने के लिए अपनी खाद की एक मुट्ठी दे दीजिए।
यह छोटा-सा काम इतना सार्थक क्यों है: इससे हमारे घर का कचरा आधा रह जाता है, और वह घर पर ही कम हो जाता है — इसलिए उसे न ढोना पड़ता है, न छाँटना, न कहीं फेंकना। इससे मुफ़्त खाद मिलती है। और इससे कचरा उस वस्तु से, जिससे हम छुटकारा पाना चाहते हैं, उस वस्तु में बदल जाता है जिसे हम बनाते हैं। जिस परिवार ने अपने ही गमले में छिलकों को मिट्टी बनते देख लिया, वह कूड़ेदान को फिर कभी उसी नज़र से नहीं देखता।
प्र5.
विद्यालय में एक दिन किसी और के दृष्टिकोण से कल्पना कीजिए। निम्नलिखित में से किसी एक को चुनें— • पहिये वाली कुर्सी (व्हीलचेयर) का उपयोग करके विद्यालय में आने वाला दिव्यांग/सक्षम विद्यार्थी • भिन्न मातृभाषा बोलने वाला विद्यार्थी • विद्यालय का स्वच्छता कर्मचारी। उनके दृष्टिकोण से दैनंदिनी लिखिए। उन्होंने क्या अनुभव किए? क्या यह सरल था या कठिन? किस बात ने उन्हें मुस्कुराने पर या चिंतित होने पर विवश किया?
उत्तर

किसी और के दृष्टिकोण से अच्छी दैनंदिनी कैसे लिखें

  1. “मैं” के रूप में लिखिए और ऊपर तिथि डालिए।
  2. एक सच्चे दिन का क्रम लिखिए — आना, कक्षा, अवकाश, भोजन, घर जाना।
  3. छोटी और ठीक-ठीक बातें लिखिए — एक सीढ़ी, एक दरवाज़ा, एक शब्द जो समझ नहीं आया, एक व्यक्ति जो मुस्कुराया।
  4. दोनों बातें लिखिए — क्या कठिन था और किस बात से मुस्कुराहट आई। सच्चे दिन में दोनों होती हैं।
  5. उन्हें एक पूरे व्यक्ति की तरह लिखिए, जिसकी अपनी पसंद, अपने मज़ाक और अपने मित्र हैं। न दया के पात्र की तरह, न किसी वीर की तरह।

नमूना उत्तर — पहिये वाली कुर्सी का उपयोग करने वाला विद्यार्थी

18 जुलाई 2025

आज की शुरुआत अच्छी रही। पापा ने मुझे द्वार पर छोड़ा और इमरान पहले से वहाँ खड़ा था, जैसे वह हर सुबह रहता है। उसने मेरा बस्ता ले लिया ताकि मैं अपनी कुर्सी के पहिये स्वयं चला सकूँ। यह काम मुझे स्वयं करना अच्छा लगता है।

हमारी कक्षा तक का बरामदा समतल है, इसलिए वहाँ तक आसान रहा। भीतर जाना आसान नहीं था। कक्षा के दरवाज़े पर लगभग चार अंगुल ऊँची एक सीढ़ी है और मैं उसे अकेले पार नहीं कर सकता। इमरान और राकेश ने आगे के पहिये उठा दिए, जैसे वे रोज़ करते हैं। इसमें दस सेकंड लगते हैं और वे इसे बिना कोई बड़ी बात बनाए करते हैं, जिसके लिए मैं उनका आभारी हूँ। पर आज मैंने सोचा — लकड़ी की एक छोटी ढलान (रैंप) एक बेंच से भी कम में बन जाएगी, और फिर किसी को कुछ उठाना ही नहीं पड़ेगा।

दूसरे कालांश में मैडम ने मुझे बोर्ड पर उत्तर लिखने को कहा। बोर्ड ऊँचा है और मैं उसका ऊपरी आधा भाग छू नहीं सकता। मैंने नीचे, बाईं ओर लिखा, और मैडम ने पूरा पाठ उसी पंक्ति तक नीचे कर दिया ताकि किसी को झुकना न पड़े। किसी ने इस पर कुछ कहा नहीं। यह मेरे पूरे दिन का सबसे अच्छा क्षण था।

भोजन का समय कठिन रहा। सब नीम के नीचे ज़मीन पर बैठकर खाते हैं और मैं वहाँ नहीं बैठ सकता, इसलिए मैं दरवाज़े के पास बेंच पर कुछ देर अकेला खाता रहा। फिर मीरा अपनी थाली लेकर आ गई और बेंच पर मेरे साथ बैठ गई, और उसके बाद चार और आ गए। अब मैं सोच रहा हूँ कि क्या भोजन का पूरा स्थान ही बेंचों पर कर देना चाहिए। किसी ने अब तक यह पूछा ही नहीं।

शौचालय दूसरे छोर पर है और उसका दरवाज़ा सँकरा है। मैं केवल एक बार, सुबह जाता हूँ, और इसी कारण जितना जल पीना चाहिए उससे कम पीता हूँ। यह बात मैंने किसी को बताई नहीं है। शायद कल मुझे मैडम को बता देना चाहिए।

खेल के कालांश ने मुझे ख़ुश कर दिया। उन्होंने मुझे खो-खो का निर्णायक बना दिया और सीटी मेरे हाथ में थी, और राकेश ने मेरे हर एक निर्णय पर बहस की, ठीक वैसे ही जैसे वह सबसे करता है। मुझे अच्छा लगा कि उसने मुझसे भी वैसे ही बहस की जैसे किसी और से।

घर जाते हुए पापा ने पूछा कि विद्यालय में मुझे सबसे अधिक क्या चाहिए। मैंने कहा — कक्षा के दरवाज़े पर एक ढलान और थोड़ा चौड़ा शौचालय। उन्होंने कहा कि हम मिलकर प्रधानाचार्य को पत्र लिखेंगे। मैं दुखी नहीं हूँ। बस इतना चाहता हूँ कि यह भवन बनाते समय किसी ने यह सोचा होता कि यहाँ मुझ जैसा कोई पढ़ने आएगा।

यदि आप अन्य दो में से कोई चुनें, तो उसमें ये बातें रखिए

किसका दिनक्या कठिन थाकिस बात से मुस्कुराहट आई
भिन्न मातृभाषा बोलने वाला विद्यार्थीशिक्षक की तेज़ बोली पकड़ न पाना; कक्षा की भाषा में वस्तुओं के नाम न आना; शब्द अलग ढंग से बोलने पर हँसी उड़ना; मज़ाक में शामिल न हो पाना; इतना ध्यान लगाकर सुनने से दोपहर तक थक जानावह मित्र जो चुपके से एक शब्द में समझा देता है; वह शिक्षिका जो शब्द बोर्ड पर लिख देती हैं; अपनी भाषा का एक गीत कक्षा को सिखाने का अवसर और पूरी कक्षा का उसे गाने की कोशिश करना; गणित में प्रशंसा मिलना, जिसमें भाषा की आवश्यकता ही नहीं
विद्यालय का स्वच्छता कर्मचारीछह बजे से पहले काम आरंभ करना; हर दिन उन्हीं कोनों में वही रैपर; मिले-जुले कूड़ेदान जिन्हें हाथ से अलग करना पड़ता है; गीले कूड़ेदान में पड़े काँच से उँगली कटना; नाम के बजाय काम से पुकारा जाना; दस्ताने न होनावह बच्चा जो नमस्ते कहता है; बच्चों के आने पर स्वच्छ दिखता बरामदा; वह कक्षा जो सभा में धन्यवाद कहती है; वह दिन जब किसी ने आख़िर उनका नाम सीखा; साथ बाँटा गया मध्याह्न भोजन
यह प्रश्न यहाँ क्यों है: पूरा अध्याय इसी बात पर रहा है कि विद्यालय को आनंदमय स्थान बनाना है। पर आनंदमय किसके लिए? जब तक आप एक दिन किसी और के दिन के भीतर से सोचकर न देखें, तब तक आप जान ही नहीं सकते कि आपके विद्यालय में असल में कौन-सी बात समस्या है। इसी कारण इस उत्तर में ढलान, चौड़ा शौचालय, भोजन का स्थान और दस्ताने — ये सब निरीक्षण से नहीं, कल्पना से मिले हैं। दयालुता का आरंभ ध्यान देने से होता है।
प्र6.
यदि आप एक दिन के लिए अपने विद्यालय के प्रधानाचार्य बनें तो आप अपने विद्यालय में आनंद, सुरक्षा और हरियाली बढ़ाने के लिए कौन-से तीन परिवर्तन करेंगे?
उत्तर

ठीक तीन चुनिए — एक आनंद के लिए, एक सुरक्षा के लिए, एक हरियाली के लिए। बताइए कि आप क्या करेंगे, कैसे करेंगे, और उससे क्या बदलेगा। तीन सच्चे परिवर्तन बीस इच्छाओं की सूची से अधिक मूल्यवान हैं।

नमूना उत्तर — मेरे तीन परिवर्तन

परिवर्तन 1 (आनंद): हर शुक्रवार पंद्रह मिनट का ‘गोल घेरा’ समय।

  • क्या: हर कक्षा शुक्रवार के अंतिम पंद्रह मिनट गोल घेरे में बैठेगी। कोई भी एक बात बता सकता है जिससे उसे इस सप्ताह ख़ुशी मिली और एक बात जिससे परेशानी हुई। कोई टोकेगा नहीं। किसी को बोलने के लिए विवश नहीं किया जाएगा।
  • क्यों: विद्यालय की अधिकांश परेशानियाँ — चिढ़ाना, अकेला छूट जाना, भोजन के समय अकेले बैठना — शिक्षकों को दिखाई नहीं देतीं, क्योंकि वे चुपचाप होती हैं। गोल घेरा वह जगह है जहाँ वे कही जाती हैं।
  • क्या बदलेगा: जो बच्चे छूट रहे हैं उन पर ध्यान जाएगा। और हर कक्षा बिना हँसे सुनना सीखेगी।

परिवर्तन 2 (सुरक्षा): छुट्टी के समय द्वार की व्यवस्था ठीक करना।

  • क्या: द्वार के बाहर रँगी हुई ज़ेब्रा क्रॉसिंग, दोनों ओर 30 मीटर पहले “धीरे चलें — आगे विद्यालय” का बोर्ड, द्वार से दूर चिह्नित पार्किंग, और यह नियम कि कोई बच्चा तब तक द्वार से बाहर नहीं निकलेगा जब तक उसका बड़ा व्यक्ति या वाहन न आ जाए। कक्षा 1 से 3 की छुट्टी कक्षा 4 और 5 से पाँच मिनट पहले होगी।
  • क्यों: हमारे यातायात-प्रहरियों ने दस मिनट में 27 वाहन गिने और केवल 8 ने गति धीमी की। सबसे छोटे बच्चे खड़े ऑटो के बीच से निकलते हैं जहाँ चालक उन्हें देख ही नहीं सकते।
  • क्या बदलेगा: हमारे दिन के सबसे ख़तरनाक दस मिनट साधारण दस मिनट बन जाएँगे।

परिवर्तन 3 (हरियाली): प्रति कक्षा एक पेड़, नाम और रखवाले के साथ।

  • क्या: हर कक्षा एक पेड़ लगाएगी और उसे गोद लेगी। पास में लकड़ी की एक पट्टिका लगेगी जिस पर पेड़ का नाम और कक्षा का नाम होगा। पानी देने की बारी की सूची, बच्चों के नामों सहित, कक्षा के सूचना-पट्ट पर लगेगी और उसमें गर्मी की छुट्टियाँ भी सम्मिलित होंगी।
  • क्यों: हमारे विद्यालय ने पिछले वर्ष पाँच पौधे लगाए और दो मर गए, क्योंकि लगाना किसी का काम था और पानी देना किसी का नहीं।
  • क्या बदलेगा: हर वर्ष दस नए पेड़ जो सचमुच जीवित रहेंगे — और दस वर्ष बाद खेल के मैदान पर छाया।
ये तीन ही क्यों, इनसे बड़े क्यों नहीं: एक दिन का प्रधानाचार्य न नया सभागार बनवा सकता है, न कंप्यूटर ख़रीद सकता है। पर एक दिन का प्रधानाचार्य एक नियम बना सकता है, सड़क पर एक रेखा खिंचवा सकता है और एक सूची लगवा सकता है — और ये तीनों उस दिन के बहुत बाद तक चलते रहते हैं। सबसे अच्छा परिवर्तन वह सबसे छोटा परिवर्तन है जो स्वयं चलता रहे।
अपने तीन स्वयं लिखिए: उन्हें अपने ही विद्यालय अन्वेषक समूहों के सच्चे निष्कर्षों में से चुनिए। जो परिवर्तन आपके अपने विद्यालय की किसी वास्तविक कमी का उत्तर देता हो, वह किसी सामान्य अच्छे विचार से कहीं बेहतर उत्तर है।
प्र7.
चार-पाँच विद्यार्थियों के समूह में निम्नलिखित नाट्य-प्रस्तुति करें— • एक विद्यार्थी कठिन परिस्थिति में भी दयालुता दिखा रहा है। • एक समूह विद्यालय में जल व्यर्थ होने की समस्या का समाधान कर रहा है। • एक विद्यार्थी अपने संकोची सहपाठी की सभी के साथ मिलने-जुलने में सहायता कर रहा है। प्रत्येक नाट्य-प्रस्तुति के बाद कक्षा में पूछिए— आपने क्या देखा? आपको क्या प्रेरणादायक लगा? क्या ऐसा वास्तविक जीवन में संभव है?
उत्तर

नाट्य-प्रस्तुति की तैयारी — 5 चरण

  1. एक स्थिति चुनिए। पात्र तय कीजिए और यह भी कि कौन किसका अभिनय करेगा। चार-पाँच लोग, इससे अधिक नहीं।
  2. आरंभ, मध्य और अंत तय कीजिए। अंत तक कुछ बदलना चाहिए, नहीं तो वह कहानी ही नहीं है।
  3. हर संवाद लिखिए मत। बस तय कीजिए कि हर दृश्य में क्या होगा, फिर सहज रूप से बोलिए।
  4. ऊँचे और धीरे बोलिए, और ऐसे खड़े होइए कि कक्षा आपका चेहरा देख सके।
  5. तीन मिनट से कम रखिए। छोटा और स्पष्ट, लंबे और उलझे से बेहतर है।

दृश्य क — कठिन परिस्थिति में दयालुता दिखाता विद्यार्थी

पात्र: अनु, विक्रम, दो सहपाठी, शिक्षिका।

दृश्य 1. विक्रम लगातार तीसरे दिन बिना टिफ़िन के विद्यालय आता है। वह कहता है कि उसे भूख नहीं है और भोजन के समय कक्षा के पीछे अकेला बैठ जाता है। दो बच्चे उसके बारे में फुसफुसाते हैं।

दृश्य 2. अनु यह देख लेती है, पर सबके सामने घोषणा नहीं करती। वह अपना डिब्बा लेकर उसके पास जाती है और कहती है, “माँ ने आज चार परांठे रख दिए हैं और मुझसे कभी पूरे नहीं खाए जाते। क्या तुम मेरी मदद करोगे?” दोनों साथ खाते हैं। किसी और को कुछ नहीं बताया जाता।

दृश्य 3. बाद में अनु चुपचाप अपनी कक्षा-शिक्षिका को बताती है, “मैडम, विक्रम तीन दिन से टिफ़िन नहीं लाया है।” शिक्षिका को पता चलता है कि उसकी माँ अस्वस्थ हैं, और वे उसके लिए मध्याह्न भोजन की व्यवस्था करवा देती हैं।

अंत: अगले दिन विक्रम सबके साथ खा रहा है, और किसी ने ऐसी कोई बात नहीं कही जिससे उसे लज्जा आती।

दृश्य ख — जल व्यर्थ होने की समस्या सुलझाता समूह

पात्र: चार जल-प्रहरी, कार्यालय का लिपिक।

दृश्य 1. समूह को शौचालय के पीछे एक टपकता नल मिलता है। एक कहता है, “बस टपक ही तो रहा है, रहने दो।” दूसरा कहता है, “चलो नापकर देखते हैं।”

दृश्य 2. वे उसके नीचे गिलास रखते हैं और घड़ी देखते हैं। एक गिलास में छह मिनट। बोर्ड पर वे हिसाब लगाते हैं — एक घंटे में 10 गिलास, दिन में 240, यानी 48 लीटर — हर दिन तीन भरी बाल्टियाँ।

दृश्य 3. वे चार नलों की, ठीक-ठीक स्थान सहित, सूची बनाकर कार्यालय को देते हैं। लिपिक कहते हैं कि वे देखेंगे। दो सप्ताह बाद भी कुछ नहीं होता।

दृश्य 4. वे हार नहीं मानते। वे अपना चार्ट सूचना-पट्ट पर लगा देते हैं — “यह नल हर दिन तीन बाल्टी जल व्यर्थ करता है।” अगले सप्ताह मिस्त्री आ जाता है।

अंत: समूह चारों नल फिर से जाँचता है और एक-एक करके सूची में निशान लगाता है।

दृश्य ग — संकोची सहपाठी की सहायता करता विद्यार्थी

पात्र: रवि (नया, संकोची, घर पर दूसरी भाषा बोलता है), सीमा, तीन खेलते बच्चे।

दृश्य 1. खेल का कालांश। दो कप्तान अपनी टीमें चुनते हैं। रवि सबसे अंत में चुना जाता है, और फिर कोई उसे गेंद नहीं देता। वह जाकर दीवार के पास खड़ा हो जाता है।

दृश्य 2. सीमा यह देख लेती है। वह “बेचारा रवि” नहीं कहती। वह उसके पास जाकर पूछती है, “तुम घर पर कौन-से खेल खेलते हो?” वह एक ऐसे खेल का नाम बताता है जो उसने कभी नहीं सुना।

दृश्य 3. अगले दिन सीमा उससे कहती है कि वह पूरे समूह को वह खेल सिखाए। वह पहले धीरे-धीरे, फिर ठीक से समझाता है। उस खेल के सारे नियम उसे आते हैं और किसी और को नहीं आते। सब वही खेल खेलते हैं।

अंत: अगले खेल कालांश में एक कप्तान सबसे पहले उसी का नाम पुकारता है।

हर प्रस्तुति के बाद के तीन प्रश्न — नमूना उत्तर

प्रश्नअच्छा उत्तर कुछ ऐसा होगा
आपने क्या देखा?“दृश्य ग में एक लड़का अकेला खड़ा था और कोई उसे गेंद नहीं दे रहा था। एक लड़की ने यह देख लिया। उसने उस पर दया नहीं दिखाई — उसने पूछा कि वह किस चीज़ में अच्छा है, और फिर पूरे समूह को उसकी आवश्यकता बना दी।”
आपको क्या प्रेरणादायक लगा?“यह कि उसने चुपचाप किया, दयालुता पर भाषण दिए बिना और उसे लज्जित किए बिना। और यह भी कि अनु ने भोजन देते समय कहा कि उसके पास अधिक है, ताकि विक्रम को कभी यह न लगे कि उस पर दया की जा रही है।”
क्या ऐसा वास्तविक जीवन में संभव है?“हाँ — और ऐसा होता भी है। पर हम प्राय: देख लेते हैं और कुछ करते नहीं, क्योंकि हमें लगता है कि कोई और कर देगा। इनमें से हर दृश्य में केवल एक व्यक्ति को कमरा पार करके जाना था। हममें से कोई भी वह एक व्यक्ति बन सकता है।”
अभिनय बताए जाने से अधिक क्यों सिखाता है: जब आप दीवार के पास अकेले खड़े बच्चे का अभिनय करते हैं, तो आपको थोड़ा-सा वह अनुभव होता है — और वह आपको याद रह जाता है। और जब आप उस व्यक्ति का अभिनय करते हैं जो चलकर उसके पास जाता है, तो आपने चलकर जाने का अभ्यास कर लिया होता है। असली दिन पर आपके पाँव पहले से जानते होंगे कि क्या करना है।
प्र8.
अपनी प्रातःकालीन सभा के लिए ‘मेरे सपनों का विद्यालय’ पर एक मिनट का भाषण लिखिए। इसमें बताएँ कि यह विद्यालय किस कारण से विशेष है, इसे ऐसा बनाए रखने में कौन-कौन सहायता करता है और प्रत्येक विद्यार्थी इसमें किस प्रकार सहायता कर सकता है?
उत्तर

एक मिनट का अर्थ लगभग 130 से 150 शब्द है। इससे अधिक मत लिखिए — समय समाप्त हो जाएगा और आपको बीच में रुकना पड़ेगा। प्रश्न के तीनों भाग रखिए — यह विशेष क्यों है, इसे कौन ऐसा बनाए रखता है, और हर विद्यार्थी क्या कर सकता है।

नमूना उत्तर — एक मिनट

आदरणीय शिक्षकगण और मेरे प्रिय साथियो,
आप सभी को सुप्रभात।

मेरे सपनों का विद्यालय संगमरमर के फ़र्श वाला विद्यालय नहीं है। वह यही विद्यालय है, एक अच्छे दिन पर।

मेरे सपनों के विद्यालय में कोई नल नहीं टपकता, किसी ख़ाली कक्ष में बत्ती नहीं जलती, और हमारे भोजन के छिलके हमारे ही उद्यान की मिट्टी बन जाते हैं। हर कक्षा की खिड़की के बाहर एक पेड़ है। और वहाँ कोई बच्चा अकेला भोजन नहीं करता।

इसे ऐसा कौन बनाए रखता है? कोई एक व्यक्ति नहीं। रमेश भैया, जो हमारे आने से पहले बरामदा बुहार देते हैं। कमला दीदी, जो हमारा भोजन बनाती हैं। हमारे शिक्षक, जो एक सवाल दोबारा समझाने के लिए रुक जाते हैं। और माली, जो उन पौधों को पानी देते हैं जिन्हें हम लगाकर भूल गए।

हम क्या कर सकते हैं? बहुत छोटी बातें। नल कसकर बंद कीजिए। अंत में निकलते समय पंखा बंद कीजिए। कूड़ेदान का उपयोग कीजिए। जो लोग हमारा विद्यालय चलाते हैं उन्हें सुप्रभात कहिए। और जो अकेला खड़ा हो, उसके लिए अपनी बेंच पर जगह बनाइए।

सपनों का विद्यालय बनाया नहीं जाता। वह हम सबके रोज़ के व्यवहार से बनता है।

धन्यवाद।

कैसे बोलें: सीधे खड़े होइए। कागज़ पर नहीं, विद्यालय की ओर देखिए — इसलिए पहली और अंतिम पंक्ति कंठस्थ कर लीजिए। धीरे बोलिए; घबराया हुआ वक्ता तेज़ बोलने लगता है। “सुप्रभात” के बाद रुकिए, और अंतिम पंक्ति से पहले भी रुकिए। घड़ी लेकर तीन बार ज़ोर से अभ्यास कीजिए और जो एक मिनट में न आए उसे काट दीजिए।
छोटी बातों वाला भाषण बड़े सपनों वाले भाषण से बेहतर क्यों है: सभा में बैठा हर व्यक्ति बड़े सपनों वाले भाषण सुन चुका है। पर ऐसा भाषण लगभग किसी ने नहीं सुना जो रमेश भैया का नाम ले और विद्यालय से एक नल बंद करने को कहे। सच्चे लोगों और सच्चे कामों का नाम लेना ही वह बात है जिससे सुनने वाले को आपका भाषण भोजन के समय तक याद रहता है।
प्र9.
एक त्वरित सर्वेक्षण कीजिए और पाँच विद्यार्थियों एवं एक शिक्षक से पूछिए— (क) विद्यालय में ऐसी कौन-सी एक बात है जो उन्हें प्रसन्नता का अनुभव कराती है? (ख) ऐसी कौन-सी एक बात है जिसे सुधारा जा सकता है? (ग) विद्यालय में आज उन्होंने ऐसा कौन-सा एक दयालुतापूर्ण कार्य देखा? अपने उत्तर लिखिए और कक्षा में प्रस्तुत कीजिए। यह बताइए कि आपने दूसरों से क्या सीखा?
उत्तर

सर्वेक्षण ठीक से कैसे करें

  1. अपनी कॉपी में छह पंक्तियों और तीन प्रश्नों वाले स्तंभों की एक तालिका बनाइए।
  2. पाँच विद्यार्थियों से पूछिए — और अलग-अलग तरह के लोग चुनिए: दूसरी कक्षा का कोई, कोई जिससे आप प्राय: बात नहीं करते, कोई छोटा और कोई बड़ा। अपने पाँच सबसे क़रीबी मित्रों से पूछेंगे तो पाँचों उत्तर लगभग एक जैसे मिलेंगे।
  3. एक शिक्षक से भी पूछिए।
  4. विनम्रता से पूछिए, उत्तर उन्हीं के शब्दों में लिखिए, और किसी उत्तर पर बहस मत कीजिए।
  5. धन्यवाद कहिए। यदि उत्तर किसी परेशानी के बारे में हो तो उस व्यक्ति का नाम मत लिखिए।

नमूना उत्तर — हमारा पूरा सर्वेक्षण

किससे पूछा(क) क्या प्रसन्नता देता है(ख) क्या सुधारा जा सकता है(ग) आज देखा गया एक दयालु कार्य
आयशा, कक्षा 5गुरुवार का पुस्तकालय कालांश“हिंदी में और कहानी की पुस्तकें चाहिए”“वर्षा में रोहित ने मेरे साथ अपना छाता साझा किया”
दीपक, कक्षा 5खेल का कालांश और खो-खो“मैदान में पत्थर हैं; पिछले सप्ताह मैं गिर गया था”“एक बड़े विद्यार्थी ने कक्षा 1 के बच्चे की पानी की बोतल ढूँढ़ने में मदद की”
सलमा, कक्षा 3मध्याह्न भोजन, विशेषकर खीर“पेयजल का नल हमारे लिए बहुत ऊँचा है”“कक्षा 5 की दीदी ने मुझे उठाकर पानी पिलाया”
अर्जुन, कक्षा 7“मेरे मित्र। वरना मैं आता ही नहीं”“शौचालय दिन में एक बार नहीं, दो बार साफ़ होने चाहिए”“किसी ने मेरा खोया हुआ ज्यामिति बॉक्स कार्यालय में जमा करा दिया”
निशा, कक्षा 2चित्रकला का कालांश“बड़े बच्चे बरामदे में दौड़ते हैं और हमें धक्का लग जाता है”“मेरी शिक्षिका ने मेरे जूते का फ़ीता बाँधा”
मीना मैडम, शिक्षिका“जब कोई बच्चा, जिसे कठिनाई हो रही थी, अचानक समझ जाता है”“एक साथ कम काम हों, ताकि हम हर बच्चे को अधिक समय दे सकें”“कक्षा 5 के एक लड़के ने चुपचाप अपना भोजन उस सहपाठी के साथ बाँटा जिसके पास टिफ़िन नहीं था”

मैंने दूसरों से क्या सीखा — नमूना उत्तर

  • विद्यालय में प्रसन्नता अधिकतर लोगों और छोटी-छोटी ख़ुशियों से आती है — मित्र, पसंदीदा कालांश, शुक्रवार की खीर। किसी एक ने भी “भवन” नहीं कहा।
  • छोटे बच्चों को बिल्कुल अलग समस्याएँ दिखती हैं। सलमा पेयजल के नल तक पहुँच नहीं पाती और निशा को अवकाश में बरामदे से डर लगता है। मैं दो साल से हर दिन इन दोनों समस्याओं के पास से गुज़रा हूँ और कभी ध्यान ही नहीं गया, क्योंकि मैं पर्याप्त लंबा और पर्याप्त बड़ा हूँ।
  • हर एक ने उसी दिन का कोई दयालु कार्य देखा था। हर एक ने, बिना अधिक सोचे। हमारे विद्यालय में दयालुता हर समय हो रही है; बस हम उसकी चर्चा नहीं करते।
  • शिक्षिका का उत्तर मुझे सबसे अधिक चौंकाने वाला लगा। उन्होंने कहा कि उन्हें तब ख़ुशी होती है जब कोई कठिनाई से जूझता बच्चा अचानक समझ जाता है। अर्थात् वे कक्षा में प्रथम आने वाले से अधिक उस बच्चे को देखती हैं जिसे कठिनाई हो रही है।
  • छह में से दो समस्याएँ हम इसी महीने ठीक कर सकते हैं — मैदान से पत्थर हटाना, और सीढ़ी तथा बरामदे के लिए “दौड़ें नहीं, चलें” का नियम, जिसकी निगरानी हमारी कक्षा करे।
इस अध्याय का अंत सर्वेक्षण से क्यों उचित है, पाठ से क्यों नहीं: पूरे अध्याय ने यही कहा है कि विद्यालय तभी आनंदमय है जब वह सबके लिए आनंदमय हो। सर्वेक्षण वही तरीका है जिससे यह पता चलता है कि आपके विद्यालय में यह सचमुच सच है या नहीं — उन लोगों से पूछकर जो आप नहीं हैं। ऊँचा नल लंबे व्यक्ति को दिखता ही नहीं और नाटे व्यक्ति के लिए सच्ची समस्या है। विद्यालय का दोष अनुमान से नहीं सुधारा जा सकता। पूछना पड़ता है।
काम अधूरा मत छोड़िए: अपने निष्कर्ष कक्षा में प्रस्तुत कीजिए, जो तीन-चार बातें सबसे अधिक बार आईं उन्हें एक चार्ट पर लिखिए, और वह चार्ट अपनी कक्षा-शिक्षिका को दीजिए। कॉपी में पड़ा रह गया सर्वेक्षण कुछ नहीं बदलता। सुझाव के साथ सौंपा गया सर्वेक्षण कभी-कभी पूरा विद्यालय बदल देता है।
क्या यह उपयोगी रहा?