प्र1.
जल को व्यर्थ होने से रोकने के लिए हम अपने विद्यालय में कौन-से सरल उपाय अपना सकते हैं?
उत्तर
विद्यालय में अधिकांश जल कोई जान-बूझकर व्यर्थ नहीं करता। वह बूँद-बूँद करके बहता है — उन नलों से जिन्हें किसी ने बंद नहीं किया और उन रिसावों से जिनकी किसी ने सूचना नहीं दी। इसलिए सरल उपाय वही हैं जो ठीक इसी को रोकें।
| क्या करें | कैसे | लगभग कितनी बचत |
|---|---|---|
| हर टपकते नल की मरम्मत | जल-प्रहरी ठीक-ठीक स्थान सहित सूची बनाकर कार्यालय को दें; दो सप्ताह बाद फिर जाँचें | प्रति नल प्रतिदिन 48 लीटर तक |
| साबुन लगाते समय नल बंद रखना | हाथ गीले कीजिए, नल बंद कीजिए, साबुन लगाइए, फिर धोने के लिए खोलिए | हर बार लगभग आधा जल |
| बहते नल के बजाय मग का उपयोग | हाथ धोने के स्थान पर एक मग रखिए | बहुत अधिक — बहता नल आवश्यकता से कहीं अधिक जल देता है |
| ऊपरी टंकी पर जल-स्तर सूचक या फ़्लोट लगवाना | ताकि टंकी बहने से पहले ही पंप बंद हो जाए | हर बार सैकड़ों लीटर जो बहकर व्यर्थ जाते |
| हर नल पर छोटा संकेत लगाना | “मुझे कसकर बंद कीजिए”, चित्र सहित | याद दिलाना काम करता है; अधिकांश बच्चे केवल भूल जाते हैं |
| हर कक्षा में जल-मॉनीटर | एक बच्चा दिन के अंत में अपनी कक्षा के नल जाँचे | रात भर कुछ भी बहता नहीं छूटता |
| पौधों को सुबह या शाम पानी देना | तेज़ धूप वाली दोपहर में नहीं | वाष्पन से बहुत कम जल उड़ता है |
| बोतलों में बचा जल काम में लाना | दिन के अंत में उसे नाली के बजाय गमलों में डालिए | बड़े विद्यालय में प्रतिदिन कई लीटर |
| आँगन धोने के बजाय बुहारना | झाड़ू बहते जल जितनी ही सफ़ाई करती है | बहुत बड़ी मात्रा |
‘सूचना देना’ ही सबसे प्रभावी काम क्यों है: बच्चा नल की मरम्मत नहीं कर सकता। पर बच्चा वह एक व्यक्ति बन सकता है जो उसे देख ले और लिख ले। हर विद्यालय के हर टपकते नल के पास से सैकड़ों लोग गुज़र चुके होते हैं। वह उस दिन ठीक होता है जिस दिन कोई एक व्यक्ति उसे स्पष्ट रूप से, लिखकर, स्थान सहित बता देता है।