बाहर जाकर देखिए, अनुमान मत लगाइए। उन्हें गिनिए, और जिस वृक्ष का नाम न पता हो उसका नाम माली, चौकीदार या अपने दादा-दादी से पूछिए।
भारतीय विद्यालयों में प्राय: मिलने वाले वृक्ष
| वृक्ष | कैसे पहचानें | क्यों लगाया जाता है |
|---|---|---|
| नीम | एक डंठल पर दो पंक्तियों में छोटी नुकीली पत्तियाँ; मसलने पर हल्की कड़वी गंध | घनी छाया, कीट दूर रखता है, औषधीय |
| पीपल | दिल के आकार का पत्ता जिसका सिरा लंबी पतली पूँछ जैसा होता है; ज़रा-सी हवा में पत्ते खड़कते हैं | बहुत बड़ी छाया, लंबी आयु, भरपूर ऑक्सीजन |
| बरगद | डालियों से नीचे लटकती मोटी जड़ें | विशाल छाया; पक्षी घोंसले बनाते हैं |
| गुलमोहर | बारीक पंखनुमा पत्तियाँ; गर्मियों में दहकते लाल-नारंगी फूल | छाया और सुंदरता |
| आम | लंबी गहरी हरी पत्तियाँ; नई पत्तियाँ ताँबे जैसी लाल | छाया और फल |
| अशोक | ऊँचा और पतला, हरे खंभे जैसा | चारदीवारी के साथ लगाया जाता है |
| आँवला, अमरूद, जामुन | फलदार वृक्ष, प्राय: उद्यान के पास | फल; जामुन पक्षियों को बहुत भाता है |
| नारियल, ताड़ | ऊँचा इकहरा तना, बड़े पंखे या पंखनुमा पत्ते | दक्षिण भारत और तटीय क्षेत्रों में आम |
नमूना उत्तर: “हमारे विद्यालय में 14 बड़े वृक्ष हैं — 3 नीम, 2 पीपल, 4 गुलमोहर, 1 आम, 2 अशोक और 2 नारियल। सबसे पुराना खेल के मैदान के पास वाला नीम है; माली कहते हैं कि वह विद्यालय का भवन बनने से पहले से वहाँ है। द्वार के ठीक बाहर एक बड़ा बरगद है जिसके नीचे फल बेचने वाला बैठता है।”