प्र1.
यदि आप अपने विद्यालय या घर की छत को श्वेत रंग से पेंट करेंगे तो क्या होगा?
उत्तर
नीचे के कमरे ठंडे हो जाएँगे। गर्मी की दोपहर में यह अंतर 2 से 5 डिग्री तक हो सकता है — इतना कि स्पष्ट अनुभव हो।
क्या-क्या बदलेगा, एक-एक करके—
- श्वेत छत सूर्य की अधिकांश ऊष्मा अपने भीतर लेने के बजाय आकाश की ओर लौटा देती है।
- इसलिए छत स्वयं धूसर या काली छत की तुलना में बहुत ठंडी रहती है।
- छत से होकर नीचे कमरे में कम ऊष्मा पहुँचती है।
- कमरा ठंडा रहता है, विशेषकर सबसे ऊपरी मंज़िल के कक्ष, जो सदैव सबसे गर्म होते हैं।
- पंखे और कूलर कम चलाने पड़ते हैं, इसलिए कम विद्युत लगती है और बिल घटता है।
- बच्चे दोपहर में गर्मी से ऊँघे बिना बैठकर पढ़ सकते हैं।
| साधारण धूसर छत | श्वेत रंग से पुती छत | |
|---|---|---|
| सूर्य के प्रकाश का क्या करती है | अधिकांश अवशोषित कर लेती है | अधिकांश परावर्तित कर देती है |
| मई में दोपहर 2 बजे छत की सतह | छूने में बहुत गर्म | स्पष्ट रूप से ठंडी |
| नीचे का कमरा | घुटन भरा और गर्म | 2–5 °C ठंडा |
| विद्युत का उपयोग | अधिक — पंखे पूरी गति पर | कम |
| लागत | — | वर्ष में एक बार चूने या परावर्तक श्वेत रंग का एक डिब्बा |
यह क्यों काम करता है: यह ठीक गतिविधि 3 है, बस बड़े रूप में। काली टाइल गर्म हुई थी; श्वेत ठंडी रही थी। छत भी एक बहुत बड़ी टाइल ही है, जिसके नीचे एक कमरा है। उसका रंग चुनकर आप यह चुन रहे हैं कि वह कमरा कितना गर्म होगा।
यह सचमुच किया जाता है: भारत के कई शहरों में अब गर्मी आने से पहले घरों पर चूने या परावर्तक रंग की एक परत चढ़ाई जाती है — इसे “शीतल छत” कहते हैं। किसी भवन को ठंडा करने के यह सबसे सस्ते उपायों में से एक है और इसमें बिजली बिल्कुल नहीं लगती। गुजरात और तेलंगाना में तो पूरे-पूरे मोहल्ले इस तरह रंगे गए हैं।