प्र1.
सौर ऊर्जा चालित जल ऊष्मक — 1. दो प्यालों में पानी भरिए। 2. एक प्याले को धूप में और दूसरे प्याले को छाया में रखिए। 3. 15–20 मिनट तक प्रतीक्षा कीजिए और दोनों प्यालों के जल को स्पर्श कीजिए। आपने क्या अनुभव किया?
उत्तर
आप क्या अनुभव करेंगे: धूप में रखे प्याले का जल स्पष्ट रूप से गर्म लगता है। छाया में रखे प्याले का जल अब भी ठंडा है। दोनों प्यालों में आरंभ में एक जैसा जल था, अत: गर्म करने का काम सूर्य ने ही किया है।
इसे ठीक से कैसे करें:
- एक ही आकार और एक ही रंग के दो प्याले लीजिए।
- एक ही बर्तन से, एक ही समय पर, दोनों में बराबर जल भरिए।
- एक प्याला तेज़ धूप में रखिए — खिड़की की धूप या विद्यालय के मैदान में।
- दूसरा प्याला पास ही छाया में रखिए, जिससे दोनों के चारों ओर की वायु एक जैसी रहे।
- 15 से 20 मिनट प्रतीक्षा कीजिए। बीच में इन्हें हिलाइए मत।
- अब बारी-बारी से दोनों में उँगली डुबोकर तुलना कीजिए।
| प्याला | कहाँ रखा था | 20 मिनट बाद जल कैसा लगा |
|---|---|---|
| प्याला 1 | धूप में | गर्म — भरते समय की तुलना में स्पष्ट गर्म |
| प्याला 2 | छाया में | अब भी ठंडा — लगभग वैसा ही जैसा आरंभ में था |
ऐसा क्यों होता है: सूर्य का प्रकाश केवल प्रकाश नहीं है। वह ऊष्मा ऊर्जा भी साथ लाता है। जब यह प्रकाश प्याले और जल पर पड़ता है तो उसकी ऊष्मा जल में चली जाती है और जल गर्म हो जाता है। छाया वाले प्याले पर धूप पड़ती ही नहीं, इसलिए उसे गर्म करने वाला कुछ नहीं है। पुस्तक के शब्दों में — यह दर्शाता है कि सूर्य का प्रकाश कैसे हमें ऊष्मा ऊर्जा प्रदान करता है।
यह आप पहले भी देख चुके हैं: छत पर रखी काली टंकी का जल दोपहर तक गर्म हो जाता है; छत पर लगा सौर जल ऊष्मक बिना गैस और बिना विद्युत के गर्म जल देता है; और सौर कुकर केवल धूप से दाल पका देता है। क्या आप जानते हैं? राजस्थान का भड़ला सौर पार्क विश्व के सबसे बड़े सौर ऊर्जा संयंत्रों में से एक है।