प्र1.
यदि आप पतले या मोटे रबर बैंडों का उपयोग करते हैं तो क्या होता है? क्या उनसे उत्पन्न ध्वनि भिन्न होती है?
उत्तर
हाँ, उनकी ध्वनि भिन्न होती है। पतला बैंड ऊँची, तीखी और महीन ध्वनि देता है। मोटा बैंड नीची, गहरी और भारी ध्वनि देता है।
| बैंड | वह कैसे काँपता है | कैसी ध्वनि सुनाई देती है |
|---|---|---|
| पतला बैंड | बहुत तेज़ी से काँपता है | ऊँची और तीखी — छोटी घंटी जैसी |
| मोटा बैंड | अपेक्षाकृत धीमे काँपता है | नीची और गहरी — बड़े ढोल जैसी |
| कसकर तना बैंड | अधिक तेज़ी से काँपता है | ध्वनि और ऊँची हो जाती है |
| ढीला छोड़ा बैंड | धीमे काँपता है | ध्वनि नीची हो जाती है |
ऐसा क्यों होता है: पतला बैंड हल्का होता है, इसलिए वह जल्दी-जल्दी आगे-पीछे काँपता है। तेज़ कंपन से ऊँची ध्वनि बनती है। मोटा बैंड भारी होता है, इसलिए वह धीरे काँपता है और उसकी ध्वनि नीची होती है। बैंड को कसने से भी वही होता है जो पतला करने से — कंपन तेज़ हो जाता है और स्वर ऊँचा उठ जाता है।
असली वाद्य देखिए: सितार, गिटार या तानपुरा के तार एक जैसे नहीं होते। कुछ पतले होते हैं, कुछ मोटे, और हर एक अलग स्वर देता है। आपका गत्ते वाला गिटार भी ठीक इसी सिद्धांत पर बजता है।