वाहन के स्वामी या चालक से पूछिए — “यह एक लीटर में कितने किलोमीटर देता है?” यही संख्या माइलेज कहलाती है। तुलना करने के लिए बस इन संख्याओं को आमने-सामने रखिए — जो वाहन एक लीटर में अधिक किलोमीटर देता है, वह उतनी ही दूरी के लिए कम ईंधन खर्च करता है।
पता कैसे लगाएँ:
- ऐसे चार-पाँच वाहन चुनिए जिनके विषय में आप सचमुच पूछ सकें — घर का स्कूटर, पड़ोसी की कार, ऑटो, विद्यालय की बस, ट्रैक्टर।
- स्वामी से दो बातें पूछिए — कितने लीटर ईंधन भरता है और उतने में वाहन कितनी दूर चलता है।
- भाग देकर एक लीटर की दूरी निकालिए।
- उत्तर एक तालिका में लिखिए।
माइलेज = तय की गई दूरी ÷ खर्च हुआ ईंधन (लीटर में)
उदाहरण: एक स्कूटर 4 लीटर में 200 किलोमीटर चलता है।
200 ÷ 4 = 1 लीटर में 50 किलोमीटर
नमूना उत्तर — मेरी तालिका इस प्रकार बनी:
ये केवल नमूने के आँकड़े हैं। आपको जो वास्तविक संख्याएँ बताई जाएँ, वही लिखिए।
तुलना किस प्रकार करें। तीन उचित तरीके —
- प्रति लीटर किलोमीटर। जितना अधिक, उतना अच्छा। यहाँ मोटरसाइकिल सबसे आगे है।
- समान यात्रा के लिए ईंधन। एक दूरी तय कर लीजिए, जैसे 100 किमी, और देखिए किस वाहन को कितने लीटर चाहिए। जितना कम, उतना अच्छा।
- प्रति व्यक्ति ईंधन। यह सबसे उचित तुलना है। बस केवल 5 किमी प्रति लीटर देती है, पर वह 50 यात्री ले जाती है। हिसाब लगाइए: 100 किमी के लिए बस को 20 लीटर चाहिए, अर्थात् 20 ÷ 50 = प्रति व्यक्ति 0.4 लीटर। कार को 5.6 लीटर चाहिए और उसमें लगभग 4 लोग बैठते हैं, अर्थात् 5.6 ÷ 4 = प्रति व्यक्ति 1.4 लीटर। अत: बस प्रति व्यक्ति तीन गुने से भी अधिक अच्छी है।
तीसरा तरीका ही सही क्यों है: वाहन स्वयं को ढोने के लिए नहीं बना, वह लोगों को ले जाने के लिए बना है। इसलिए सच्चा प्रश्न यह नहीं कि “प्रति किलोमीटर कितना ईंधन” बल्कि यह है कि “प्रति व्यक्ति प्रति किलोमीटर कितना ईंधन”। इसी कारण भरी हुई बस, साझा ऑटो या मेट्रो रेल, सबके अलग-अलग गाड़ी चलाने की तुलना में कहीं अधिक ईंधन बचाती है।
उचित तुलना कीजिए: एक जैसा काम करने वाले वाहनों की ही तुलना कीजिए, और यह भी याद रखिए कि माइलेज बोझ, सड़क, भीड़ और वाहन की देखभाल के अनुसार बदलती रहती है।