कक्षा ५ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 7 आइए विचार करें के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
यदि आपके घर में किसी दिन विद्युत न रहे तो क्या होगा?
उत्तर

पूरे दिन की दिनचर्या बदल जाएगी। तार से चलने वाली कोई भी वस्तु काम नहीं करेगी — न पंखा, न अँधेरे के बाद बत्ती, न रेफ्रिजरेटर, न जल का पंप, न टेलीविज़न, न चार्ज हुआ फ़ोन।

दिन का समयक्या होगा
प्रात:कालफ़ोन का अलार्म नहीं बजेगा। पंप टंकी नहीं भर पाएगा, इसलिए हाथ से जल भरना पड़ेगा।
नाश्तारेफ्रिजरेटर बंद है और कल का दूध फटने लगेगा। मिक्सी नहीं — चटनी सिल पर पीसनी होगी।
तैयार होनावर्दी के लिए इस्तरी नहीं। गीज़र नहीं, इसलिए ठंडे जल से स्नान।
दोपहरपंखा न चलने से कमरे गर्म हो जाएँगे। खिड़कियाँ खोलकर हवादार जगह बैठना पड़ेगा।
संध्यागृहकार्य अँधेरा होने से पहले पूरा करना होगा, या दीपक, मोमबत्ती अथवा टॉर्च के प्रकाश में।
रातघर अँधेरा और गर्म। परिवार बाहर या छत पर बैठेगा और सब जल्दी सो जाएँगे।
एक ही वस्तु के न होने से इतना अंतर क्यों: विद्युत कोई एक मशीन नहीं है। वह घर की लगभग हर मशीन के पीछे की ऊर्जा है। इसलिए वह जाती है तो प्रकाश, गति, शीतलन और ध्वनि — सब एक साथ चले जाते हैं।
और क्या फिर भी काम करेगा: गैस चूल्हा, साइकिल, हाथ का पंखा, ठंडे जल का मटका, दिन की धूप और हाथ से खींचा गया जल। इनमें से कई वही पुराने उपाय हैं जो हमारे दादा-दादी काम में लाते थे — और वे आज भी पूरी तरह काम करते हैं।
प्र2.
कोयले के स्थान पर सौर अथवा पवन ऊर्जा का उपयोग अधिक अच्छा क्यों होता है?
उत्तर

क्योंकि सौर और पवन ऊर्जा वायु को प्रदूषित नहीं करतीं और वे कभी समाप्त भी नहीं होतीं। कोयले से बहुत धुआँ और हानिकारक गैसें निकलती हैं, और वह एक दिन समाप्त हो जाएगा।

कोयलासौर और पवन
क्या करना पड़ता हैभूमि से खोदना, दूर तक ढोना, फिर जलानान कुछ खोदना, न कुछ जलाना — पैनल और पवनचक्की बस लगे रहते हैं
धुआँबहुत धुआँ और हानिकारक गैसेंबिल्कुल नहीं
स्वास्थ्य पर असरदूषित वायु से खाँसी और छाती के रोगवायु स्वच्छ बनी रहती है
क्या यह चलता रहेगा?नहीं। इसे बनने में लाखों वर्ष लगे। जल गया तो समाप्त।हाँ। सूर्य प्रतिदिन उगता है और पवन बहती रहती है।
पीछे बचा अपशिष्टराख और कालिखकोई अपशिष्ट नहीं
ईंधन का मूल्यकोयला बार-बार खरीदना पड़ता हैधूप और हवा निःशुल्क हैं
कोयला — धुआँ सूर्य — धुआँ नहीं पवन — धुआँ नहीं
कोयले को जलाना ही पड़ता है। सौर पैनल और पवनचक्की कुछ भी नहीं जलाते।
एक वाक्य में मुख्य कारण: कोयले से ऊर्जा पाने के लिए उसे जलाना पड़ता है, और जलने से सदा धुआँ निकलता है। सौर पैनल और पवनचक्की बिना कुछ जलाए ऊर्जा देते हैं, इसलिए धुआँ बनता ही नहीं — और इसीलिए पुस्तक इसे स्वच्छ ऊर्जा कहती है।
भारत इसे बड़े पैमाने पर कर भी रहा है। राजस्थान का भड़ला सौर पार्क विश्व के सबसे बड़े सौर ऊर्जा संयंत्रों में से एक है और केरल का कोच्चि अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा विश्व का पहला ऐसा हवाई अड्डा है जो पूरी तरह सौर ऊर्जा से चलता है।
प्र3.
ऐसे दो उदाहरण बताइए जहाँ आप ऊर्जा को संचित होते हुए देखते हैं।
उत्तर

दो स्पष्ट उदाहरण: बैटरी, और हमारा अपना शरीर।

  1. बैटरी। टॉर्च का सेल, मोबाइल की बैटरी या ई-रिक्शा की बैटरी अपने भीतर ऊर्जा संचित रखती है। जब तक स्विच न दबाएँ, कुछ नहीं होता। दबाते ही संचित ऊर्जा बाहर आती है और टॉर्च जलती है, फ़ोन बजता है, रिक्शा चलता है। संचय समाप्त होने पर बैटरी चार्ज करनी या बदलनी पड़ती है।
  2. हमारा शरीर। हम अभी भोजन करते हैं और शरीर उसकी कुछ ऊर्जा बाद के लिए रख लेता है। इसीलिए एक समय भोजन न मिलने पर भी हम चल और दौड़ सकते हैं — शरीर वही बचाई हुई ऊर्जा खर्च करता है।

ऊर्जा संचय के और रोज़मर्रा के उदाहरण, जिन्हें आप जोड़ सकते हैं —

ऊर्जा कहाँ संचित हैकैसे पता चलता है
रसोई गैस का सिलेंडरवह चुपचाप रखा रहता है — जब तक बर्नर न जलाया जाए
स्कूटर की टंकी का पेट्रोलएक बार भरने पर स्कूटर कई किलोमीटर चल जाता है
लकड़ी, कोयला, तेल से भरा दीपकहर एक जलाए जाने तक शांत प्रतीक्षा करता है
खिंचा हुआ रबर बैंड या चाबी भरा खिलौनाछोड़ते ही वह स्वयं चल पड़ता है
बाँध में ऊँचाई पर रुका हुआ जलफाटक खोलते ही गिरता जल टर्बाइन घुमा देता है
भंडार में रखा अनाज और शरीर में जमा चर्बीआगे आने वाले महीनों के लिए रखी भोजन-ऊर्जा
यहाँ ‘संचित’ का अर्थ: ऊर्जा है, पर अभी उपयोग में नहीं है। वह चुपचाप पड़ी प्रतीक्षा करती है। जब हमें चाहिए तब हम उसे बाहर निकाल लेते हैं — स्विच दबाकर, जलाकर, या छोड़कर। यह बहुत उपयोगी है, क्योंकि सूर्य सदा नहीं चमकता और हम सदा खाते नहीं रहते, किंतु संचित ऊर्जा सदा तैयार रहती है।
प्र4.
ऐसा कौन-सा कार्य है जो आप ऊर्जा बचाने के लिए अपने घर में कर सकते हैं?
उत्तर

मैं एक काम कर सकता हूँ — कमरे से निकलते समय हर बत्ती और पंखा बंद कर देना। इसमें कुछ खर्च नहीं होता, एक क्षण लगता है, और इससे प्रतिदिन विद्युत बचती है।

नमूना उत्तर: “मेरे घर में मैंने यह अपना काम बना लिया है। कमरे से बाहर निकलते समय मैं जाते-जाते स्विच बोर्ड की ओर एक बार देखता हूँ। यदि पंखा या बत्ती चल रही हो और कमरे में कोई न हो तो मैं उसे बंद कर देता हूँ। कहीं बाहर जाने से पहले भी मैं सारे कमरे एक बार देख लेता हूँ। एक महीने में हमारा बिजली का बिल कम आया और पिताजी ने कहा कि यह मेरे देखने-भालने के कारण हुआ।”

और भी अच्छे काम, यदि आप जोड़ना चाहें —

क्या करेंइससे ऊर्जा कैसे बचती है
पुराने बल्ब बदलकर एल.ई.डी. बल्ब लगानाप्रकाश उतना ही, विद्युत बहुत कम — यही ऊर्जा दक्षता है
दिन में परदे खोल देनाबल्ब जलाने के बदले निःशुल्क धूप
रेफ्रिजरेटर का दरवाज़ा खोलकर खड़े न रहनाहर बार खुलने पर उसे फिर से ठंडा करने में अधिक ऊर्जा लगती है
पकाते समय बर्तन ढक देनाभोजन जल्दी पकता है, इसलिए गैस कम जलती है
कपड़े मशीन के बजाय धूप में सुखानावही काम सूर्य निःशुल्क कर देता है
फ़ोन भर जाने पर चार्जर निकाल देनालगा हुआ चार्जर थोड़ी-थोड़ी विद्युत खींचता रहता है
पास की जगहों पर पैदल या साइकिल से जानापेट्रोल बचता है और वायु स्वच्छ रहती है
छोटी आदतें इतनी महत्वपूर्ण क्यों हैं: दिन भर चलता एक पंखा बहुत बड़ी बात नहीं लगती। किंतु हर कमरे में एक पंखा, हर घर में, प्रतिदिन — यह मिलकर कहीं दूर जलने वाले कोयले का विशाल ढेर बन जाता है। घर में ऊर्जा बचाना वास्तव में उसी कोयले को भूमि में और उस धुएँ को वायु से बाहर रखना है।
प्र5.
पता लगाइए कि कोई वाहन प्रति लीटर पेट्रोल या डीजल में कितने किलोमीटर यात्रा कर सकता है। विभिन्न वाहनों के विषय में यह जानकारी प्राप्त कीजिए। आप उनकी तुलना किस प्रकार करेंगे?
उत्तर

वाहन के स्वामी या चालक से पूछिए — “यह एक लीटर में कितने किलोमीटर देता है?” यही संख्या माइलेज कहलाती है। तुलना करने के लिए बस इन संख्याओं को आमने-सामने रखिए — जो वाहन एक लीटर में अधिक किलोमीटर देता है, वह उतनी ही दूरी के लिए कम ईंधन खर्च करता है।

पता कैसे लगाएँ:

  1. ऐसे चार-पाँच वाहन चुनिए जिनके विषय में आप सचमुच पूछ सकें — घर का स्कूटर, पड़ोसी की कार, ऑटो, विद्यालय की बस, ट्रैक्टर।
  2. स्वामी से दो बातें पूछिए — कितने लीटर ईंधन भरता है और उतने में वाहन कितनी दूर चलता है।
  3. भाग देकर एक लीटर की दूरी निकालिए।
  4. उत्तर एक तालिका में लिखिए।
माइलेज = तय की गई दूरी ÷ खर्च हुआ ईंधन (लीटर में)
उदाहरण: एक स्कूटर 4 लीटर में 200 किलोमीटर चलता है।
200 ÷ 4 = 1 लीटर में 50 किलोमीटर

नमूना उत्तर — मेरी तालिका इस प्रकार बनी:

वाहनईंधन1 लीटर में किलोमीटर100 किमी के लिए आवश्यक ईंधन
मोटरसाइकिलपेट्रोललगभग 60 किमी100 ÷ 60 ≈ 1.7 लीटर
स्कूटरपेट्रोललगभग 50 किमी100 ÷ 50 = 2 लीटर
छोटी कारपेट्रोललगभग 18 किमी100 ÷ 18 ≈ 5.6 लीटर
ऑटो-रिक्शासी.एन.जी. / पेट्रोललगभग 25 किमी100 ÷ 25 = 4 लीटर
बसडीजललगभग 5 किमी100 ÷ 5 = 20 लीटर

ये केवल नमूने के आँकड़े हैं। आपको जो वास्तविक संख्याएँ बताई जाएँ, वही लिखिए।

तुलना किस प्रकार करें। तीन उचित तरीके —

  1. प्रति लीटर किलोमीटर। जितना अधिक, उतना अच्छा। यहाँ मोटरसाइकिल सबसे आगे है।
  2. समान यात्रा के लिए ईंधन। एक दूरी तय कर लीजिए, जैसे 100 किमी, और देखिए किस वाहन को कितने लीटर चाहिए। जितना कम, उतना अच्छा।
  3. प्रति व्यक्ति ईंधन। यह सबसे उचित तुलना है। बस केवल 5 किमी प्रति लीटर देती है, पर वह 50 यात्री ले जाती है। हिसाब लगाइए: 100 किमी के लिए बस को 20 लीटर चाहिए, अर्थात् 20 ÷ 50 = प्रति व्यक्ति 0.4 लीटर। कार को 5.6 लीटर चाहिए और उसमें लगभग 4 लोग बैठते हैं, अर्थात् 5.6 ÷ 4 = प्रति व्यक्ति 1.4 लीटर। अत: बस प्रति व्यक्ति तीन गुने से भी अधिक अच्छी है।
तीसरा तरीका ही सही क्यों है: वाहन स्वयं को ढोने के लिए नहीं बना, वह लोगों को ले जाने के लिए बना है। इसलिए सच्चा प्रश्न यह नहीं कि “प्रति किलोमीटर कितना ईंधन” बल्कि यह है कि “प्रति व्यक्ति प्रति किलोमीटर कितना ईंधन”। इसी कारण भरी हुई बस, साझा ऑटो या मेट्रो रेल, सबके अलग-अलग गाड़ी चलाने की तुलना में कहीं अधिक ईंधन बचाती है।
उचित तुलना कीजिए: एक जैसा काम करने वाले वाहनों की ही तुलना कीजिए, और यह भी याद रखिए कि माइलेज बोझ, सड़क, भीड़ और वाहन की देखभाल के अनुसार बदलती रहती है।
प्र6.
अपने घर या कक्षा में चारों ओर देखिए। ऐसी तीन वस्तुओं की सूची बनाइए जो ऊर्जा का उपयोग करती हों और उनके द्वारा उपयोग में लाए जाने वाले ऊर्जा के स्रोत का भी उल्लेख कीजिए। उदाहरण के लिए — वस्तु — पंखा → ऊर्जा स्रोत — विद्युत
उत्तर

पुस्तक की शैली में तीन वस्तुएँ। पहली पुस्तक का अपना उदाहरण है।

वस्तु — पंखा → ऊर्जा स्रोत — विद्युत
वस्तु — गैस चूल्हा → ऊर्जा स्रोत — एल.पी.जी. रसोई गैस (एक ईंधन)
वस्तु — टॉर्च → ऊर्जा स्रोत — उसकी बैटरी में संचित ऊर्जा

यदि आप सूची लंबी करना चाहें तो और भी —

वस्तुऊर्जा स्रोत
ट्यूबलाइट, टेलीविज़न, रेफ्रिजरेटर, मिक्सी, जल का पंपविद्युत
दीपक, लालटेनतेल या मिट्टी का तेल (ईंधन)
मिट्टी का चूल्हालकड़ी (ईंधन)
स्कूटर, कार, विद्यालय की बसपेट्रोल या डीजल (ईंधन)
दीवार घड़ी, टी.वी. का रिमोटसेल — संचित ऊर्जा
साइकिल, रस्सी कूद, क्रिकेट का बल्लाभोजन — उपयोग करने वाले की ऊर्जा
सौर सड़क बत्ती, सौर जल ऊष्मकसूर्य
कपड़े सुखाने का तार, फिरकीसूर्य और पवन
अपनी सूची जाँचने का तरीका: हर वस्तु से दो प्रश्न पूछिए। पहला, “यह क्या कर रही है?” — गति, प्रकाश, ध्वनि, ऊष्मा या शीतलन। दूसरा, “इसे क्या रोक देगा?” — विद्युत कटौती, खाली टंकी, समाप्त सेल, या भूखा व्यक्ति। जो वस्तु उसे रोक सकती है, वही उसका ऊर्जा स्रोत है।
प्र7.
7. सृजन करें और साझा करें — (क) “एक स्वच्छ ऊर्जा घर” की सरल योजना अथवा चित्र बनाइए जो सौर, पवन या किसी अन्य प्रकार की स्वच्छ ऊर्जा स्रोत का उपयोग करता हो।
उत्तर

स्वच्छ ऊर्जा घर तीन काम करता है: वह अपनी स्वच्छ ऊर्जा स्वयं बनाता है, कम से कम ऊर्जा खर्च करता है, और मशीनों के बदले सीधे धूप और हवा का उपयोग करता है।

नमूना उत्तर — मेरा स्वच्छ ऊर्जा घर

1. अपनी स्वच्छ ऊर्जा बनाना

  • छत पर सूर्य की ओर मुख किए सौर पैनल, जो बत्तियों, पंखे और टेलीविज़न के लिए विद्युत बनाएँ।
  • छत पर एक सौर जल ऊष्मक, जिससे गीज़र की आवश्यकता ही न पड़े।
  • आँगन में एक सौर कुकर, जो धूप वाले दिनों में चावल, दाल और सब्ज़ी पकाए।
  • छत पर एक छोटी पवनचक्की, जो हवा वाले दिनों में और विद्युत जोड़ दे।
  • द्वार पर एक सौर सड़क बत्ती, जो दिन भर चार्ज होकर रात में स्वयं जल उठे।

2. कम खर्च करना

  • सब जगह एल.ई.डी. बल्ब — प्रकाश उतना ही, विद्युत बहुत कम।
  • बड़ी खिड़कियाँ और छत का रोशनदान, जिससे दिन में बल्ब जलाने की आवश्यकता ही न हो।
  • आँगन में कपड़े सुखाने का तार, जिससे सुखाने का काम सूर्य और हवा करें।
  • स्विच वहाँ लगे हों जहाँ बच्चों का हाथ पहुँचे, ताकि बत्तियाँ सचमुच बंद हो सकें।

3. बिना मशीनों के घर को आरामदायक रखना

  • मोटी दीवारें और छायादार बरामदा, जिससे कमरे गर्मी में ठंडे और सर्दी में गर्म रहें — जैसे भारत के परंपरागत घर बनते थे।
  • आमने-सामने की दीवारों में खिड़कियाँ, जिससे हवा आर-पार बहती रहे।
  • धूप वाली ओर छाया के लिए वृक्ष और बीच में प्रकाश तथा हवा के लिए आँगन। वास्तुशास्त्र सदा यही परामर्श देता आया है — कमरों, द्वारों और खिड़कियों को इस प्रकार रखना कि धूप, पवन और ऊष्मा का सर्वोत्तम उपयोग हो सके।
  • छत से टंकी तक वर्षा जल की नली, जिससे पंप कम चलाना पड़े।
सूर्य सौर पैनल आमने-सामने की खिड़कियाँ हवा को आर-पार जाने देती हैं पवनचक्की धूप में सूखते कपड़े छायादार वृक्ष
सरल योजना — छत पर पैनल, घर के पास पवनचक्की, आमने-सामने खिड़कियाँ, कपड़ों का तार और छायादार वृक्ष।
चित्र अच्छा कैसे बनाएँ: घर का एक बड़ा और सरल बगल से दिखने वाला चित्र बनाइए। फिर हर भाग पर तीर लगाकर नाम लिखिए — “सौर पैनल”, “सौर जल ऊष्मक”, “एल.ई.डी. बल्ब”, “कपड़ों का तार”, “छायादार वृक्ष”, “हवा के लिए खिड़की”। सुंदर चित्र से कहीं अधिक महत्वपूर्ण साफ़-साफ़ नाम लिखना है। नीचे एक पंक्ति में लिखिए कि आपका घर क्या-क्या बचाता है।
प्र8.
7. सृजन करें और साझा करें — (ख) एक दिन के लिए “मेरी ऊर्जा दैनंदिनी” बनाइए, अभिलेखित कीजिए कि आपने विद्युत, ईंधन आदि का उपयोग कितनी बार किया है।
उत्तर

ऊर्जा दैनंदिनी एक दिन में की गई हर ऊर्जा-उपयोग की सूची है। एक छोटी कॉपी साथ रखिए और हर बार एक पंक्ति लिखते जाइए। दिन के अंत में गिनती कीजिए।

इसे कैसे बनाएँ:

  1. कॉपी में तीन स्तंभ बनाइए: समय, मैंने क्या किया, ऊर्जा स्रोत
  2. जब भी आप कुछ चालू करें, किसी वाहन में बैठें या कुछ खाएँ — एक पंक्ति लिख दीजिए।
  3. दिन के अंत में गिनिए कि किस स्रोत का कितनी बार उपयोग हुआ।
  4. नीचे एक पंक्ति लिखिए: कल मैं क्या बदलूँगा?

नमूना उत्तर — मेरी ऊर्जा दैनंदिनी, सोमवार

समयमैंने क्या कियाऊर्जा स्रोत
प्रात: 6:30अपने कमरे की बत्ती जलाईविद्युत
प्रात: 6:45चूल्हे पर गर्म किए जल से स्नानईंधन — रसोई गैस
प्रात: 7:15पराँठा खाया और दूध पियाभोजन
प्रात: 7:40पैदल विद्यालय गयाभोजन
प्रात: 8:00कक्षा में पूरे दिन पंखा और बत्तियाँ चलींविद्युत
दोपहर 1:30विद्यालय की बस से घर आयाईंधन — डीजल
दोपहर 2:00गैस चूल्हे पर बना भोजन खायाईंधन — रसोई गैस
सायं 4:00मैदान में क्रिकेट खेलाभोजन
सायं 5:30तार से सूखे हुए कपड़े उतारेसूर्य और पवन
सायं 6:30ट्यूबलाइट और पंखे के नीचे गृहकार्यविद्युत
रात्रि 8:00आधा घंटा टेलीविज़न देखाविद्युत
रात्रि 9:00फ़ोन चार्ज कियाविद्युत

दिन भर की मेरी गिनती

ऊर्जा स्रोतकितनी बार
विद्युत6
ईंधन (गैस, डीजल)3
भोजन3
सूर्य और पवन1
कुलएक दिन में 13 बार

मैंने क्या सीखा और क्या बदलूँगा: सबसे अधिक उपयोग विद्युत का हुआ — तेरह में से छह बार। इनमें से दो बार तो आवश्यकता ही नहीं थी: कमरे से निकलने के बाद भी पंखा चलता रहा, और दोपहर में भरपूर उजाला होने पर भी ट्यूबलाइट जलती रही। कल से मैं कमरे से निकलते समय स्विच बंद करूँगा और बत्ती के बदले परदे खोलूँगा। और अधिक से अधिक स्थानों पर पैदल जाने का प्रयास करूँगा, क्योंकि पैदल चलना भोजन से चलता है और उससे बिल्कुल धुआँ नहीं निकलता।

दैनंदिनी क्यों काम करती है: अधिकांश ऊर्जा जान-बूझकर नहीं, ध्यान न देने के कारण बर्बाद होती है। लिखने से ध्यान जाना अनिवार्य हो जाता है। जब गिनती कागज़ पर सामने दिख जाती है तब यह भी स्पष्ट दिख जाता है कि कौन-सी दो-तीन आदतें बदलनी हैं — और बचत यहीं से आरंभ होती है।
क्या यह उपयोगी रहा?