कक्षा ५ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 8 वस्त्र — वस्तुएँ कैसे निर्मित होती हैं? के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-19
इस अध्याय के बारे में
बुनाई का अर्थ है धागों के दो समूहों को एक-दूसरे के ऊपर और नीचे से पार करना। एक समूह एक दिशा में बिछाया जाता है। दूसरा समूह उसके आर-पार जाता है। हर पट्टी पहले ऊपर, फिर नीचे, फिर ऊपर, फिर नीचे जाती है। ऐसा बार-बार करने से पट्टियाँ आपस में फँस जाती हैं और एक ही चादर बन जाती है। यह चादर चटाई भी हो सकती है, टोकरी भी और कपड़ा भी। पृष्ठ 133 का चित्र देखिए — नीली और पीली कागज की पट्टियों से इसी तरह चटाई बनती है। मनुष्य से पहले एक पक्षी बुनाई करता था। नर बया घास से लटकने वाला घोंसला बनाता है। वह तंतुओं को ऊपर-नीचे से बुनता है ताकि घोंसला मजबूत बने। घोंसला थैली जैसा होता है और टहनी से लटका रहता है। कुशल बया बहुत सुंदर और महीन घोंसला बुनता है, जबकि सीखने वाले बच्चे ऊबड़-खाबड़ घोंसला बनाते हैं। अर्थात् पक्षी के लिए भी बुनाई एक कौशल है, जो अभ्यास से आता है। लोग बहुत लंबे समय से प्राकृतिक सामग्रियाँ बुन
त्वरित पुनरावृत्ति
| शब्द | इसका अर्थ | पाठ में कहाँ | रोज़मर्रा का उदाहरण |
|---|---|---|---|
| बुनाई | पट्टियों या धागों के दो समूहों को ऊपर-नीचे से पार करके एक चादर बनाना | धागों से बने प्रतिरूप, पृष्ठ 132 | चटाई, बेंत की टोकरी, आपकी कमीज |
| कपड़ा / वस्त्र | धागों को बुनने पर बनने वाली चादर | धागों से बने प्रतिरूप, पृष्ठ 132 | साड़ी, चादर, विद्यालय की पोशाक |
| करघा | वह ढाँचा जिस पर धागों को पकड़कर बुनाई की जाती है | बुनाई की परंपराएँ, पृष्ठ 134 | गाँव के बुनकर का करघा |
| हथकरघा | करघे पर हाथ से बुना गया कपड़ा, मशीन से नहीं | बुनाई की परंपराएँ, पृष्ठ 134 | खादी का कुर्ता, कांजीवरम साड़ी |
| कपड़ा मिल | वह कारखाना जो बड़ी मशीनों से सूत कातता और कपड़ा बुनता है | पृष्ठ 135 | दुकान में मीटर से बिकने वाला मिल का कपड़ा |
| धागा या सूत | रेशों को बल देकर बनाया गया लंबा और मजबूत तंतु | धागा, पृष्ठ 135 | दर्जी की दुकान में धागे की रील |
| रेशा / तंतु | धागे को खोलने पर मिलने वाला पतला, बाल जैसा धागा | पृष्ठ 136 | रूई से खींचा हुआ एक महीन बाल |
| कताई | रेशों को आपस में बल देकर धागा बनाने की प्रक्रिया | पृष्ठ 136 | चरखे पर सूत कातती दादी |
| चरखा | वह पहिया जो कपास से सूत कातने में सहायता करता है | पृष्ठ 136 | पृष्ठ 131 के चित्र में दिख रहा चरखा |
| खादी | हाथ से काते और हाथ से बुने कपड़े; स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक | क्या आप जानते हैं?, पृष्ठ 136 | खादी का झोला या कुर्ता |
| प्राकृतिक रेशा | पेड़-पौधे या जंतु से मिलने वाला रेशा | प्राकृतिक रेशे, पृष्ठ 136 | कपास, ऊन, रेशम, लिनन, बाँस, जूट |
| कृत्रिम रेशा | मनुष्य द्वारा कृत्रिम सामग्रियों से बनाया गया रेशा | कृत्रिम रेशे, पृष्ठ 137 | नायलॉन की रस्सी, पॉलिस्टर की कमीज |
| कृमिकोष (कोकून) | रेशम का वह खोल जो लार्वा अपने चारों ओर बुन लेता है | पृष्ठ 136 | गर्म पानी में डालकर धागा निकाले जाने वाले कोकून |
| जीवन-चक्र | जन्म से लेकर वृद्धि और परिवर्तन का वह क्रम जिससे हर जीव गुजरता है | रेशमकीट का जीवन-चक्र, पृष्ठ 137 | अंडा → लार्वा → कोकून → वयस्क कीट |
| कच्चा टाँका | सीधी रेखा में ऊपर-नीचे चलने वाला सरल टाँका | गतिविधि 7, पृष्ठ 140 | दो टुकड़ों को जोड़ने के लिए लगाया गया टाँका |
| कढ़ाई | कपड़े को सजाने के लिए लगाए जाने वाले टाँके | सिलाई करें और सजाएँ, पृष्ठ 141 | दुपट्टे पर फुलकारी, कुर्ते पर चिकनकारी |
| बांधनी | रँगाई की वह विधि जिसमें कपड़े के छोटे भाग बाँधकर रँगे जाते हैं | पृष्ठ 141 का हाशिया | गुजरात की लाल-सफेद बांधनी ओढ़नी |
| पुनर्चक्रण | पुरानी वस्तु से कुछ नया बनाकर उसे फिर से उपयोग में लाना | पुनर्चक्रण, पृष्ठ 142 | पुराने कपड़ों के टुकड़ों से बनी रजाई |
अभ्यास
- पाठ्य प्रश्न
- चर्चा कीजिए
- गतिविधि 1
- विचार कीजिए
- गतिविधि 2
- गतिविधि 3
- गतिविधि 4
- गतिविधि 5
- गतिविधि 6
- विचार कीजिए
- गतिविधि 7
- गतिविधि 8
- पाठ्य प्रश्न
- प्रदर्शनी
- आइए विचार करें