प्र1.
आपने बहुत-सी अद्भुत सामग्रियाँ बनाई हैं। आपके द्वारा बनाई गई चटाई, कपड़ों के टुकड़ों को जोड़कर बनाई गई वस्तुओं और पत्तों से बनी चम्मच, पत्तल, दौने आदि की एक प्रदर्शनी लगाइए। नाम पट्टियों और छोटे विवरण पत्र लगाकर बताइए कि आपने इन्हें कैसे बनाया। अपने अन्य सहपाठियों या माता-पिता को भी इसे देखने के लिए आमंत्रित कीजिए।
उत्तर
प्रदर्शनी केवल वस्तुएँ सजाकर रख देना नहीं है। यह दूसरों को यह बताने का तरीका है कि वह वस्तु कैसे बनी। इसलिए नाम-पट्टी और छोटा विवरण-पत्र उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितनी वस्तु स्वयं।
प्रदर्शनी कैसे लगाएँ:
- एक दिन और एक स्थान तय कीजिए — कक्षा का कोई कोना, दो मेजें मिलाकर, या बरामदा।
- कक्षा ने जो कुछ बनाया है, सब इकट्ठा कीजिए: गतिविधि 1 की कागज की चटाइयाँ, गतिविधि 3 में पेंसिल पर लिपटा सूत, गतिविधि 5 की पत्तल और दोने, तथा गतिविधि 8 के जुड़े हुए कपड़े।
- वस्तुओं को विषय के अनुसार समूहों में रखिए — बुनाई का कोना, धागा का कोना, सिलाई का कोना और पत्ता-शिल्प का कोना।
- हर वस्तु के लिए नाम-पट्टी लिखिए: वस्तु का नाम, किसने बनाई, और किस सामग्री से बनी।
- हर कोने के लिए चार-पाँच पंक्तियों का विवरण-पत्र लिखिए कि वहाँ की वस्तुएँ कैसे बनीं।
- निमंत्रण-पत्र बनाकर दूसरी कक्षाओं और अपने माता-पिता को दीजिए।
- तय कीजिए कि किस कोने पर कौन खड़ा होकर समझाएगा। बारी-बारी से खड़े होइए, ताकि सबको बाकी प्रदर्शनी भी देखने को मिले।
- द्वार पर एक कॉपी रखिए, जिसमें आने वाले एक पंक्ति लिख सकें कि उन्हें क्या अच्छा लगा।
नमूना नाम-पट्टी और विवरण:
| पट्टी पर | हमने क्या लिखा |
|---|---|
| वस्तु का नाम | कागज की बुनी हुई चटाई |
| किसने बनाई | मीना और अर्जुन, कक्षा 5-ब |
| किससे बनी | नीले कागज की छह पट्टियाँ और पीले कागज की छह पट्टियाँ |
| कैसे बनाई | हमने नीली पट्टियों को ऊपर से टेप से चिपका दिया ताकि वे हिल न सकें। फिर हर पीली पट्टी को एक नीली पट्टी के ऊपर से और अगली के नीचे से आर-पार निकाला। हर नई पट्टी ऊपर वाली से उल्टे क्रम में शुरू की। इसी से खानों वाला प्रतिरूप बना। कहीं गोंद नहीं लगाया — पट्टियाँ एक-दूसरे को ही थामे हुए हैं। |
| हमने क्या सीखा | कपड़ा भी ठीक इसी तरह बनता है, बस कागज की पट्टियों के स्थान पर धागे होते हैं। |
समझाना ही सबसे महत्वपूर्ण भाग क्यों है: चटाई तो कोई भी देख सकता है। पर यह केवल बनाने वाला ही बता सकता है कि पट्टियाँ बिखरती क्यों नहीं। जब आप अपने काम को किसी आगंतुक को समझाते हैं, तब पता चलता है कि आपने वास्तव में कितना समझा है — और यही पूरे अध्याय की असली परीक्षा है।
एक अच्छा सुझाव: अपनी प्रदर्शनी में किसी स्थानीय बुनकर, दर्जी या टोकरी बनाने वाले को बुलाइए। उनसे कहिए कि वे अपना एक औजार साथ लाएँ और उसका उपयोग दिखाएँ। उनका काम उसी का बड़ा रूप है जो आपने इस सप्ताह किया है, और वे आपको ऐसी बातें बताएँगे जो किसी पुस्तक में नहीं हैं।