हाँ। अधिकतर भारतीय घरों में पुराना कपड़ा यों ही फेंका नहीं जाता — उससे कुछ और बना लिया जाता है।
नमूना उत्तर: “हाँ, हमने किया है। माँ की पुरानी सूती साड़ी से दो चीजें बनीं। उसके अच्छे भाग को काटकर मेरी छोटी बहन के लिए गुदड़ी बनाई गई — पुराने कपड़ों की तीन तहें लंबे कच्चे टाँकों से जोड़कर। साड़ी का किनारा काटकर उससे एक झोला सिला गया, जिसे हम बाजार ले जाते हैं। मेरी विद्यालय की कमीजें छोटी होने पर काटकर रसोई के सफाई-कपड़े बना दी गईं। पिताजी का फटा कुर्ता मोची को दिया, जिसने उसका एक टुकड़ा एक थैले की मरम्मत में अस्तर के रूप में लगाया।”
पुराने कपड़ों का सामान्यतः यों उपयोग होता है —
| कपड़ा पहले क्या था | वह क्या बन जाता है |
|---|---|
| छोटी हो चुकी कमीज या फ्रॉक | छोटे भाई-बहन या पड़ोसी के बच्चे को दे दी जाती है |
| पुरानी साड़ी | रजाई या गुदड़ी, पेटीकोट, कपड़े का थैला, परदा, फर्श की चटाई |
| घिसा हुआ तौलिया या चादर | रसोई के कपड़े, डस्टर, फर्श पोंछने का कपड़ा |
| दर्जी की दुकान के छोटे टुकड़े | रजाई के चौकोर टुकड़े, कोस्टर, गुड़िया के कपड़े, पाउच, गद्दी की भराई |
| पुराना ऊनी स्वेटर | ऊन खोलकर फिर से मोजे, टोपी या दस्ताने बुन लिए जाते हैं |
| फटी जींस या मोटा कपड़ा | पेंसिल-पाउच, थैला, दूसरी पतलूनों के घुटनों पर पैबंद |
| बहुत घिसा हुआ कपड़ा | सफाई के चीथड़े, पोंछा, श्यामपट का डस्टर |