प्र1.
क्या आपने घर पर अथवा किसी अन्य स्थान पर प्राकृतिक सामग्रियों से बुनी हुई वस्तुएँ देखी हैं? वे कौन-सी वस्तुएँ हैं?
उत्तर
हाँ। भारतीय घर की अनेक वस्तुएँ प्राकृतिक सामग्री से बुनी होती हैं — चटाई, टोकरी, रस्सी, खाट, पंखा, झाड़ू और सूप।
आपने जो वस्तुएँ सचमुच देखी हैं, उन्हीं की चर्चा कीजिए। नीचे दी गई सूची सहायता करेगी।
| बुनी हुई वस्तु | किससे बुनी जाती है | कहाँ दिखती है |
|---|---|---|
| चटाई | ताड़ या खजूर का पत्ता, मदुर घास, सरकंडा | बैठने या सोने के लिए फर्श पर बिछी हुई |
| टोकरी | बाँस की पट्टियाँ, बेंत, ताड़ का पत्ता | रसोई में, बाजार में, खेत पर |
| खाट या चारपाई | नारियल की जटा की रस्सी, जूट की रस्सी, निवाड़ | आँगन में बुनी हुई खाट |
| पायदान | नारियल का रेशा (कॉयर) | घर के दरवाजे पर |
| हाथ का पंखा | ताड़ का पत्ता, बाँस | गर्मी की दोपहर में |
| सूप | बाँस, बेंत | चावल, गेहूँ और दाल फटकने के लिए |
| जूट का थैला, बोरी | जूट | अनाज और सब्जी ढोने के लिए |
| कपड़ा — साड़ी, गमछा, तौलिया, पोशाक | कपास, रेशम, ऊन | वह सब जो हम पहनते हैं |
पृष्ठ 133 पर गतिविधि 1 के साथ छपे चित्रों में ऐसी ही चार वस्तुएँ दिखाई गई हैं — ताड़ की पट्टियों से बुनी तीन टोकरियाँ, हरे-पीले रंग की हत्थेदार छोटी टोकरी, एक चपटी बुनी हुई वस्तु और हथेली पर रखी हरे पत्ते से बुनी एक गोल वस्तु।
इन सबमें एक बात समान है: इनमें से कोई भी वस्तु एक बड़ी चादर काटकर नहीं बनी। हर वस्तु पतली पट्टियों से बनी है जो एक-दूसरे के ऊपर और नीचे से निकलती हैं। इसीलिए ये मजबूत भी हैं और आसानी से मुड़ भी जाती हैं — क्योंकि पट्टियाँ एक-दूसरे को अपनी जगह पर थामे रखती हैं।
चर्चा के लिए: एक-दूसरे से पूछिए, “इनमें से कौन-सी वस्तु हमारे ही गाँव या नगर में बनती है, और कौन बनाता है?” कई स्थानों पर एक ही परिवार या समुदाय पीढ़ियों से वह वस्तु बनाता आ रहा है और उस सामग्री को सबसे अच्छी तरह जानता है।