कक्षा ५ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 8 गतिविधि 1 के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
1. नीले कागज की 5–6 पट्टियाँ लीजिए और उन्हें ऊपर की ओर से किसी सतह पर टेप से चिपका दीजिए। 2. पीले कागज की पट्टियों का एक और समूह (सेट) लें और उन्हें नीली पट्टियों के ऊपर-नीचे से क्रमश: निकालकर बुनें। 3. यह क्रम तब तक दोहराइए जब तक आपकी चटाई पूरी न हो जाए।
उत्तर

आपको क्या मिलेगा: नीले-पीले खानों वाली एक चपटी चटाई, ठीक वैसी जैसी पृष्ठ 133 के अंतिम चित्र में है। पट्टियाँ कहीं भी आपस में चिपकाई नहीं गईं — फिर भी चटाई उठाने पर वह बिखरती नहीं, एक साथ उठ आती है।

इसे कैसे करें:

  1. नीले कागज की 5 या 6 पट्टियाँ काटिए। सबकी चौड़ाई लगभग 2 सेमी और लंबाई लगभग 20 सेमी रखिए।
  2. उन्हें मेज पर ऊपर से नीचे की ओर, थोड़ी-थोड़ी दूरी पर, अगल-बगल बिछा दीजिए।
  3. ऊपर के सिरों पर टेप की एक पट्टी चिपका दीजिए, ताकि वे हिल न सकें।
  4. उतनी ही पीली पट्टियाँ, उसी चौड़ाई की, काट लीजिए।
  5. पहली पीली पट्टी लीजिए। उसे नीली पट्टी 1 के ऊपर से, पट्टी 2 के नीचे से, पट्टी 3 के ऊपर से, पट्टी 4 के नीचे से निकालिए। इसे टेप तक ऊपर खिसका दीजिए।
  6. दूसरी पीली पट्टी उल्टे क्रम से शुरू कीजिए — पट्टी 1 के नीचे से, पट्टी 2 के ऊपर से, पट्टी 3 के नीचे से। इसे पहली पट्टी से सटा दीजिए।
  7. हर बार क्रम बदलते हुए यही दोहराइए, जब तक सब पीली पट्टियाँ लग न जाएँ। किनारों पर बचे सिरों को टेप से चिपका दीजिए।
टेप नीली पट्टियाँ स्थिर रहती हैं पीली पट्टियाँ आर-पार बुनी जाती हैं
जहाँ नीला खाना दिखता है वहाँ नीली पट्टी ऊपर है, जहाँ पीला दिखता है वहाँ पीली पट्टी ऊपर है — ऊपर, नीचे, ऊपर, नीचे।
चटाई बिखरती क्यों नहीं: हर पीली पट्टी फँसी हुई है — एक नीली पट्टी उसे नीचे दबाए है और अगली उसे ऊपर उठाए है। नीली पट्टियाँ भी इसी तरह फँसी हैं। कोई भी पट्टी दूसरी पट्टियों को हटाए बिना बाहर नहीं निकल सकती। पुस्तक के शब्दों में — धागों को सावधानी से एक-दूसरे के ऊपर और नीचे से पार करने पर एक जुड़ी या बुनी संरचना तैयार होती है।
प्रतिरूप सही रखने के लिए: यदि दो पीली पट्टियाँ एक ही तरह से आरंभ हो जाएँ तो खाने नहीं, धारियाँ बन जाएँगी। इसलिए नियम याद रखिए — हर नई पट्टी ऊपर वाली पट्टी से उल्टे क्रम में आरंभ होगी।
प्र2.
4. क्या आप इस विधि का उपयोग टोकरी बनाने के लिए कर सकते हैं?
उत्तर

हाँ, कर सकते हैं। टोकरी वही बुनी हुई चटाई है जिसके किनारे मोड़कर ऊपर उठा दिए गए हों और उन्हें आपस में बुन दिया गया हो। बुनाई ठीक वैसी ही रहती है — ऊपर, नीचे, ऊपर, नीचे।

चटाई को टोकरी में कैसे बदलें:

  1. गतिविधि 1 की तरह चटाई बुनिए, पर पट्टियों के सिरे लंबे छोड़ दीजिए — काटिए मत।
  2. चटाई के बीच में कोई छोटा डिब्बा या कटोरी उल्टी रख दीजिए। यही आपका आकार बनेगा।
  3. सब पट्टियों को डिब्बे के किनारों के साथ ऊपर की ओर मोड़ दीजिए। अब वे बाड़ की तरह खड़ी हो जाएँगी।
  4. एक नई लंबी पट्टी लीजिए। उसे खड़ी पट्टियों के चारों ओर घुमाइए — एक के ऊपर से, अगली के नीचे से।
  5. इसी तरह और पट्टियाँ एक के ऊपर एक लगाते जाइए, जब तक दीवार मनचाही ऊँचाई की न हो जाए।
  6. ऊपर बचे सिरों को अंदर की ओर मोड़कर बुनाई में खोंस दीजिए या चिपका दीजिए, जिससे किनारा साफ बने।
  7. डिब्बा बाहर निकाल लीजिए। टोकरी अपना आकार बनाए रखेगी।
यह क्यों काम करता है: चटाई और टोकरी दोनों एक ही विधि से बनती हैं। अंतर बस इतना है कि टोकरी में पट्टियाँ चपटी नहीं रहतीं — वे मुड़कर ऊपर चली जाती हैं। बाँस की तोकरी, बेंत की टोकरी और पृष्ठ 133 के चित्र में दिखी ताड़ के पत्ते की टोकरियाँ ठीक इसी प्रकार बनती हैं।
यह कीजिए: दो रंगों की पट्टियाँ लीजिए और टोकरी की दीवार पर भी ऊपर-नीचे का क्रम ठीक रखिए। तब टोकरी के चारों ओर खानों वाला प्रतिरूप बनेगा, ठीक पुस्तक के चित्र की हरी-पीली टोकरी जैसा।
प्र3.
कागज के अतिरिक्त अन्य सामग्रियों, जैसे— तारों, रस्सियों, रिबनों या सरकंडों का उपयोग करने का प्रयास कीजिए।
उत्तर

इनमें से हर सामग्री बुनी जा सकती है, और हर एक से अलग तरह की चटाई बनती है। विधि कभी नहीं बदलती — एक समूह स्थिर रहता है, दूसरा ऊपर-नीचे से निकलता है।

धागे या रस्सी से कैसे बुनें:

  1. लकड़ी का एक छोटा फ्रेम लीजिए, या जूते के डिब्बे के ढक्कन के दोनों छोटे किनारों पर खाँचे काट लीजिए।
  2. एक मजबूत धागे को खाँचे से खाँचे तक बार-बार लपेटकर स्थिर धागों का समूह बना लीजिए। धागा कसा हुआ रखिए।
  3. अब दूसरे रंग का ऊन या रिबन लीजिए।
  4. उसे एक धागे के ऊपर से और अगले के नीचे से, पूरे आर-पार निकालिए।
  5. वापस आते समय उल्टे क्रम से आरंभ कीजिए।
  6. हर पंक्ति को पिछली पंक्ति से सटाकर दबा दीजिए। फ्रेम भर जाने तक यही करते जाइए।
  7. पीछे से धागे काटकर जोड़े-जोड़े में गाँठ बाँध दीजिए। आपकी छोटी बुनी चटाई या कोस्टर तैयार है।
सामग्रीवह कैसा व्यवहार करती हैकिसके लिए अच्छी है
कागज की पट्टियाँकड़ी, पकड़ने में आसान, जोर से खींचने पर फट जाती हैअभ्यास की चटाई, शुभकामना कार्ड
ऊन या सूती धागानरम और लचीला, कसने के लिए फ्रेम चाहिएकोस्टर, छोटा गलीचा, दीवार पर टाँगने की वस्तु
रस्सी या जटामोटी और खुरदरी, बहुत मजबूतपायदान, स्टूल की बैठक
रिबनचिकना और चमकदार, फिसलता हैसुंदर बुकमार्क, सजावट
सरकंडा, ताड़ का पत्ता, घासताजा हो तो अच्छी तरह मुड़ता है, सूखने पर कड़ा हो जाता हैचटाई, टोकरी, पंखा
सामग्री बदलने से क्या सीखते हैं: प्रतिरूप वही रहता है, पर चटाई पूरी तरह बदल जाती है। रस्सी की चटाई खुरदरी होती है और उस पर चला जा सकता है। ऊन की चटाई नरम और गर्म होती है। इसलिए बुनकर सामग्री चुनते समय एक ही प्रश्न पूछता है — यह कपड़ा किस काम आएगा?
सुझाव: रिबन जैसी फिसलने वाली सामग्री बार-बार बाहर निकल आती है। उसके दोनों सिरों को टेप से चिपकाइए या फ्रेम का उपयोग कीजिए, और हर पंक्ति को पिछली पंक्ति से कसकर सटाइए।
क्या यह उपयोगी रहा?