प्र1.
आप अपनी कक्षा में ऐसी कौन-सी वस्तुएँ देखते हैं जिन्हें बुनकर तैयार किया गया है? यदि हम कागज की पट्टियों के स्थान पर धागों से बुनाई करें तो वह कपड़ा बन जाता है।
उत्तर
कक्षा में बहुत-सी वस्तुएँ बुनी हुई हैं — और सबसे बड़ी वस्तु वह है जो सब पहने हुए हैं। कक्षा की हर पोशाक बुना हुआ कपड़ा है।
| कक्षा की बुनी हुई वस्तु | कैसे पहचानें कि यह बुनी हुई है |
|---|---|
| हमारी पोशाक — कमीज, कुर्ता, सलवार, दुपट्टा, मोजे | किनारे को पास से देखिए, छोटे-छोटे धागे आर-पार जाते दिखेंगे |
| बस्ता और उसकी पट्टियाँ | पट्टी एक बुना हुआ फीता है, उस पर ताना-बाना साफ दिखता है |
| बैठने की चटाई या दरी | घास की चौड़ी पट्टियाँ या मोटे सूती धागे आर-पार जाते हुए |
| डस्टर या सफाई का कपड़ा | धागे आर-पार, और फटे किनारे पर ढीले धागे लटकते हुए |
| कुर्सी की बेंत या प्लास्टिक की बैठक | पट्टियाँ स्पष्ट रूप से ऊपर-नीचे से निकलती हुई |
| परदा और खिड़की का चिक | धागे या पतली पट्टियाँ अगल-बगल बुनी हुई |
| कोने में रखा जूट का थैला या बोरी | जूट के धागे इतने मोटे कि बिना काँच के भी दिख जाते हैं |
| घंटी की रस्सी, तिरंगा | रस्सी बटी और बुनी होती है; झंडा बुना हुआ कपड़ा है |
एक वाक्य में विचार: कपड़ा और कुछ नहीं, कागज की पट्टियों के स्थान पर धागों से की गई बुनाई है। धागे इतने पतले होते हैं कि दूर से कपड़ा एक चिकनी चादर जैसा लगता है। पास जाइए तो वही ऊपर-नीचे वाला प्रतिरूप मिलेगा — वही जो बया पक्षी उपयोग करता है और वही जो आपने गतिविधि 1 में किया।
अनुमान नहीं, देखिए: कक्षा की कुछ वस्तुएँ बुनी हुई नहीं होतीं — प्लास्टिक की शीट, रबड़ की चटाई, कागज का चार्ट। यदि पास से देखने पर भी कोई धागे आर-पार जाते न दिखें तो वह वस्तु प्रायः बुनी हुई नहीं है। यह एक अच्छी जाँच है।