कक्षा ५ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 8 गतिविधि 3 के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन2026-09-19
प्र1.
• रूई का एक गोला लें और उससे धीरे से खींचकर एक रेशा बना लीजिए। • अब अपनी उँगलियों से रेशे को धीरे-धीरे बाँटने का प्रयास कीजिए। ध्यान दीजिए कि जैसे-जैसे आप इसे बाँटते हैं, यह सुदृढ़ होता जाता है। • एक पेंसिल लीजिए। अब रूई के रेशे या तंतु को पेंसिल पर लपेटिए और रूई के गोले से अधिकाधिक रूई खींचकर इसकी लंबाई बढ़ाइए।
उत्तर
आप क्या देखेंगे: रूई खींचने पर एक ढीला, फूला हुआ रेशा निकलता है जो जरा-सा खींचते ही टूट जाता है। पर जैसे-जैसे आप उसे उँगलियों से बाँटते (बल देते) हैं, वह पतला, कसा हुआ और कहीं अधिक मजबूत होता जाता है। कुछ देर में उससे रूई का गोला भी लटकाया जा सकता है और वह टूटता नहीं। आपने धागा बना लिया।
इसे कैसे करें:
साफ रूई का एक छोटा गोला लीजिए। उसे धीरे-धीरे खींचकर ढीला कर लीजिए।
गोला बाएँ हाथ में पकड़िए। दाएँ हाथ से कुछ रेशे पकड़कर धीरे से खींचिए। एक नरम, पतला रेशा निकल आएगा — झटका मत दीजिए, वरना टूट जाएगा।
अब उस रेशे को अंगूठे और उँगली के बीच एक ही दिशा में लगातार घुमाइए। यही बल देना है।
थोड़ा खींचिए, थोड़ा बल दीजिए — बार-बार। रेशा लंबा और मजबूत होता जाएगा।
खुले सिरे को पेंसिल से बाँध दीजिए। पेंसिल घुमाइए ताकि बल बना रहे, और धागा पेंसिल पर लिपटता जाए।
जब धागा पतला होने लगे तो गोले से कुछ और रेशे खींचकर उसी में मिला दीजिए। नए रेशे पुराने रेशों से जुड़ जाएँगे।
अवस्था
वह कैसी दिखती है
कितनी मजबूत है
रूई का गोला
एक नरम सफेद बादल
छूते ही बिखर जाता है
खींचा हुआ, बिना बल का रेशा
मोटा और फूला हुआ
जरा-सा खींचने पर टूट जाता है
थोड़ा बल दिया हुआ
पतला, थोड़ा चमकीला
जुड़ा रहता है, पर टूट भी जाता है
अच्छी तरह बल दिया हुआ
पतला, कसा और एक-सा
मजबूत — रूई के गोले का भार सँभाल लेता है
बल देने से मजबूती क्यों आती है: कपास का हर रेशा बहुत छोटा और बहुत पतला होता है, इसलिए अकेला रेशा कुछ नहीं थाम सकता। बल देने पर रेशे एक-दूसरे के चारों ओर लिपटकर पकड़ बना लेते हैं। अब खिंचाव किसी एक रेशे पर नहीं पड़ता — सब मिलकर उसे बाँट लेते हैं। पुस्तक इसी को नाम देती है: सूती रेशों को एक साथ लपेटकर धागा या सूत बनाने की प्रक्रिया को कताई कहते हैं। आपकी पेंसिल ठीक वही काम कर रही है जो चरखा करता है।
पूरी यात्रा — कपास के पौधे से आपकी कमीज तक:
कपास की यात्रा — पौधे से लेकर हमारे पहने हुए वस्त्रों तक।
क्या आप जानते हैं? कपास उगाकर उससे वस्त्र बनाने वाला भारत विश्व का पहला देश था। गांधी जी प्रतिदिन स्वयं चरखे पर सूत कातते थे। इस प्रकार हाथ से काते और बुने कपड़े को खादी कहते हैं, जो स्वतंत्रता संग्राम और आत्मनिर्भर बनने का प्रतीक बन गया।