कक्षा ५ हमारा अद्भुत संसार अध्याय 8 विचार कीजिए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
1. क्या आपने कभी घर पर या आस-पड़ोस में किसी को सिलाई करते देखा है? वे क्या बना रहे थे या क्या सिल रहे थे?
उत्तर

हाँ। हमारे आस-पास हर समय सिलाई होती रहती है — घर पर, दर्जी की दुकान पर, मोची के ठेले पर और हर फटे बस्ते की मरम्मत में।

नमूना उत्तर: “हाँ, मैंने देखा है। मेरी दादी दोपहर में खिड़की के पास बैठकर सिलाई करती हैं। पिछले सप्ताह उन्होंने मेरी विद्यालय-कमीज पर दो बटन लगाए और भाई के पतलून के घुटने के अंदर एक पैबंद लगाया। हमारे बस-अड्डे के पास एक दर्जी की दुकान भी है। दर्जी मशीन पर बैठकर हाथ से पहिया घुमाता है और कपड़ा सुई के नीचे सरकता जाता है। मैंने उसे ब्लाउज सिलते और एक ढीली हो गई कमीज को छोटा करते देखा है।”

कौन सिलाई कर रहा थाकिन औजारों सेक्या बना या ठीक कर रहा था
घर पर माँ या दादीसुई और धागाबटन, उधड़ी मोहरी, ढीली जेब, पुरानी साड़ी से बना थैला
दर्जीसिलाई मशीन, कैंची, इंच-टेप, खड़ियाकमीज, कुर्ता, ब्लाउज, सलवार-कमीज, विद्यालय की पोशाक; पतलून छोटी करना
मोचीमोटी मुड़ी हुई सुई और मजबूत मोम लगा धागाचप्पल का टूटा फीता, जूते की सिलाई, चमड़े के थैले का हत्था
कढ़ाई करती महिलासुई, रंगीन धागे, घेरा (फ्रेम)दुपट्टे पर फूल, गद्दी का गिलाफ, दीवार पर टाँगने का कपड़ा
रजाई बनाने वालासुई-धागा, पुराने कपड़े के टुकड़ेछोटे-छोटे टुकड़े जोड़कर बनी रजाई या गुदड़ी
बोरी बेचने वाला दुकानदारबड़ी सुई और जूट की डोरीभरी हुई अनाज की बोरी का मुँह बंद करना
इस काम के बारे में ध्यान देने योग्य बात: इनमें से हर व्यक्ति कुशल काम कर रहा है। दर्जी को नाप लेना, काटना और इस तरह जोड़ना आता है कि कपड़ा सचमुच किसी शरीर पर ठीक बैठे। मोची को चमड़े के आर-पार सुई निकालनी पड़ती है। ये ऐसे कार्य हैं जिन्हें सीखने में वर्षों लगते हैं, और इनके बिना किसी गाँव या नगर का काम नहीं चल सकता।
प्र2.
2. अपनी कमीज या बस्ते को देखिए। क्या आप यह पता लगा सकते हैं कि कपड़े के टुकड़ों को कहाँ-कहाँ सिलाई करके जोड़ा गया है?
उत्तर

हाँ — कमीज कपड़े का एक टुकड़ा नहीं होती। वह कई टुकड़ों को टाँकों की पंक्तियों से जोड़कर बनाई जाती है। टाँकों की हर पंक्ति को सिलाई-रेखा कहते हैं। उस पर उँगली फेरिए तो एक छोटी उभरी हुई रेखा महसूस होगी।

कमीज पर कहाँ देखेंवहाँ क्या जोड़ा गया है
बगल से नीचे तक, दोनों ओरआगे का भाग पीछे के भाग से जोड़ा गया है
कंधे पर, बाँह के ऊपरी सिरे परबाँह को धड़ से जोड़ा गया है
हर बाँह के अंदर की ओरबाँह का कपड़ा स्वयं से जोड़कर नली बनाई गई है
गले के चारों ओरकॉलर जोड़ा गया है
आगे के किनारे और नीचे की मोहरी परकपड़ा मोड़कर सिला गया है ताकि किनारा उधड़े नहीं — इसे मोहरी या हेम कहते हैं
हर बटन और काज परछोटे कसे हुए टाँके बटन को पकड़े हैं और काज को घेरे हुए हैं
जेबएक अलग छोटा टुकड़ा तीन ओर से सिला हुआ, ऊपर से खुला
बस्ते पर कहाँ देखेंवहाँ क्या जोड़ा गया है
जहाँ हर पट्टी बस्ते से मिलती हैबार-बार सिलाई — एक चौकोर और उसके भीतर क्रॉस, क्योंकि पूरा भार यहीं पड़ता है
ज़िप के चारों ओरज़िप की पट्टी दोनों ओर कपड़े से सिली गई है
सब कोने और किनारेचपटे टुकड़े जोड़कर डिब्बे जैसा आकार बनाया गया है, प्रायः सिलाई के ऊपर एक मजबूत फीता लगाकर
सामने की जेब, नाम-पट्टी, ऊपर का हत्थाहर एक अलग से सिलकर लगाया गया है
कपड़े को काटकर फिर क्यों जोड़ा जाता है: हमारा शरीर चपटा नहीं होता, पर कपड़ा चपटा होता है। इसलिए दर्जी सही आकार के चपटे टुकड़े काटता है और उन्हें सिलकर जोड़ देता है, जिससे चपटा कपड़ा शरीर पर बैठने वाला आकार ले लेता है। ध्यान दीजिए कि सिलाई कहाँ दोहरी की गई है — बस्ते की पट्टी पर, पतलून की सीट पर, बाँह के जोड़ पर। यही वे स्थान हैं जहाँ सबसे अधिक खिंचाव पड़ता है।
यह कीजिए: कोई पुरानी कमीज उलटकर देखिए। अब हर सिलाई-रेखा साफ दिखेगी और आप गिन सकेंगे कि कमीज बनाने में कपड़े के कितने टुकड़े लगे। अधिकतर कमीजें आठ से दस अलग टुकड़ों से बनती हैं।
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