प्र1.
क्या आप कुछ और उदाहरण सोच सकते हैं जहाँ हम ऊर्जा प्राप्त करने हेतु सूर्य, पवन या बहते हुए जल का उपयोग करते हैं?
उत्तर
हाँ, अनेक। यह सूची उतार लीजिए और अपने गाँव या नगर से और उदाहरण जोड़िए।
| स्रोत | हम उसका उपयोग कैसे करते हैं |
|---|---|
| सूर्य | कपड़े, पापड़, अनाज, मिर्च और आम की फाँकें सुखाना |
| सौर कुकर में भोजन पकाना | |
| छत के सौर जल ऊष्मक में जल गर्म करना | |
| सौर पैनल से विद्युत बनाना — छत पर, सड़क की बत्ती में, विद्यालय में | |
| दिन में कमरों को उजाला करना, जिससे बल्ब जलाना ही न पड़े | |
| पौधों को भोजन बनाने में सहायता, और नमक की क्यारियों में नमक बनाना | |
| पवन | पतंग उड़ाना और कागज़ की फिरकी घुमाना |
| ओसाना — अनाज को हवा में गिराकर हल्का भूसा उड़ा देना | |
| पाल-नौकाओं और मछली पकड़ने वाली नावों का चलना | |
| विद्युत बनाने वाली पवनचक्कियाँ और जल खींचने वाले पवन-पंप | |
| गर्मी में ठंडक देना और तार पर कपड़े जल्दी सुखाना | |
| बहता जल | घराट — पहाड़ी जल-चक्कियाँ जो अनाज पीसती हैं |
| बाँधों के जल-विद्युत केंद्र जो नगरों के लिए विद्युत बनाते हैं | |
| नहर का जल जो स्वयं बहकर खेतों तक पहुँचता है | |
| धारा के साथ बहती नावें और बेड़े |
इन सबमें क्या समान है: इनमें से किसी को भी न प्लग चाहिए, न सिलेंडर, न पेट्रोल की टंकी। सूर्य कल फिर उगेगा, हवा फिर चलेगी और नदी बहती ही रहेगी। ये स्रोत अपने आप लौट आते हैं — इसीलिए ये इतने मूल्यवान हैं।
पृष्ठ 126 का चित्र देखिए। उसमें तीनों एक साथ दिखाए गए हैं — सूखते कपड़े और पकाता सौर कुकर (सूर्य); पाल-नौका, पतंग और हवा में हिलती फ़सल का ढेर (पवन); तथा जल उठाता चक्र और घूमती जल-चक्की (बहता जल)।