इसे वर्ष की एक कहानी की तरह, एक ऋतु से दूसरी ऋतु तक बताइए, और लिखिए कि आपने क्या देखा, सूँघा, खाया और अनुभव किया। अच्छे उत्तर में केवल “गर्मी थी” या “ठंड थी” नहीं होता; उसमें वृक्ष, फल, पक्षी और पर्व के नाम होते हैं।
अच्छे उत्तर में क्या-क्या होना चाहिए —
- प्रत्येक ऋतु का नाम और वह लगभग कब आई।
- उस ऋतु में प्रकृति में देखी गई एक बात।
- आपके अपने जीवन में बदली एक बात — वस्त्र, भोजन, खेल या विद्यालय।
- एक ऐसा क्षण जो आपको स्पष्ट याद है।
नमूना उत्तर
हमारी गर्मी अप्रैल में आरंभ हुई। पंखा दिनभर चलता रहता और शाम को भी सड़क चप्पल के नीचे गरम लगती। हम घड़े का ढेर सारा पानी पीते और लगभग रोज़ आम खाते। हमारी गली के पीछे का तालाब सूखकर दरारों वाली मिट्टी बन गया और कोयल सुबह से दोपहर तक बोलती रहती।
फिर जून के अंतिम सप्ताह की एक दोपहर आकाश कुछ ही मिनटों में गहरा धूसर हो गया और मूसलाधार वर्षा हुई। पूरे वर्ष में मुझे वही पहली वर्षा सबसे अधिक याद है — गीली मिट्टी की गंध, और हम सबका भीगते हुए बाहर खड़े रहना जबकि माँएँ दरवाज़े से पुकारती रहीं। उसके बाद लगभग एक सप्ताह में सब कुछ हरा हो गया। रातभर मेंढक टर्राते। हम गमबूट पहनकर विद्यालय जाते और मेरी कॉपी के कोने गीले ही रहते।
अक्तूबर तक वर्षा रुक गई और आकाश बहुत साफ़ नीला हो गया। दादी ने रज़ाइयाँ छत पर सुखाईं। हमने दीपावली पर रंगोली बनाई। नवंबर में सुबहें कुहासे भरी होने लगीं और मुझे पहली बार स्वेटर पहनना पड़ा।
जनवरी सबसे ठंडी थी। नौ बजे तक कोहरा रहता और विद्यालय जाते समय हाथ सुन्न हो जाते। लोहड़ी पर हमने अलाव जलाया और गजक खाई। फिर फरवरी में विद्यालय के पास वाला सरसों का खेत चमकीला पीला हो गया और आम के पेड़ से मीठी गंध आने लगी। मार्च में हमने होली खेली और उसी महीने के अंत तक मैंने स्वेटर फिर से रख दिया — और पूरा क्रम दोबारा आरंभ होने को तैयार था।