कक्षा ५ हिंदी अध्याय 1 आपकी बातचीत के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
कविता में बालिका, किरन से बात कर रही है। यदि आपको भी नीचे दिए गए विकल्पों में से किसी से बात करने का अवसर मिले तो आप किससे बात करना चाहेंगे? अपने चुने गए विकल्प के सामने सही का चिह्न (✓) लगाइए — वृक्ष, पानी, चाँद, पत्ता, हवा, मिट्टी, तितली, बादल।
उत्तर

यह आपकी अपनी पसंद है। कोई एक गोले में सही का चिह्न (✓) लगाइए। नीचे आठों विकल्पों के लिए बताया गया है कि उनसे क्या-क्या बात की जा सकती है — इससे चुनना आसान हो जाएगा।

विकल्पइससे क्या पूछा या कहा जा सकता है
वृक्षतुम कितने साल के हो? तुम्हारी शाखों पर कितने पक्षियों का घर है? कोई तुम्हें काटने आए तो तुम्हें कैसा लगता है? धन्यवाद — तुम हमें छाया, फल और साफ़ हवा देते हो।
पानीतुम बादल से नदी तक कितनी लंबी यात्रा करते हो? हम तुम्हें बरबाद करते हैं तो तुम्हें कैसा लगता है? मैं आज से नल खुला नहीं छोड़ूँगा।
चाँदतुम रोज़ अपना आकार क्यों बदलते हो? तुम्हें अकेले रात भर जागकर डर नहीं लगता? क्या सचमुच तुम पर कोई बुढ़िया चरखा कातती है?
पत्तातुम हरे से पीले कैसे हो जाते हो? टहनी से टूटकर गिरते समय तुम्हें कैसा लगता है? तुम धूप से भोजन कैसे बनाते हो?
हवातुम दिखती क्यों नहीं, पर तुम्हारे बिना कोई जी भी नहीं सकता? तुम कहाँ-कहाँ से होकर आई हो? हम तुम्हें धुएँ से गंदा कर देते हैं, इसके लिए क्षमा करना।
मिट्टीएक छोटे-से बीज को इतना बड़ा पेड़ बनाने का जादू तुम्हें किसने सिखाया? तुम्हें प्लास्टिक से कितनी तकलीफ़ होती है?
तितलीतुम्हारे पंखों पर इतने रंग कहाँ से आए? तुम एक फूल पर ज़्यादा देर क्यों नहीं बैठतीं? क्या तुम्हें याद है कि तुम पहले इल्ली थीं?
बादलतुम पानी लेकर इतनी दूर तक कैसे उड़ते हो? तुम कभी-कभी बरसना क्यों भूल जाते हो? किसान तुम्हारी राह देखता रह जाता है।

नमूना उत्तर (मैंने ‘वृक्ष’ चुना): मैं वृक्ष से बात करना चाहूँगा। मैं उससे पूछूँगा — “तुम कितने वर्ष के हो? तुमने अब तक कितनी बारिश और कितनी गरमियाँ देखी हैं?” फिर मैं पूछूँगा कि उसकी डालों पर कितने पक्षियों ने घोंसले बनाए हैं और उसे कौन-सा पक्षी सबसे प्रिय है। मैं उससे यह भी पूछूँगा कि जब कोई उसकी डाल तोड़ता है तो उसे कैसा लगता है। अंत में मैं उसे धन्यवाद कहूँगा, क्योंकि वह हमें छाया, फल, लकड़ी और साफ़ हवा देता है और बदले में कुछ माँगता नहीं। मैं उससे वादा करूँगा कि मैं हर वर्ष एक पौधा लगाऊँगा और उसकी देखभाल करूँगा।

कविता से जोड़िए: कवि ने किरन को सहेली बनाकर उससे बात करवाई। इसी तरह जब हम पेड़, पानी या हवा से बात करने की कल्पना करते हैं, तो वे हमें चीज़ नहीं, साथी लगने लगते हैं। और जो साथी लगता है, उसे हम कभी नुकसान नहीं पहुँचाते। यही इस गतिविधि का असली मक़सद है।
प्र2.
अपने सहपाठियों के साथ चर्चा कीजिए कि आप इनसे क्या बातचीत करेंगे?
उत्तर

यह कक्षा में करने वाला काम है। इसे इस तरह कीजिए —

  1. समूह बनाइए। चार-पाँच बच्चों का एक समूह बनाइए। हर बच्चा बताए कि उसने कौन-सा विकल्प चुना और क्यों।
  2. सवाल इकट्ठे कीजिए। हर बच्चा अपनी चुनी हुई चीज़ से पूछने के लिए तीन सवाल लिखे। समूह मिलकर तय करे कि कौन-सा सवाल सबसे रोचक है।
  3. उत्तर की कल्पना कीजिए। यह सबसे मज़ेदार हिस्सा है। एक साथी सवाल पूछे और दूसरा साथी उस चीज़ बनकर उत्तर दे।
  4. एक वादा जोड़िए। बातचीत के अंत में हर बच्चा उस चीज़ से एक वादा करे — जैसे “मैं पानी बरबाद नहीं करूँगा।”
चर्चा के नियम — तीन बातें:
1. एक समय में एक ही बच्चा बोले।
2. किसी की कल्पना पर हँसिए मत — कल्पना में कोई उत्तर ग़लत नहीं होता।
3. हर बच्चे को बोलने का मौका मिले, चाहे वह एक ही वाक्य बोले।

नमूना चर्चा:

कौनक्या कहता है
आमिरमैंने बादल चुना है। मैं उससे पूछूँगा — “तुम इतना सारा पानी लेकर उड़ते कैसे हो?”
सरितामैंने तितली चुनी है। मैं पूछूँगी — “तुम्हारे पंखों में इतने रंग कहाँ से आए?”
राहुलमैंने पानी चुना है। मैं पूछूँगा — “जब हम नल खुला छोड़ देते हैं, तब तुम्हें कैसा लगता है?”
पूरा समूहहम तीनों सवाल चुनकर उनके उत्तर की कल्पना करेंगे और फिर कक्षा के सामने सुनाएँगे।
प्र3.
अपने सहपाठियों की सहायता से इस बातचीत का अभिनय भी कीजिए।
उत्तर

अब इसी बातचीत को छोटा-सा नाटक बना दीजिए। दो बच्चे चाहिए — एक बच्चा और एक वह चीज़ (पेड़, बादल, पानी…)।

अभिनय की तैयारी — चार चरण:
चरण 1 — जोड़ी बनाइए और तय कीजिए कि कौन क्या बनेगा।
चरण 2 — छह से आठ संवाद लिख लीजिए। संवाद छोटे रखिए।
चरण 3 — जो चीज़ बन रहा है, वह अपनी आवाज़ बदल ले — पेड़ की आवाज़ धीमी और भारी, तितली की हल्की और चंचल।
चरण 4 — बिना कागज़ देखे दो बार अभ्यास कीजिए, फिर कक्षा के सामने कीजिए।

नमूना अभिनय — “बच्चा और वृक्ष”

पात्रसंवाद
बच्चानमस्ते वृक्ष जी! क्या मैं आपसे कुछ पूछ सकता हूँ?
वृक्षपूछो बेटा। मैं तो यहीं खड़ा रहता हूँ, कहीं जाता थोड़े ही हूँ।
बच्चाआपको यहाँ खड़े-खड़े कितने वर्ष हो गए?
वृक्षपचास से ऊपर। तुम्हारे दादाजी भी बचपन में मेरी छाया में खेला करते थे।
बच्चाअकेले खड़े रहकर आपका मन नहीं ऊबता?
वृक्षअकेला कहाँ हूँ! मेरी डालों पर सात घोंसले हैं, एक गिलहरी है और दोपहर में तुम सब आ जाते हो।
बच्चाजब कोई आपकी डाल तोड़ता है तब क्या होता है?
वृक्षदुख होता है, पर मैं फिर भी छाया देना बंद नहीं करता। बस इतना करना — कोई काटने आए तो उसे रोक देना।
बच्चावादा रहा, वृक्ष जी। और मैं हर वर्ष एक नया पौधा भी लगाऊँगा, ताकि आपका कोई साथी बन जाए।
अच्छे अभिनय में यह होना चाहिए: आवाज़ पीछे बैठे बच्चे तक पहुँचे, दोनों पात्र एक-दूसरे की ओर देखकर बोलें, संवाद रटे हुए न लगें, और अंत में कोई एक बात ऐसी हो जो सुनने वाले को याद रह जाए — जैसे ऊपर का वादा।
क्या यह उपयोगी रहा?