कक्षा ५ हिंदी अध्याय 1 किरन के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-19
इस अध्याय के बारे में
किरन एक कविता है। इसे निरंकार देव ‘सेवक’ ने लिखा है। ‘सेवक’ उनका उपनाम है — यानी वह नाम जो कवि अपनी कविता के नीचे लिखते हैं। ये बच्चों के लिए कविताएँ लिखने वाले जाने-माने कवि थे। कविता में दो पात्र हैं — एक बालिका और दूसरी किरन , यानी सूरज की किरण। पूरी कविता इन दोनों की आपस की बातचीत है। किरन को यहाँ एक सहेली की तरह दिखाया गया है, जो बोल सकती है, खेल सकती है और थकती भी नहीं। कविता की शुरुआत बालिका की शिकायत से होती है — “अरी किरन तू उठकर इतनी जल्दी आज चली आई।” वह कहती है कि वह अभी बिस्तर से निकल ही नहीं पाई है। कल शाम तक उसने किरन के साथ बहुत खेल खेले थे, पर जैसे ही किरन सोने चली गई, वह अकेली रह गई। फिर बालिका अपनी रात की बात बताती है। उसे नींद नहीं आई। वह परी कथाएँ पढ़ते-पढ़ते बड़ी देर में सो पाई। उसे लगता है कि किरन तो सुख से सोई होगी। इसके बाद किरन का उत्तर आता है, और यहीं कविता का असल
अभ्यास
- बातचीत के लिए
- पाठ से
- सोचिए और लिखिए
- समझ और अनुभव
- अनुमान और कल्पना
- भाषा की बात
- आपकी बातचीत
- इसे भी जानिए
- पुस्तकालय एवं अन्य स्रोत
- पेड़ का जादू