कक्षा ५ हिंदी अध्याय 1 पुस्तकालय एवं अन्य स्रोत के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
आपको ज्ञात ही होगा कि सुनीता विलियम्स भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री हैं। शिक्षकों एवं अभिभावकों की सहायता से आप सुनीता विलियम्स के बारे में पुस्तकालय एवं अन्य स्रोतों से जानकारी एकत्रित कीजिए।
उत्तर

यह जानकारी जुटाने वाला काम है। पहले यह तय कीजिए कि जानकारी कहाँ से मिलेगी, फिर उसे क्रम से लिखिए।

जानकारी कहाँ से जुटाइए — चार जगहें:
1. विद्यालय के पुस्तकालय में “महान वैज्ञानिक” या “अंतरिक्ष यात्री” विषय की बाल-पुस्तकें।
2. बच्चों की पत्रिकाएँ — जैसे चंपक, नंदन, बालहंस, और एन.सी.ई.आर.टी. की पत्रिका।
3. पुराने अख़बारों की कतरनें — जून 2024 और मार्च 2025 के अख़बारों में उनकी यात्रा की बहुत चर्चा हुई थी।
4. शिक्षक या अभिभावक की सहायता से नासा और एन.सी.ई.आर.टी. के आधिकारिक पन्ने।

जो जानकारी मिली, उसे इस तरह की तालिका में सजाइए —

बातजानकारी
पूरा नामसुनीता लिन विलियम्स
जन्म19 सितंबर 1965, यूक्लिड (ओहायो), अमेरिका
भारत से नाताउनके पिता दीपक पंड्या गुजरात के मेहसाणा ज़िले के झूलासण गाँव के रहने वाले थे। वे डॉक्टर थे और अमेरिका जा बसे। उनकी माता उर्सुलिन बोनी स्लोवेनियाई मूल की हैं। इसी कारण सुनीता को भारतीय मूल की कहा जाता है।
पहले क्या करती थींवे अमेरिकी नौसेना में अफ़सर थीं और हेलिकॉप्टर उड़ाती थीं। बाद में परीक्षण पायलट बनीं। सन 1998 में नासा ने उन्हें अंतरिक्ष यात्री के लिए चुना।
पहली अंतरिक्ष यात्रासन 2006–07 में। वे अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर लगभग 195 दिन रहीं।
दूसरी अंतरिक्ष यात्रासन 2012 में, लगभग 127 दिन। इस बार वे अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की कमांडर बनीं — यह ज़िम्मेदारी सँभालने वाली वे दूसरी महिला थीं।
तीसरी अंतरिक्ष यात्राजून 2024 में वे बोइंग स्टारलाइनर यान से गईं। यह यात्रा कुछ ही दिनों की होनी थी, पर यान में गड़बड़ी आ जाने से उन्हें अंतरिक्ष स्टेशन पर ही रुकना पड़ा। वे मार्च 2025 में सकुशल धरती पर लौटीं।
कुल समयतीनों यात्राओं को मिलाकर वे लगभग 608 दिन अंतरिक्ष में रह चुकी हैं।
स्पेसवॉकउन्होंने कई बार अंतरिक्ष यान से बाहर निकलकर काम किया। महिलाओं में सबसे अधिक समय तक अंतरिक्ष में चलने का कीर्तिमान उनके नाम है।
एक रोचक बातसन 2007 में उन्होंने अंतरिक्ष स्टेशन के ट्रेडमिल पर दौड़कर बोस्टन मैराथन पूरी की। अंतरिक्ष में मैराथन दौड़ने वाली वे पहली व्यक्ति थीं।
भारत से लगाववे अपने साथ भगवद्गीता, गणेश जी की छोटी मूर्ति और समोसे अंतरिक्ष में ले गई थीं। भारत आने पर वे अपने पूर्वजों के गाँव झूलासण भी गईं।
सम्मानसन 2008 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया।

नमूना उत्तर (लेखन-पुस्तिका में इस तरह लिखिए): सुनीता विलियम्स भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री हैं। उनका जन्म 19 सितंबर 1965 को अमेरिका के ओहायो राज्य में हुआ था। उनके पिता दीपक पंड्या गुजरात के झूलासण गाँव के थे, इसीलिए भारत उन्हें अपना मानता है। वे पहले अमेरिकी नौसेना में हेलिकॉप्टर पायलट थीं। सन 1998 में नासा ने उन्हें अंतरिक्ष यात्री चुना। वे तीन बार अंतरिक्ष में जा चुकी हैं और वहाँ कुल मिलाकर लगभग 608 दिन रह चुकी हैं। सन 2012 में वे अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की कमांडर बनीं। उन्होंने अंतरिक्ष स्टेशन के ट्रेडमिल पर दौड़कर मैराथन भी पूरी की। जून 2024 में वे फिर अंतरिक्ष गईं, पर यान में गड़बड़ी के कारण उन्हें वहाँ महीनों रुकना पड़ा और वे मार्च 2025 में सकुशल लौटीं। भारत सरकार ने उन्हें सन 2008 में पद्म भूषण दिया। उनसे मैंने यह सीखा कि कठिन समय में भी घबराना नहीं चाहिए और अपना काम शांति से करते रहना चाहिए।

ध्यान दीजिए — एक बात जो अकसर गड़बड़ा जाती है: अंतरिक्ष में जाने वाली पहली भारतीय मूल की महिला कल्पना चावला थीं। सुनीता विलियम्स दूसरी हैं। दोनों के नाम अलग-अलग याद रखिए।
पाठ से जोड़िए: कविता की किरन धरती के इस भाग से उस भाग तक जाती है। सुनीता विलियम्स तो धरती से ही बाहर चली गईं! अंतरिक्ष स्टेशन धरती का चक्कर इतनी तेज़ी से लगाता है कि वहाँ रहने वालों को एक दिन में लगभग सोलह बार सूरज उगता और डूबता दिखाई देता है। सोचिए, वहाँ किरन कितनी बार आती-जाती होगी!
क्या यह उपयोगी रहा?