कक्षा ५ हिंदी अध्याय 1 पेड़ का जादू के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
‘पेड़ का जादू’ में लड़के ने बुआ से क्या पूछा और बुआ ने उसे क्या उत्तर दिया?
उत्तर

लड़के ने बुआ से पूछा कि उन्होंने गिलहरी कहाँ से खरीदी। बुआ ने उत्तर दिया कि गिलहरी खरीदी नहीं जाती — घर में पेड़ हो तो गिलहरी अपने आप आ जाती है

लड़के ने कहा — “बुआ! आपने गिलहरी कहाँ से खरीदी? मैं भी लूँगा। उसे पालूँगा।”
बुआ ने कहा — “मेरे घर में पेड़ है। पेड़ के होने से गिलहरी अपने आप आ जाती है।”

बुआ ने आगे और क्या-क्या बताया —

बुआ की बातउसका अर्थ
“पेड़ पर देखो। चिड़ियाँ बैठी हैं। चिड़ियों को मैंने नहीं पाला। पेड़ होने से वे आ गईं।”चिड़ियाँ भी किसी ने पाली नहीं। पेड़ ही उन्हें बुला लाया।
“तुम अपने घर में पेड़ उगा लो तो गिलहरी आ जाएगी। चिड़िया आएगी।”जो चाहिए, उसे पकड़ने या ख़रीदने की ज़रूरत नहीं — उसके रहने की जगह बना दीजिए, वह खुद आ जाएगा।
“बाहर धूप होगी तो पेड़ के नीचे छाया आ जाएगी। तब छाया में खेलना अच्छा लगेगा।”पेड़ केवल जीव-जंतु नहीं लाता, छाया भी देता है — यानी एक पेड़ से एक साथ कई फ़ायदे मिलते हैं।
बुआ ने सीधे “नहीं” क्यों नहीं कहा: वे लड़के को डाँट सकती थीं कि गिलहरी पालने की चीज़ नहीं है। पर उन्होंने ऐसा नहीं किया। उन्होंने एक बेहतर रास्ता बता दिया — पेड़ लगा लो। इस तरह लड़के की इच्छा भी पूरी हो जाएगी और गिलहरी भी आज़ाद रहेगी। बड़ों का समझाने का यह तरीका सबसे अच्छा होता है।
प्र2.
इस रचना का नाम ‘पेड़ का जादू’ क्यों रखा गया है? वह जादू क्या है?
उत्तर

नाम ‘पेड़ का जादू’ इसलिए रखा गया है क्योंकि पेड़ लगाने भर से बहुत-सी चीज़ें अपने आप आ जाती हैं — और जो अपने आप हो जाए, वही तो जादू कहलाता है।

एक पेड़ लगाइए

गिलहरी आ गई · चिड़ियाँ आ गईं · छाया आ गई · खेलने की अच्छी जगह बन गई

यह जादू क्यों है — तीन कारण:

  1. कुछ ख़रीदना नहीं पड़ता। लड़का गिलहरी ख़रीदना चाहता था। पर पेड़ लगाने के बाद गिलहरी बिना पैसे के, बिना पिंजरे के आ जाती है।
  2. कुछ पकड़ना नहीं पड़ता। बुआ कहती हैं — “चिड़ियों को मैंने नहीं पाला। पेड़ होने से वे आ गईं।” किसी को बंद करना नहीं पड़ा, फिर भी सब पास हैं।
  3. एक चीज़ से कई चीज़ें मिलती हैं। पेड़ लगाया एक, और मिले चार — गिलहरी, चिड़िया, छाया और खेलने की जगह। इसी को जादू कहते हैं।
रचना का असली भाव: लेखक बहुत सीधे शब्दों में एक बड़ी बात कह देते हैं — प्रकृति को अपने पास लाने का तरीका उसे पकड़ना नहीं, उसके लिए जगह बनाना है। गिलहरी पिंजरे में रखी जाए तो वह दुखी होगी; पेड़ पर आए तो वह भी खुश और हम भी खुश।
लेखक के बारे में: विनोद कुमार शुक्ल हिंदी के प्रसिद्ध कवि और कहानीकार हैं। वे छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं। वे बहुत सरल शब्दों में गहरी बात कहने के लिए जाने जाते हैं। यह रचना इकतारा ट्रस्ट से साभार ली गई है, जो बच्चों के लिए किताबें और पत्रिकाएँ छापता है।
प्र3.
‘किरन’ कविता और ‘पेड़ का जादू’ — इन दोनों रचनाओं में क्या समानता है? दोनों मिलकर हमें क्या सिखाती हैं?
उत्तर

दोनों रचनाएँ अलग-अलग हैं — एक कविता है और दूसरी बातचीत के रूप में लिखा गया छोटा-सा गद्य। पर दोनों की बात एक ही है — हमारा जीवन प्रकृति से जुड़ा हुआ है।

बातकिरन (कविता)पेड़ का जादू (गद्य)
रचनाकारनिरंकार देव ‘सेवक’विनोद कुमार शुक्ल
विधाकविताछोटी बातचीत (गद्य)
प्रकृति का कौन-सा रूपसूरज की किरन — यानी प्रकाशपेड़ — यानी हरियाली
बात कौन करता हैबालिका और किरन आपस मेंलड़का और बुआ आपस में
समानतादोनों में प्रकृति को साथी की तरह देखा गया है। किरन सहेली बनकर बात करती है और पेड़ अपने आप गिलहरी और चिड़ियों को बुला लाता है। दोनों बिना माँगे देते हैं।
दूसरी समानतादोनों में एक बच्चा प्रश्न पूछता है और उसे एक सुंदर उत्तर मिलता है — बालिका पूछती है कि तू इतनी जल्दी क्यों आ गई, लड़का पूछता है कि गिलहरी कहाँ से खरीदी।
सीखप्रकृति की हर चीज़ बिना कहे अपना काम करती रहती है — किरन रोज़ आती-जाती है, पेड़ चुपचाप छाया देता है। हमें भी उनका ध्यान रखना चाहिए।
दोनों को जोड़कर देखिए: किरन के बिना पेड़ हरा नहीं रह सकता, क्योंकि पत्तियाँ धूप से ही अपना भोजन बनाती हैं। और पेड़ न हो तो उसी किरन की धूप में खड़ा रहना मुश्किल हो जाए, क्योंकि छाया ही नहीं मिलेगी। यानी किरन और पेड़ एक-दूसरे को पूरा करते हैं — ठीक वैसे ही, जैसे दिन और रात।
यहाँ जोड़िए: ‘सोचिए और लिखिए’ के तीसरे प्रश्न में पूछा गया था कि हम प्रकृति के लिए क्या कर सकते हैं। ‘पेड़ का जादू’ उसका सबसे आसान उत्तर दे देती है — एक पेड़ लगा दीजिए। बाकी काम पेड़ खुद कर लेगा।
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