कक्षा ५ हिंदी अध्याय 2 न्याय की कुर्सी के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-19

इस अध्याय के बारे में

न्याय की कुर्सी एक कहानी है। इसे लीलावती भागवत ने लिखा है। यह उनकी पुस्तक स्वर्ग की सैर तथा अन्य कहानियाँ से ली गई है, जो राष्ट्रीय पुस्तक न्यास से छपी है। कहानी उज्जैन नगरी के बाहर के एक मैदान से शुरू होती है। वहाँ यहाँ-वहाँ टीले — यानी मिट्टी के छोटे-छोटे ढेर — थे। एक लड़का खेलते-खेलते एक टीले पर चढ़ा और ठोकर खाकर गिर पड़ा। ठोकर एक बड़े चिकने पत्थर से लगी थी। लड़के ने उसी पत्थर को अपना सिंहासन बना लिया। उसने कहा — “यह सिंहासन है मेरा। मैं राजा हूँ और तुम सब मेरे दरबारी।” बाकी लड़के फरियाद (शिकायत) लेकर आते, गवाह बुलाए जाते, बयान लिए जाते और टीले पर बैठा लड़का फैसला सुनाता। यह खेल उन्हें इतना अच्छा लगा कि वे रोज़ खेलने लगे। फैसले इतने ठीक होते थे कि नगर में चर्चा फैल गई। एक दिन दो किसान ज़मीन के झगड़े में राजा के दरबार जाने के बजाय उसी लड़के के पास गए। उसका फैसला सुनकर वे दंग रह गए। इसके

त्वरित पुनरावृत्ति
शब्दअर्थपाठ की पंक्तिअपने वाक्य में प्रयोग
टीलामिट्टी या पत्थर का छोटा ऊँचा ढेर“यहाँ-वहाँ टीले थे।”हम दौड़कर टीले पर चढ़ गए।
शिलाबड़ा चपटा पत्थर“अपने मित्रों को बुलाकर वह शिला दिखाई।”नदी किनारे एक चौड़ी शिला पर हम बैठ गए।
फरियादशिकायत, न्याय पाने के लिए लगाई गई गुहार“तुम अपनी-अपनी फरियाद लेकर आओ।”खोए बच्चे की फरियाद पुलिस ने तुरंत सुनी।
दरबारीराजा के दरबार में रहने वाले लोग“मैं राजा हूँ और तुम सब मेरे दरबारी।”नाटक में मेरे दो साथी दरबारी बने।
गवाहीजिसने कुछ देखा या सुना हो, उसका कहा हुआ सच“उनकी गवाही ली जाती।”दुर्घटना की गवाही दुकानदार ने दी।
बयानअपनी बात कहकर बताना“दोनों किसानों के बयान सुने।”दोनों पक्षों के बयान सुने बिना फैसला ठीक नहीं होता।
न्याय-बुद्धिसही-गलत परखकर ठीक फैसला करने की समझ“लोग लड़के की न्याय-बुद्धि की चर्चा करने लगे”शिक्षिका की न्याय-बुद्धि पर सब बच्चों को भरोसा है।
दैवी शक्तिदेवताओं से मिली हुई अनोखी शक्ति“अवश्य ही उस लड़के में कोई दैवी शक्ति है।”कहानियों में परियों के पास दैवी शक्ति होती है।
मजालहिम्मत, साहस (यहाँ ताने के रूप में)“उस छोकरे की यह मजाल…”किसकी मजाल जो कतार तोड़कर आगे बढ़ जाए!
लाव-लश्करसाथ चलने वाले सिपाही और सेवक, पूरा दल“राजा अपने लाव-लश्कर के साथ उस मैदान में पहुँचा”बारात अपने पूरे लाव-लश्कर के साथ पहुँची।
स्तंभितहैरान होकर जड़-सा रह जाना“वह स्तंभित रह गया।”जादू का खेल देखकर हम स्तंभित रह गए।
लोहा माननाकिसी की श्रेष्ठता स्वीकार करना (मुहावरा)“बड़े-बड़ों को लोहा मानना पड़ेगा।”उसकी दौड़ का लोहा पूरा गाँव मानता है।
चमत्कारऐसी अनोखी बात जो समझ में न आए“पत्थर की इस कुर्सी में ही कोई चमत्कार है।”बीज से पेड़ बन जाना किसी चमत्कार से कम नहीं।
देवदूतदेवताओं का संदेश लाने वाला, पंखों वाला दिव्य रूप“चार देवदूतों की मूर्तियाँ बनी हुई थीं।”चित्र में देवदूत के पंख सुनहरे बने थे।
विवेकभले-बुरे की पहचान“राजा विक्रमादित्य अपने न्याय और विवेक के लिए बहुत प्रसिद्ध थे।”विवेक से लिया गया निर्णय बाद में पछताने नहीं देता।
प्रजाराजा के राज्य में रहने वाले लोग“मैं इस पर बैठकर अपनी प्रजा की फरियाद सुनूँगा”अच्छा राजा प्रजा को अपने बच्चों जैसा मानता है।
प्रायश्चितगलती का पछतावा और उसे सुधारने के लिए किया गया काम“तुमको तीन दिन तक प्रायश्चित करना होगा।”उसने अपने प्रायश्चित में पूरा बगीचा साफ़ किया।
उपवासकुछ न खाकर व्रत रखना“राजा ने तीन दिन तक उपवास किया”दादी सोमवार को उपवास रखती हैं।
कलुषमन का मैल, बुरा भाव“उनके मन में कलुष नहीं था।”छोटे बच्चों के मन में कलुष नहीं होता।
सकपकानाअचानक घबरा जाना, बोलती बंद हो जाना“राजा सकपकाया।”झूठ पकड़े जाने पर वह सकपका गया।
  1. बातचीत के लिए
  2. पाठ से
  3. सोचिए और लिखिए
  4. अनुमान और कल्पना
  5. भाषा की बात
  6. पाठ से आगे
  7. पुस्तकालय एवं अन्य स्रोत
  8. पता लगाकर कीजिए
  9. बूझो तो जानें
  10. मेरा न्याय
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