कक्षा ५ हिंदी अध्याय 2 बातचीत के लिए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
आपका प्रिय खेल कौन-सा है? आप उसे कैसे खेलते हैं?
उत्तर

यह आपके अपने अनुभव का प्रश्न है। इसका उत्तर हर बच्चे का अलग होगा।

कैसे बताएँ — तीन चरण:
चरण 1 — खेल का नाम लीजिए।
चरण 2 — बताइए कि उसमें कितने खिलाड़ी होते हैं और क्या सामान चाहिए।
चरण 3 — खेल के दो-तीन नियम बताइए और यह भी कि आपको वह खेल क्यों अच्छा लगता है।

अच्छे उत्तर में यह ज़रूर हो — खेल का नाम, खिलाड़ियों की संख्या, खेलने का तरीका और अपनी पसंद का कारण।

नमूना उत्तर: मेरा प्रिय खेल कबड्डी है। इसमें दो दल होते हैं। हर दल में सात खिलाड़ी होते हैं। मैदान के बीच एक रेखा खींची जाती है। एक खिलाड़ी “कबड्डी-कबड्डी” कहता हुआ दूसरे दल के पाले में जाता है। वह किसी खिलाड़ी को छूकर अपने पाले में लौट आए तो उसे अंक मिलता है। साँस टूट जाए या वह पकड़ा जाए तो वह बाहर हो जाता है। मुझे यह खेल इसलिए अच्छा लगता है क्योंकि इसमें कोई सामान नहीं चाहिए और पूरा दल मिलकर खेलता है।

पाठ से जोड़िए: कहानी के लड़कों का प्रिय खेल भी अनोखा था — दरबार-दरबार। एक लड़का राजा बनता, बाकी दरबारी। इसी खेल से उनकी न्याय करने की समझ बढ़ती गई। इसका मतलब है कि खेल केवल समय बिताना नहीं, कुछ सीखना भी होता है।
प्र2.
क्या आपने कभी किसी समस्या का समाधान किया है? अपना अनुभव साझा कीजिए।
उत्तर

यह भी आपके अपने अनुभव का प्रश्न है। सच्ची घटना बताइए, चाहे वह छोटी ही क्यों न हो।

कैसे बताएँ — चार चरण:
चरण 1 — समस्या क्या थी, यह एक वाक्य में कहिए।
चरण 2 — किसकी समस्या थी, यह बताइए।
चरण 3 — आपने क्या किया, यह क्रम से कहिए।
चरण 4 — अंत में क्या हुआ और आपने क्या सीखा, यह बताइए।

अच्छे उत्तर में यह ज़रूर हो — समस्या, आपका किया हुआ काम, नतीजा और सीख।

नमूना उत्तर: हमारी कक्षा में एक दिन दो साथियों में झगड़ा हो गया। दोनों एक ही पेंसिल-बॉक्स को अपना बता रहे थे। मैंने पहले दोनों की बात अलग-अलग सुनी। फिर मैंने पूछा कि बॉक्स के अंदर क्या-क्या है। एक साथी ने सही बता दिया कि उसमें एक टूटा हुआ नीला रबर है। बॉक्स खोलकर देखा तो वैसा ही निकला। बॉक्स उसी को मिल गया और दूसरे साथी ने मान लिया कि उससे भूल हुई थी। मैंने सीखा कि झगड़ा सुलझाने के लिए पहले दोनों की बात शांति से सुननी चाहिए।

ध्यान दीजिए: कहानी का लड़का भी यही करता था — “लड़के ने बड़ी गंभीरता से दोनों किसानों के बयान सुने।” पहले पूरी बात सुनना ही अच्छे फैसले का पहला कदम है।
प्र3.
यदि आप राजा के स्थान पर होते और आपको लड़के के बारे में पता चलता तो आप क्या करते?
उत्तर

मैं क्रोध न करता। मैं उस लड़के से मिलने जाता और उसे शाबाशी देता।

कारण: कहानी का राजा गुस्से में कहता है — “उस छोकरे की यह मजाल कि अपने को मुझसे अच्छा न्यायकर्ता समझे?” यही उसकी सबसे बड़ी भूल थी। जब प्रजा को कहीं से न्याय मिल रहा हो, तो राजा को खुशी होनी चाहिए, जलन नहीं। लड़का राजा का प्रतिद्वंद्वी नहीं था; वह तो राजा का ही काम आसान कर रहा था।

अच्छे उत्तर में यह ज़रूर हो — आप क्या करते, क्यों करते, और उससे प्रजा को क्या लाभ होता।

नमूना उत्तर: राजा के स्थान पर मैं सबसे पहले खुद जाकर लड़के का खेल देखता। फिर मैं उससे पूछता कि वह फैसला करने से पहले क्या-क्या सोचता है। मैं उसे दरबार में बुलाकर सम्मानित करता। मैं यह भी सोचता कि लोग मेरे दरबार में क्यों नहीं आ रहे — शायद वहाँ बहुत देर लगती हो या लोग डरते हों। मैं अपने दरबार की यही कमी दूर करता। इस तरह लड़के का सम्मान भी होता और प्रजा को न्याय भी जल्दी मिलता।

प्र4.
लड़के के अंदर ऐसे कौन-कौन से गुण होंगे जिनके कारण वह सिंहासन पर बैठ पा रहा था?
उत्तर

सबसे बड़ा गुण था — उसका साफ़ मन। चौथी मूर्ति ने खुद कहा — “जो लड़के इस सिंहासन पर बैठते थे, वे भोले-भाले थे। उनके मन में कलुष नहीं था।” कलुष का अर्थ है मन का मैल यानी बुरा भाव।

पाठ से पकड़ में आने वाले गुण ये हैं —

गुणपाठ से प्रमाण
निष्कपट, भोला मन“उनके मन में कलुष नहीं था।”
ध्यान से सुनना“लड़के ने बड़ी गंभीरता से दोनों किसानों के बयान सुने।”
दोनों पक्षों को बराबर माननावह गवाह बुलाता, गवाही लेता, फिर सवाल करता — तभी फैसला सुनाता।
सोच-समझकर बोलना“उसके बाद उसने जो फैसला दिया, उसे सुनकर वे दंग रह गए।”
निडरतावह गाँव के बड़े-बूढ़ों और किसानों के सामने भी बिना डरे अपना फैसला सुनाता था।
लालच का न होनावह फैसले के बदले किसी से कुछ नहीं लेता था — इसीलिए किसी को उसके फैसले से असंतोष नहीं हुआ।
क्यों यही गुण ज़रूरी थे: सिंहासन राजा विक्रमादित्य का था, जो न्याय और विवेक के लिए प्रसिद्ध थे। ऐसी कुर्सी पर वही बैठ सकता है जिसके मन में खोट न हो। लड़कों में यह खोट थी ही नहीं, इसलिए मूर्तियों ने उन्हें कभी नहीं रोका।
क्या यह उपयोगी रहा?