कक्षा ५ हिंदी अध्याय 2 पाठ से के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
राजा को लड़के द्वारा न्याय करने के विषय में कैसे पता चला? (क) लड़के द्वारा की गई शरारतों को सुनकर (ख) लोगों द्वारा लड़के के न्याय की प्रशंसा सुनकर (ग) लड़के द्वारा अपने न्याय की बुराई सुनकर (घ) मंत्रियों द्वारा लड़के की बुद्धि की प्रशंसा सुनकर
उत्तर

तारा (✱) केवल एक विकल्प पर लगेगा — (ख) लोगों द्वारा लड़के के न्याय की प्रशंसा सुनकर।

“बात इधर-उधर फैलने लगी। लोग लड़के की न्याय-बुद्धि की चर्चा करने लगे…”
फिर — “धीरे-धीरे यह बात राजा के कानों तक पहुँची।”
विकल्पसही / ग़लतकारण
(क) लड़के की शरारतों को सुनकरग़लतकहानी में लड़के की किसी शरारत की बात है ही नहीं। जो फैली, वह उसके न्याय की चर्चा थी।
(ख) लोगों द्वारा न्याय की प्रशंसा सुनकरसही ✱पाठ यही कहता है — पहले लोगों में चर्चा फैली, फिर वही बात धीरे-धीरे राजा के कानों तक पहुँची।
(ग) लड़के द्वारा अपने न्याय की बुराई सुनकरग़लतलड़का अपने बारे में कुछ कहता ही नहीं। और बुराई नहीं, प्रशंसा हो रही थी।
(घ) मंत्रियों द्वारा बुद्धि की प्रशंसा सुनकरग़लतमंत्री ने राजा से कुछ नहीं कहा। उलटा, मैदान में जाकर राजा ने अपने मंत्री से कहा — “लड़का सचमुच बहुत बुद्धिमान है।” यह बात पता चलने के बाद की है, पहले की नहीं।
ध्यान दीजिए: इस पाठ में कई प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर सही हैं, पर हर प्रश्न के नहीं। यहाँ पाठ में कारण एक ही बताया गया है, इसलिए तारा भी एक ही पर लगेगा।
प्र2.
राजा को सबसे अधिक आश्चर्य किस बात से हुआ? (क) बच्चे खेल-खेल में न्याय कर रहे थे। (ख) लोग राजा के दरबार में नहीं आ रहे थे। (ग) सिंहासन पर बैठने वाला लड़का सही न्याय करता था। (घ) स्वयं सिंहासन में ही कोई चमत्कारी शक्ति विद्यमान थी।
उत्तर

तारा (✱) दो विकल्पों पर लगेगा — (ग) और (घ)। इनमें भी “सबसे अधिक” आश्चर्य (घ) वाला है।

पहला आश्चर्य — “इतनी छोटी उम्र में इतनी बुद्धि का होना आश्चर्य की बात है।”
फिर पता चला कि आज कोई नया लड़का बैठा है।
दूसरा और बड़ा आश्चर्य — “यह तो और भी आश्चर्य की बात है! हो न हो, पत्थर की इस कुर्सी में ही कोई चमत्कार है।”
विकल्पसही / ग़लतकारण
(क) बच्चे खेल-खेल में न्याय कर रहे थे।ग़लतराजा ने खेल तो बड़ी देर तक देखा, पर उसका आश्चर्य खेल पर नहीं था। वह लड़के की बुद्धि पर था। खेल तो बच्चे कई तरह के खेलते ही हैं।
(ख) लोग राजा के दरबार में नहीं आ रहे थे।ग़लतइस बात से राजा को आश्चर्य नहीं, क्रोध हुआ था — “उसको बहुत क्रोध आया।” गुस्सा और आश्चर्य दो अलग भाव हैं।
(ग) बैठने वाला लड़का सही न्याय करता था।सही ✱राजा ने स्वयं इसे आश्चर्य कहा — “इतनी छोटी उम्र में इतनी बुद्धि का होना आश्चर्य की बात है।” वह स्तंभित रह गया था।
(घ) सिंहासन में ही कोई चमत्कारी शक्ति थी।सही ✱ (सबसे अधिक)जब पता चला कि आज दूसरा ही लड़का बैठा है और फैसले फिर भी सही हैं, तब राजा बोला — “यह तो और भी आश्चर्य की बात है!” यही उसका सबसे बड़ा आश्चर्य था।
दो उत्तर क्यों: कहानी में आश्चर्य दो बार होता है। पहले लड़के को देखकर, फिर कुर्सी के बारे में सोचकर। दूसरा आश्चर्य पहले से बड़ा है, क्योंकि पाठ में ही लिखा है — “और भी आश्चर्य की बात”। इसीलिए (घ) पहला उत्तर है और (ग) उसके साथ का उत्तर।
प्र3.
लड़कों को यह खेल इतना अच्छा क्यों लगा कि वे प्रतिदिन इसे खेलने लगे? (क) क्योंकि वे राजा जैसा बनने का आनंद ले रहे थे। (ख) क्योंकि यह अन्य खेलों से अधिक मनोरंजक था। (ग) क्योंकि उन्हें न्याय करने का अनुभव अच्छा लगा। (घ) क्योंकि इस खेल से वे नगर भर में प्रसिद्ध हो गए थे।
उत्तर

तारा (✱) दो विकल्पों पर लगेगा — (क) और (ग)

“यह सिंहासन है मेरा। मैं राजा हूँ और तुम सब मेरे दरबारी।” → राजा बनने का मज़ा
“शिकायतें सुनी जातीं, अपराधी पेश किए जाते, बयान लिए जाते, फिर शिला पर बैठा हुआ लड़का अपना फैसला सुनाता।”
“इस खेल में उनको इतना आनंद आया कि वे रोज ही यह खेल खेलने लगे।” → न्याय करने का मज़ा
विकल्पसही / ग़लतकारण
(क) राजा जैसा बनने का आनंदसही ✱खेल की शुरुआत ही इसी वाक्य से होती है — “मैं राजा हूँ और तुम सब मेरे दरबारी।” बच्चों को बड़े बनने का अभिनय करना अच्छा लगता है।
(ख) अन्य खेलों से अधिक मनोरंजक थाग़लतपाठ में किसी दूसरे खेल से तुलना की ही नहीं गई। जो पाठ में नहीं है, वह उत्तर नहीं बन सकता।
(ग) न्याय करने का अनुभव अच्छा लगासही ✱खेल का पूरा मज़ा फरियाद सुनने, गवाही लेने और फैसला सुनाने में था। पाठ साफ़ कहता है — “इस खेल में उनको इतना आनंद आया…”।
(घ) नगर भर में प्रसिद्ध हो गए थेग़लतप्रसिद्धि तो बाद में मिली — “बात इधर-उधर फैलने लगी।” वह खेल खेलने का कारण नहीं, खेल का नतीजा थी। और प्रसिद्ध पूरा झुंड नहीं, टीले वाला लड़का हुआ था।
प्र4.
राजा ने उपवास और प्रायश्चित क्यों किया? (क) ताकि वह सिंहासन पर बैठने के योग्य बन सके। (ख) क्योंकि उसे अपने कर्मों पर पछतावा था। (ग) क्योंकि मूर्तियों ने उसे ऐसा करने के लिए कहा था। (घ) क्योंकि जनता ने उसे ऐसा करने को कहा था।
उत्तर

तारा (✱) दो विकल्पों पर लगेगा — (क) और (ग)

मूर्ति ने कहा — “तुमको तीन दिन तक प्रायश्चित करना होगा।”
राजा ने वही किया — “राजा ने तीन दिन तक उपवास किया और प्रार्थना की।”
और हर बार उपवास के बाद वह फिर सिंहासन पर बैठने ही आया।
विकल्पसही / ग़लतकारण
(क) ताकि सिंहासन पर बैठने के योग्य बन सकेसही ✱हर उपवास के बाद राजा का एक ही काम था — फिर सिंहासन की ओर बढ़ना। तीन दिन बीतते ही “चौथे दिन वह फिर दरबार में आया।” उसका लक्ष्य कुर्सी ही था।
(ख) अपने कर्मों पर पछतावा थाग़लतपहली बार राजा ने लज्जा से सिर तो झुकाया, पर सच्चा पछतावा उसमें नहीं था। उसने न ज़मीन लौटाई, न सुधरने की बात कही। अंत में उसने सोचा — “मुझसे ज्यादा धनवान, बलवान और बुद्धिमान भला और कौन होगा?” यह पछतावा नहीं, अहंकार है।
(ग) मूर्तियों ने ऐसा करने के लिए कहा थासही ✱पहली मूर्ति का आदेश साफ़ था — “तुमको तीन दिन तक प्रायश्चित करना होगा।” राजा ने ठीक वही किया, और आगे भी हर बार तीन-तीन दिन का उपवास किया।
(घ) जनता ने ऐसा करने को कहा थाग़लतजनता ने राजा से कुछ नहीं कहा। यह पूरी बात दरबार के भीतर, राजा और मूर्तियों के बीच हुई।
सोचने की बात: सच्चा प्रायश्चित तब होता है जब मन बदल जाए। राजा ने केवल ऊपर से उपवास किया, भीतर से वह वैसा ही रहा। इसीलिए नौ दिन के उपवास के बाद भी वह सिंहासन पर नहीं बैठ पाया।
क्या यह उपयोगी रहा?