प्र1.
“राजा ने आज्ञा दी कि सिंहासन को ले जाकर राजदरबार में रख दिया जाए।” सिंहासन एक विशेष प्रकार की भव्य कुर्सी हुआ करती थी जिस पर राजा-महाराजा बैठा करते थे। आज भी हम बैठने के लिए अनेक प्रकार की वस्तुओं का उपयोग करते हैं। इनमें से कुछ वस्तुओं के चित्र दिए गए हैं। इनका वर्णन कीजिए और यह भी लिखिए कि आपकी भाषा में इन्हें क्या कहते हैं। (चटाई, दरी, मूढ़ा, चारपाई, पीढ़ा, टाट पट्टी)
पृष्ठ 19 पर दी गई तालिका। पहली दो पंक्तियों का वर्णन पुस्तक में पहले से लिखा है; शेष खाने आपको भरने हैं।
| वस्तु | वर्णन | आपकी भाषा में नाम |
|---|---|---|
चटाई | यह घास, बाँस या प्लास्टिक से बनी होती है। इसे भूमि पर बिछाकर बैठा जाता है। | |
दरी | यह मोटे कपड़े या सूती धागों से बनी होती है। यह उत्सवों या सामाजिक कार्यक्रमों में उपयोग की जाती है। | |
मूढ़ा | ||
चारपाई | ||
पीढ़ा | ||
टाट पट्टी |
उत्तर
पुस्तक में पहली दो पंक्तियों का वर्णन पहले से भरा है। बाकी चार का वर्णन और सबका “आपकी भाषा में नाम” आपको भरना है। पूरी तालिका इस तरह भरी जाएगी —
| वस्तु | वर्णन | आपकी भाषा में नाम (नमूने) |
|---|---|---|
| चटाई | यह घास, बाँस या प्लास्टिक से बनी होती है। इसे भूमि पर बिछाकर बैठा जाता है। (यह वर्णन पुस्तक में पहले से दिया है।) | मराठी — चटई · भोजपुरी/अवधी — पटिया · बांग्ला — मादुर · गुजराती — सादड़ी |
| दरी | यह मोटे कपड़े या सूती धागों से बनी होती है। यह उत्सवों या सामाजिक कार्यक्रमों में उपयोग की जाती है। (यह वर्णन पुस्तक में पहले से दिया है।) | हिंदी क्षेत्र — सतरंजी · मराठी — सतरंजी · बांग्ला — शतरंचि |
| मूढ़ा | यह बाँस, सरकंडे, मूँज या बेंत की रस्सी से बुना हुआ गोल आसन है। इसमें पीठ टिकाने का सहारा नहीं होता। यह बहुत हल्का होता है, इसलिए इसे उठाकर आँगन या दरवाज़े पर कहीं भी रख लिया जाता है। | बांग्ला — मोड़ा · ओड़िया — मोढ़ा · राजस्थानी — मूँढ़ा |
| चारपाई | इसमें लकड़ी के चार पाए और चार लंबी लकड़ियों की चौखट होती है। उस पर सुतली, निवाड़ या रस्सी बुनी जाती है। यह बैठने और सोने — दोनों कामों में आती है। गर्मियों में इसे आँगन में डालकर सोया जाता है। | हिंदी क्षेत्र — खाट, खटिया · पंजाबी — मंजा · मराठी — बाज · तमिल — कट्टिल |
| पीढ़ा | यह लकड़ी का छोटा, चौकोर और बहुत नीचा आसन है। इसे ज़मीन पर रखकर उस पर बैठा जाता है। भोजन करते समय और पूजा में इसका उपयोग होता है। | मराठी — पाट · बांग्ला — पिड़ी · हिंदी क्षेत्र — पटा, पीढ़ी · गुजराती — पाटलो |
| टाट पट्टी | यह जूट यानी सन के मोटे रेशों से बुनी हुई लंबी पट्टी होती है। यह मज़बूत और सस्ती होती है। विद्यालयों में इसे ज़मीन पर बिछाकर बच्चे पंक्ति में बैठते हैं। | हिंदी क्षेत्र — टाट, बोरा · बांग्ला — चट · मराठी — गोणपाट |
तीसरा खाना आपका अपना है: ऊपर दिए नाम केवल नमूने हैं। आपको उसमें अपनी भाषा या बोली का नाम लिखना है। घर में दादी-नानी से या पड़ोसियों से पूछिए — “इसे हमारी बोली में क्या कहते हैं?” वही नाम लिखिए।
ध्यान देने की बात: छह में से चार चीज़ें — चटाई, दरी, पीढ़ा और टाट पट्टी — ज़मीन पर बैठने की हैं। मूढ़ा और चारपाई ज़मीन से थोड़ा ऊपर बैठने की हैं। सिंहासन इन सबसे ऊँचा था। इससे एक बात समझ आती है — कुर्सी जितनी ऊँची, ज़िम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी। यही इस पाठ की सीख भी है।
करके देखिए: अपने घर और विद्यालय में देखिए कि लोग बैठने के लिए और क्या-क्या काम में लाते हैं — स्टूल, बेंच, तख़्त, कुर्सी, झूला, पालथी मारकर ज़मीन। एक सूची बनाइए और हर चीज़ के आगे लिखिए कि वह किस चीज़ से बनी है।