कक्षा ५ हिंदी अध्याय 2 बूझो तो जानें के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
गोंड पहेली — “न तो खाय न तो पीवैह, संग मा रेंगत है।” (न खाती है, न पीती है, संग-संग चलती है)
उत्तर

हिंदी अर्थ: यह कुछ खाती नहीं, कुछ पीती नहीं, फिर भी हमेशा हमारे साथ-साथ चलती रहती है।

उत्तर: छाया (परछाईं)

पकड़ में कैसे आया — वह शब्द है “संग मा रेंगत है”। गोंड बोली में रेंगना का अर्थ है चलना। तो पहेली कह रही है कि यह चीज़ हमारे साथ-साथ चलती है। जो चीज़ जीवित न हो, कुछ खाए-पिए नहीं, फिर भी हमारे साथ चले — वह छाया ही हो सकती है।
पहेली का शब्दहिंदी में
खायखाती है
पीवैहपीती है
संग मासाथ-साथ
रेंगत हैचलती है
जानने की बात: गोंडी मध्य भारत की एक बड़ी जनजातीय बोली है। यह मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और तेलंगाना में बोली जाती है।
प्र2.
निमाड़ी पहेली — “हरो माथणो, लाल पेट, रस पी लेव भर-भर पेट।” (हरे मटके का लाल पेट, रस पी लो भर-भर पेट)
उत्तर

हिंदी अर्थ: बाहर से यह हरे मटके जैसा दिखता है, पर इसका पेट यानी अंदर का भाग लाल है। इसका रस जी भरकर पिया जा सकता है।

उत्तर: तरबूज

पकड़ में कैसे आया — वे शब्द हैं “हरो माथणो” और “लाल पेट”। निमाड़ी में माथणो का अर्थ है मटका। तो चीज़ बाहर से हरी और गोल है, जैसे मटका। और अंदर से लाल है। जो फल बाहर से हरा, अंदर से लाल और रस से भरा हो — वह तरबूज ही है।
पहेली का शब्दहिंदी में
हरो माथणोहरा मटका
लाल पेटलाल अंदरूनी भाग
लेवलो
जानने की बात: निमाड़ी मध्य प्रदेश के निमाड़ क्षेत्र की बोली है — खरगोन, खंडवा और बड़वानी के आस-पास बोली जाती है।
प्र3.
मालवी पहेली — “एक जानवर ऐसो, जिकी दूम पे पैसो।” (एक जानवर ऐसा, जिसकी दुम पर पैसा)
उत्तर

हिंदी अर्थ: एक ऐसा जीव है जिसकी पूँछ पर सिक्के जैसे गोल निशान बने होते हैं।

उत्तर: मोर

पकड़ में कैसे आया — वे शब्द हैं “दूम पे पैसो”। मालवी में दूम यानी दुम या पूँछ और पैसो यानी पैसा, सिक्का। मोर के पंखों पर चमकीले गोल निशान बने होते हैं, जो देखने में सिक्कों जैसे लगते हैं। इसी से उत्तर पकड़ में आ जाता है। मोर हमारा राष्ट्रीय पक्षी है।
पहेली का शब्दहिंदी में
ऐसोऐसा
जिकीजिसकी
दूम पे पैसोदुम पर पैसा (सिक्के जैसा निशान)
जानने की बात: मालवी मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र की बोली है — उज्जैन, इंदौर और रतलाम के आस-पास। ध्यान दीजिए, इसी उज्जैन से हमारी कहानी भी शुरू होती है।
प्र4.
बुंदेली पहेली — “एक लकड़ी की ऐसी कहानी, ऊमें लुको है मीठो पानी।” (एक लकड़ी की ऐसी कहानी, उसमें छिपा है मीठा पानी)
उत्तर

हिंदी अर्थ: एक लकड़ी जैसी चीज़ है, जिसके भीतर मीठा पानी छिपा हुआ है।

उत्तर: गन्ना (ईख)

पकड़ में कैसे आया — वे शब्द हैं “लकड़ी” और “मीठो पानी”। बुंदेली में लुको का अर्थ है छिपा हुआ और ऊमें का अर्थ है उसमें। बाहर से गन्ना सूखी लकड़ी जैसा सख़्त दिखता है, पर उसे चूसने या पेरने पर मीठा रस निकलता है। यही “छिपा हुआ मीठा पानी” है।
पहेली का शब्दहिंदी में
ऊमेंउसमें
लुकोछिपा हुआ
मीठो पानीमीठा रस
जानने की बात: बुंदेली मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र की बोली है — सागर, छतरपुर और झाँसी के आस-पास।
प्र5.
बघेली पहेली — “एक दिया सबतर उंजियार।” (एक दीपक से चारों ओर उजियारा)
उत्तर

हिंदी अर्थ: एक ही दीपक है, पर उसका उजाला चारों ओर फैला हुआ है।

उत्तर: सूर्य

पकड़ में कैसे आया — वे शब्द हैं “एक दिया” और “सबतर उंजियार”। बघेली में सबतर यानी सब तरफ़ और उंजियार यानी उजियारा, उजाला। साधारण दीपक का उजाला तो थोड़ी-सी जगह में रहता है। जिस एक ही दीपक से पूरी धरती पर उजाला हो जाए — वह सूर्य ही हो सकता है।
पहेली का शब्दहिंदी में
दियादीपक
सबतरसब तरफ़, चारों ओर
उंजियारउजियारा, उजाला
पुस्तक की उत्तर-पंक्ति: पृष्ठ 20 पर सबसे नीचे उलटा छपा हुआ है — “उत्तर – छाया, तरबूज, मोर, गन्ना, सूर्य”। पाँचों उत्तर ठीक इसी क्रम में हैं जिस क्रम में पहेलियाँ छपी हैं।
जानने की बात: बघेली मध्य प्रदेश के बघेलखंड क्षेत्र की बोली है — रीवा, सतना और शहडोल के आस-पास। इस पृष्ठ की पाँचों बोलियाँ — गोंडी, निमाड़ी, मालवी, बुंदेली और बघेली — मध्य प्रदेश की हैं। इससे पता चलता है कि एक ही राज्य में कितनी सारी बोलियाँ बोली जाती हैं
क्या यह उपयोगी रहा?