कक्षा ५ हिंदी अध्याय 2 मेरा न्याय के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
• अपनी कक्षा से किन्हीं दो ऐसी समस्याओं को चुनिए जिन पर न्याय किया जाना है। • कक्षा को दो समूहों में विभाजित कीजिए। • दोनों समूह एक समस्या लेकर उस पर विचार करेंगे। • तत्पश्चात दोनों समूह एक-एक कर नाटक-मंचन के द्वारा समस्या को सुलझाएँगे। • दर्शक समूह प्रतिपुष्टि प्रदान करेंगे।
उत्तर

यह पूरी कक्षा के साथ करने वाली गतिविधि है। पाँचों निर्देशों को इस क्रम में कीजिए —

  1. समस्या चुनिए। दो ऐसी समस्याएँ चुनिए जो सचमुच आपकी कक्षा में होती हों। जैसे — पानी की बोतल किसकी है, खेल में किसकी बारी पहले, कक्षा की सफ़ाई कौन करेगा, टूटी हुई खिड़की किसने तोड़ी
  2. दो समूह बनाइए। कक्षा को आधा-आधा बाँट लीजिए। हर समूह एक समस्या लेगा।
  3. समूह में विचार कीजिए। तय कीजिए — कौन फरियादी बनेगा, कौन दूसरा पक्ष, कौन गवाह और कौन न्याय करने वाला। संवाद छोटे-छोटे लिखिए।
  4. नाटक कीजिए। एक-एक करके दोनों समूह अपना नाटक दिखाएँ। हर नाटक पाँच मिनट से बड़ा न हो।
  5. प्रतिपुष्टि दीजिए। जो समूह देख रहा है, वह अगले प्रश्न की तालिका के चार बिंदुओं पर अंक दे और एक अच्छी बात तथा एक सुधार बताए।
अच्छे नाटक में यह ज़रूर हो — समस्या साफ़ दिखे, दोनों पक्षों की बात सुनी जाए, कम से कम एक गवाह हो, फैसला कारण के साथ सुनाया जाए, और अंत में दोनों पक्ष फैसला मान लें।

नमूना उत्तर — एक छोटा नाटक “किसकी बोतल?”

पात्रसंवाद
न्यायकर्ताशांत हो जाइए। एक-एक करके बोलिए। पहले रवि, तुम अपनी बात कहो।
रवि (फरियादी)यह नीली बोतल मेरी है। कल मेरी माँ ने मुझे दी थी। आज सुबह से गायब है।
सोहन (दूसरा पक्ष)पर यह बोतल तो मेरे बस्ते में थी। मैं इसे रोज़ लाता हूँ।
न्यायकर्ताकोई गवाह है? मीना, तुम रवि के पास बैठती हो। तुमने क्या देखा?
मीना (गवाह)मैंने सुबह देखा था कि रवि के पास नीली बोतल थी। खेल के मैदान से लौटते समय बोतलें आपस में मिल गई थीं।
न्यायकर्ताठीक है। रवि, तुम्हारी बोतल पर कोई निशान है?
रविहाँ, ढक्कन के नीचे मेरा नाम लिखा है।
न्यायकर्ता (फैसला)बोतल खोलकर देखी गई। ढक्कन के नीचे रवि का नाम है, इसलिए यह बोतल रवि की है। सोहन ने जान-बूझकर नहीं ली थी, दोनों बोतलें एक जैसी होने से भूल हो गई। इसलिए किसी को दोषी नहीं ठहराया जाएगा। आगे से सब अपनी बोतल पर अपना नाम लिखेंगे।
सोहनमुझे खेद है, रवि। मैं ध्यान से नहीं देख पाया था।
रविकोई बात नहीं। बोतलें सचमुच एक जैसी हैं।
यह नाटक अच्छा क्यों है: इसमें वही तरीका है जो कहानी के लड़के का था — पहले दोनों के बयान, फिर गवाही, फिर सवाल, फिर कारण के साथ फैसला। फैसला सिर्फ़ “बोतल रवि की है” नहीं है; उसमें आगे के लिए एक हल भी है — सब अपना नाम लिखें। अच्छा न्याय झगड़ा खत्म करता है, नया झगड़ा नहीं बनाता।
शिक्षण-संकेत (पुस्तक से): शिक्षक इस गतिविधि में समस्याओं के चुनाव, संवाद-रचना, नाटक-मंचन और कक्षा में समूहों को व्यवस्थित करने में बच्चों की सहायता करें। यह भी सुनिश्चित करें कि कक्षा का प्रत्येक बच्चा इस गतिविधि में सम्मिलित हो।
प्र2.
प्रतिपुष्टि के बिंदुओं पर अंक दीजिए — (क) प्रस्तुतीकरण (ख) पात्र संवाद (ग) समस्या का समाधान (घ) पात्रों का आत्मविश्वास। अंक 1 से 5 तक।
उत्तर

पुस्तक में यह तालिका खाली दी गई है। हर खाने में यह लिखा है कि कौन-सा अंक कब मिलेगा। इससे अंक देना आसान और निष्पक्ष हो जाता है।

क्र.सं.प्रतिपुष्टि के बिंदु12345
(क)प्रस्तुतीकरणनाटक अधूरा रहा; क्रम समझ नहीं आया।शुरुआत हुई, पर बीच में उलझ गया।पूरा हुआ, पर कहीं-कहीं रुकावट रही।क्रम से चला और समय में पूरा हुआ।शुरू से अंत तक बँधा हुआ; सबने अपना काम समय पर किया।
(ख)पात्र संवादसंवाद याद नहीं थे; आवाज़ नहीं पहुँची।बहुत कम बोले; बार-बार अटके।संवाद ठीक थे, पर आवाज़ धीमी रही।साफ़ और सुनाई देने वाले संवाद।संवाद सहज, स्पष्ट और भाव के साथ; हर पात्र की आवाज़ अलग लगी।
(ग)समस्या का समाधानसमस्या ही साफ़ नहीं हुई।समस्या दिखी, पर हल नहीं निकला।हल निकला, पर कारण नहीं बताया।हल के साथ कारण भी बताया।दोनों पक्षों की बात और गवाही सुनकर, कारण सहित ऐसा हल जो सबको स्वीकार हो।
(घ)पात्रों का आत्मविश्वासपात्र घबराए हुए रहे; मुँह छिपाते रहे।बहुत झिझक; बार-बार साथियों की ओर देखा।थोड़ी झिझक, पर काम चला लिया।सहज खड़े रहे; दर्शकों की ओर देखकर बोले।पूरे भरोसे के साथ अभिनय; हाव-भाव और आँखों का संपर्क भी अच्छा।
कुल अंक = चारों बिंदुओं के अंकों का जोड़
सबसे अधिक संभव अंक = 4 × 5 = 20
प्रतिपुष्टि देने के तीन नियम:
1. पहले एक अच्छी बात बताइए।
2. फिर एक ऐसी बात बताइए जिसे और बेहतर किया जा सकता है।
3. किसी का मज़ाक मत उड़ाइए — नाटक की बात कीजिए, व्यक्ति की नहीं।
ऐसी तालिका क्यों बनाई जाती है: जब अंक देने का आधार पहले से तय हो, तो सबको एक ही पैमाने से नापा जाता है और पक्षपात नहीं होता। यही तो न्याय की पहली शर्त है — और यही इस पूरे पाठ का विषय भी है।
क्या यह उपयोगी रहा?