कक्षा ५ हिंदी अध्याय 3 चाँद का कुरता के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-19

इस अध्याय के बारे में

चाँद का कुरता एक कविता है। इसे रामधारी सिंह ‘दिनकर’ ने लिखा है। ‘दिनकर’ उनका उपनाम है — यानी वह नाम जो कवि अपनी रचना के नीचे लिखते हैं। दिनकर जी बिहार के थे और उन्हें राष्ट्रकवि कहा जाता है। ‘रश्मिरथी’, ‘कुरुक्षेत्र’ और ‘उर्वशी’ उनकी प्रसिद्ध रचनाएँ हैं। ‘उर्वशी’ पर उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला था। कविता में दो पात्र हैं — एक चाँद और दूसरी चाँद की माँ । पूरी कविता इन दोनों की आपस की बातचीत है। चाँद को यहाँ एक छोटे बच्चे की तरह दिखाया गया है, जो ठंड में ठिठुरता है, माँ से ज़िद करता है और कपड़े माँगता है। कविता की शुरुआत चाँद की ज़िद से होती है — “हठ कर बैठा चाँद एक दिन, माता से यह बोला।” वह कहता है कि रात भर सन-सन हवा चलती है और वह ठंड से मर जाता है। ठिठुर-ठिठुरकर वह किसी तरह आसमान की अपनी यात्रा पूरी करता है। इसलिए माँ उसे ऊन का एक मोटा झिंगोला सिलवा दे। झिंगोला का अर्थ है — ढीला-ढाला लंब

  1. कविता का सरल अर्थ
  2. बातचीत के लिए
  3. कविता से
  4. सोचिए और लिखिए
  5. अभिभावक और आप
  6. अनुमान और कल्पना
  7. भाषा की बात
  8. चाँद का झिंगोला
  9. कविता से आगे
  10. सोचिए, समझिए और बताइए
  11. पढ़िए और समझिए
  12. आपकी कलाकारी
  13. पुस्तकालय एवं अन्य स्रोत
  14. बूझो तो जानें
  15. जागो प्यारे
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