कक्षा ५ हिंदी अध्याय 3 सोचिए और लिखिए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
कविता की किन पंक्तियों से पता चलता है कि चाँद किसी एक दिन बिलकुल दिखाई नहीं देता है?
उत्तर

ये रहीं वे पंक्तियाँ —

“घटता-बढ़ता रोज किसी दिन ऐसा भी करता है,
नहीं किसी की भी आँखों को दिखलाई पड़ता है।”

इनका सरल अर्थ: चाँद रोज़ थोड़ा-थोड़ा घटता और बढ़ता रहता है। और किसी एक दिन तो वह ऐसा कर देता है कि किसी की भी आँखों को दिखाई ही नहीं देता — यानी आसमान से बिलकुल गायब हो जाता है।

पंक्ति का हिस्सावह क्या बताता है
“घटता-बढ़ता रोज”चाँद हर दिन बदलता है — कभी कम, कभी ज़्यादा।
“किसी दिन ऐसा भी करता है”महीने में एक दिन कुछ खास होता है।
“नहीं किसी की भी आँखों को दिखलाई पड़ता है”उस दिन वह किसी को भी नहीं दिखता। ‘किसी की भी’ कहकर कवि ने बात पक्की कर दी — किसी एक को नहीं, किसी को भी नहीं।
वह दिन कौन-सा है — यह आप आसमान में देख सकते हैं: उस रात को अमावस्या कहते हैं। महीने में एक बार ऐसा होता है। दीपावली अमावस्या की रात को ही मनाई जाती है — इसीलिए उस रात इतने दीये जलाए जाते हैं, क्योंकि आसमान में चाँद का उजाला बिलकुल नहीं होता। इसके ठीक उलटी रात पूर्णिमा होती है, जब चाँद पूरा गोल दिखता है।
खुद करके देखिए: आज शाम चाँद को देखिए और अपनी कॉपी में उसका चित्र बना लीजिए। यही काम रोज़ एक ही समय पर, पंद्रह दिन तक कीजिए। आप अपनी आँखों से देख लेंगे कि चाँद रोज़ थोड़ा-थोड़ा बदल रहा है — ठीक वैसे ही जैसे कविता में माँ कह रही है।
प्र2.
सर्दी से बचने के लिए चाँद, माँ से ऊन के झिंगोले के अतिरिक्त और कौन-से कपड़े माँग सकता है?
उत्तर

चाँद ऊन के झिंगोले के अलावा वे सब चीज़ें माँग सकता है जो हम जाड़े में पहनते हैं — स्वेटर, मफलर, टोपी, दस्ताने, मोज़े, शॉल और रजाई

चीज़वह किस अंग को बचाएगीचाँद को उसकी ज़रूरत क्यों
ऊनी स्वेटर या जैकेटछाती और पीठरात भर सन-सन हवा सीधे उसके शरीर पर लगती है।
मफलर या गुलूबंदगला और कानठंडी हवा सबसे पहले गले और कानों को लगती है।
ऊनी टोपी या मंकी कैपसिरसिर ढका न हो तो शरीर की गरमी जल्दी निकल जाती है।
दस्तानेहाथ और उँगलियाँठंड में उँगलियाँ सबसे पहले सुन्न होती हैं।
ऊनी मोज़ेपैरपैर गरम रहें तो पूरा शरीर गरम लगता है।
शॉल या लोईपूरा शरीरऊपर से लपेट लेने पर हवा भीतर नहीं घुसती।
रजाई या कंबलसोते समय पूरा शरीरदिन में जब चाँद आराम करता है, तब ओढ़ने के लिए।
ऊँचे जूतेपैर और टख़नेलंबी यात्रा में पैर ठंड से बचे रहें।

नमूना उत्तर (चाँद की अपनी आवाज़ में): “माँ, केवल झिंगोले से मेरा काम नहीं चलेगा। मुझे एक ऊनी स्वेटर भी चाहिए, ताकि छाती पर हवा न लगे। गले के लिए एक मफलर और सिर के लिए एक ऊनी टोपी दिलवा दो। हाथों के लिए दस्ताने और पैरों के लिए ऊनी मोज़े भी चाहिए, क्योंकि ठंड में मेरी उँगलियाँ सुन्न हो जाती हैं। और हाँ, दिन में सोते समय ओढ़ने के लिए एक रजाई भी दे देना।”

ध्यान दीजिए: प्रश्न में “अतिरिक्त” शब्द है, जिसका अर्थ है के अलावा। इसलिए उत्तर में ऊन का झिंगोला दोबारा मत लिखिए — केवल बाकी चीज़ें लिखिए।
प्र3.
जाड़े के मौसम में चाँद को क्या कठिनाई होती है?
उत्तर

जाड़े में चाँद की सबसे बड़ी कठिनाई यह है कि उसे रात भर खुले आसमान में ठंडी हवा के बीच चलना पड़ता है, और उसके पास कोई गरम कपड़ा नहीं है।

“सन-सन चलती हवा रात भर, जाड़े से मरता हूँ,
ठिठुर-ठिठुरकर किसी तरह यात्रा पूरी करता हूँ।
आसमान का सफर और यह मौसम है जाड़े का,”

चाँद की कठिनाइयाँ चार हैं। कविता की पंक्तियों से चारों निकल आती हैं —

क्र.कठिनाईकविता की कौन-सी बात यह बताती है
1रात भर तेज़ ठंडी हवा चलती है“सन-सन चलती हवा रात भर”
2वह ठंड से काँपता रहता है“जाड़े से मरता हूँ”, “ठिठुर-ठिठुरकर”
3फिर भी उसे अपनी यात्रा पूरी करनी पड़ती है — काम रुकता नहीं“किसी तरह यात्रा पूरी करता हूँ”
4यात्रा खुले आसमान की है, जहाँ कहीं ओट या छाया नहीं“आसमान का सफर और यह मौसम है जाड़े का”

पूरा उत्तर इस तरह लिखिए: जाड़े के मौसम में चाँद को बहुत कठिनाई होती है। रात भर सन-सन करती ठंडी हवा चलती रहती है और वह ठंड से मरा जाता है। उसके पास कोई गरम कपड़ा नहीं है, इसलिए वह ठिठुर-ठिठुरकर किसी तरह अपनी यात्रा पूरी करता है। उसका सफर खुले आसमान का है, जहाँ न कोई छत है, न ओट। इसी कठिनाई से बचने के लिए वह माँ से ऊन का मोटा झिंगोला माँगता है।

सोचने की बात: चाँद ठंड की शिकायत तो करता है, पर अपनी यात्रा नहीं छोड़ता। “किसी तरह यात्रा पूरी करता हूँ” — इस एक पंक्ति में उसकी लगन दिखाई देती है। हमें भी अपना काम कठिनाई में भी पूरा करना चाहिए।
प्र4.
चाँद किस यात्रा को पूरा करने की बात कर रहा है?
उत्तर

चाँद आसमान की यात्रा की बात कर रहा है — यानी वह रोज़ रात भर आकाश में जो सफर करता है, वही।

“ठिठुर-ठिठुरकर किसी तरह यात्रा पूरी करता हूँ।
आसमान का सफर और यह मौसम है जाड़े का,”

‘सफर’ और ‘यात्रा’ — दोनों शब्दों का एक ही अर्थ है। कविता की इन दो पंक्तियों से साफ़ हो जाता है कि यात्रा आसमान की है।

प्रश्नउत्तर
यात्रा कहाँ की है?खुले आसमान की।
कब होती है?रात भर — शाम को शुरू होकर सुबह तक।
कैसे दिखती है?चाँद आकाश में एक ओर से निकलता है और धीरे-धीरे दूसरी ओर चला जाता है।
कितनी बार होती है?हर रात। एक भी रात छूटती नहीं।
यात्रा में कठिनाई क्या है?जाड़े में सन-सन ठंडी हवा चलती है और चाँद ठिठुरता रहता है।
असल में होता क्या है: चाँद धरती के चारों ओर घूमता है। साथ ही हमारी धरती भी अपनी जगह पर घूमती रहती है। इन्हीं दोनों के घूमने से हमें ऐसा लगता है कि चाँद रात भर आकाश में चलता जा रहा है। यही उसकी वह यात्रा है जिसकी बात कविता में हो रही है।
करके देखिए: रात में चाँद को देखकर याद रखिए कि वह किस पेड़ या छत के ऊपर है। एक घंटे बाद फिर देखिए। आप पाएँगे कि वह अपनी जगह से आगे खिसक गया है। यही उसकी यात्रा है।
क्या यह उपयोगी रहा?