प्र1.
चाँद की माँ उसे झिंगोला क्यों नहीं दे पा रही है? (क) चाँद के पास पहले से ही बहुत से झिंगोले हैं। (ख) चाँद के शरीर का आकार घटता-बढ़ता रहता है। (ग) चाँद अपने वस्त्र सँभालकर नहीं रखता है। (घ) चाँद की माँ अभी कोई नया वस्त्र नहीं सिलवाना चाहती है।
उत्तर
चाँद का चित्र (🌙) केवल एक विकल्प पर बनेगा — (ख) चाँद के शरीर का आकार घटता-बढ़ता रहता है।
माँ अपने मुँह से कहती है —
“एक नाप में कभी नहीं तुझको देखा करती हूँ।
कभी एक अंगुल-भर चौड़ा, कभी एक फुट मोटा,
बड़ा किसी दिन हो जाता है और किसी दिन छोटा।”
“एक नाप में कभी नहीं तुझको देखा करती हूँ।
कभी एक अंगुल-भर चौड़ा, कभी एक फुट मोटा,
बड़ा किसी दिन हो जाता है और किसी दिन छोटा।”
माँ मना नहीं कर रही। उसकी परेशानी बस इतनी है कि नाप किस दिन का लिया जाए।
| विकल्प | सही / ग़लत | कारण |
|---|---|---|
| (क) चाँद के पास पहले से ही बहुत से झिंगोले हैं। | ग़लत | कविता में ऐसा कहीं नहीं लिखा। उलटे चाँद कहता है कि उसके पास कुछ नहीं — इसीलिए तो वह “भाड़े का” यानी किराए का कुरता तक माँग लेता है। जिसके पास बहुत कपड़े हों, वह किराए का कपड़ा नहीं माँगता। |
| (ख) चाँद के शरीर का आकार घटता-बढ़ता रहता है। | सही 🌙 | यही कविता की असली बात है। माँ कहती है — “एक नाप में कभी नहीं तुझको देखा करती हूँ।” चाँद कभी अंगुल-भर पतला, कभी एक फुट मोटा, किसी दिन बड़ा, किसी दिन छोटा। जिसका नाप ही तय न हो, उसका कुरता कैसे सिले? |
| (ग) चाँद अपने वस्त्र सँभालकर नहीं रखता है। | ग़लत | कविता में चाँद के कपड़ों की या उनके खो जाने की कोई बात ही नहीं है। यह विकल्प बाहर से जोड़ा गया है। जो बात पाठ में न हो, वह उत्तर नहीं बन सकती। |
| (घ) चाँद की माँ अभी कोई नया वस्त्र नहीं सिलवाना चाहती है। | ग़लत | माँ तो कुरता सिलवाने के लिए तैयार है। वह साफ़ कहती है — “जाड़े की तो बात ठीक है” — यानी बेटे की माँग जायज़ है। वह रुकी हुई है नाप की समस्या से, अपनी मरज़ी से नहीं। |
पढ़ने का तरीका सीखिए: निर्देश में लिखा है कि एक से अधिक विकल्प सही हो सकते हैं — इसका अर्थ यह नहीं कि हर प्रश्न में एक से अधिक सही होंगे ही। यहाँ जाँचने पर केवल एक ही विकल्प सही निकलता है। इसलिए हर विकल्प को कविता की पंक्तियों से मिलाकर देखिए, अंदाज़े से मत चुनिए।