कक्षा ५ हिंदी अध्याय 3 कविता से के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
चाँद की माँ उसे झिंगोला क्यों नहीं दे पा रही है? (क) चाँद के पास पहले से ही बहुत से झिंगोले हैं। (ख) चाँद के शरीर का आकार घटता-बढ़ता रहता है। (ग) चाँद अपने वस्त्र सँभालकर नहीं रखता है। (घ) चाँद की माँ अभी कोई नया वस्त्र नहीं सिलवाना चाहती है।
उत्तर

चाँद का चित्र (🌙) केवल एक विकल्प पर बनेगा — (ख) चाँद के शरीर का आकार घटता-बढ़ता रहता है।

माँ अपने मुँह से कहती है —
“एक नाप में कभी नहीं तुझको देखा करती हूँ।
कभी एक अंगुल-भर चौड़ा, कभी एक फुट मोटा,
बड़ा किसी दिन हो जाता है और किसी दिन छोटा।”

माँ मना नहीं कर रही। उसकी परेशानी बस इतनी है कि नाप किस दिन का लिया जाए

विकल्पसही / ग़लतकारण
(क) चाँद के पास पहले से ही बहुत से झिंगोले हैं।ग़लतकविता में ऐसा कहीं नहीं लिखा। उलटे चाँद कहता है कि उसके पास कुछ नहीं — इसीलिए तो वह “भाड़े का” यानी किराए का कुरता तक माँग लेता है। जिसके पास बहुत कपड़े हों, वह किराए का कपड़ा नहीं माँगता।
(ख) चाँद के शरीर का आकार घटता-बढ़ता रहता है।सही 🌙यही कविता की असली बात है। माँ कहती है — “एक नाप में कभी नहीं तुझको देखा करती हूँ।” चाँद कभी अंगुल-भर पतला, कभी एक फुट मोटा, किसी दिन बड़ा, किसी दिन छोटा। जिसका नाप ही तय न हो, उसका कुरता कैसे सिले?
(ग) चाँद अपने वस्त्र सँभालकर नहीं रखता है।ग़लतकविता में चाँद के कपड़ों की या उनके खो जाने की कोई बात ही नहीं है। यह विकल्प बाहर से जोड़ा गया है। जो बात पाठ में न हो, वह उत्तर नहीं बन सकती।
(घ) चाँद की माँ अभी कोई नया वस्त्र नहीं सिलवाना चाहती है।ग़लतमाँ तो कुरता सिलवाने के लिए तैयार है। वह साफ़ कहती है — “जाड़े की तो बात ठीक है” — यानी बेटे की माँग जायज़ है। वह रुकी हुई है नाप की समस्या से, अपनी मरज़ी से नहीं।
पढ़ने का तरीका सीखिए: निर्देश में लिखा है कि एक से अधिक विकल्प सही हो सकते हैं — इसका अर्थ यह नहीं कि हर प्रश्न में एक से अधिक सही होंगे ही। यहाँ जाँचने पर केवल एक ही विकल्प सही निकलता है। इसलिए हर विकल्प को कविता की पंक्तियों से मिलाकर देखिए, अंदाज़े से मत चुनिए।
प्र2.
कविता में चाँद के बदलते आकार का वर्णन करने के लिए किन शब्दों का प्रयोग किया गया है? (क) एक अंगुल-भर चौड़ा (ख) एक फुट मोटा (ग) किसी दिन बड़ा (घ) किसी दिन छोटा
उत्तर

यहाँ चारों विकल्प सही हैं — (क), (ख), (ग) और (घ)। चारों पर चाँद का चित्र (🌙) बनेगा।

“कभी एक अंगुल-भर चौड़ा, कभी एक फुट मोटा,
बड़ा किसी दिन हो जाता है और किसी दिन छोटा।”

ये दोनों पंक्तियाँ ही चारों शब्द-समूह अपने भीतर लिए हुए हैं। इसलिए किसी एक को छोड़ना ग़लत होगा।

विकल्पसही / ग़लतकारण
(क) एक अंगुल-भर चौड़ासही 🌙यह चाँद का सबसे पतला रूप बताता है — दूज का चाँद, जो नाख़ून जैसी पतली रेखा दिखता है।
(ख) एक फुट मोटासही 🌙यह चाँद का सबसे भरा हुआ रूप बताता है — पूर्णिमा का पूरा गोल चाँद।
(ग) किसी दिन बड़ासही 🌙यह बताता है कि किसी दिन चाँद बड़ा दिखाई देता है। यह भी आकार का ही वर्णन है।
(घ) किसी दिन छोटासही 🌙यह बताता है कि किसी दिन वही चाँद छोटा दिखाई देता है। यह भी आकार का ही वर्णन है।
दो जोड़ियाँ देखिए: ये चारों शब्द दो जोड़ियों में हैं — पतला ↔ मोटा और बड़ा ↔ छोटा। दोनों जोड़ियों में उलटे अर्थ वाले शब्द रखे गए हैं। कवि ने ऐसा जान-बूझकर किया है, ताकि पढ़ते ही समझ आ जाए कि चाँद एक जैसा रहता ही नहीं।
यह प्रश्न क्या सिखाता है: यही वह प्रश्न है जिसके लिए निर्देश में लिखा गया था कि “एक से अधिक विकल्प सही हो सकते हैं”। पहला सही विकल्प मिलते ही रुक मत जाइए — बाकी विकल्प भी जाँचिए
प्र3.
कविता में ठंड के मौसम का वर्णन करने के लिए किन-किन शब्दों का प्रयोग किया गया है? (क) ऊन का मोटा झिंगोला (ख) सन-सन चलती हवा (ग) ठिठुर-ठिठुरकर यात्रा (घ) भाड़े का कुरता
उत्तर

सबसे पक्के उत्तर दो हैं — (ख) सन-सन चलती हवा और (ग) ठिठुर-ठिठुरकर यात्रा। इन दोनों पर चाँद का चित्र (🌙) ज़रूर बनाइए। (क) ऊन का मोटा झिंगोला को भी बहुत-से शिक्षक सही मानते हैं, क्योंकि ऊन का मोटा कपड़ा ठंड में ही माँगा जाता है। (घ) भाड़े का कुरता ठंड से बिलकुल नहीं जुड़ा — वह ग़लत है।

“सन-सन चलती हवा रात भर, जाड़े से मरता हूँ,
ठिठुर-ठिठुरकर किसी तरह यात्रा पूरी करता हूँ।”
विकल्पसही / ग़लतकारण
(क) ऊन का मोटा झिंगोलासही माना जा सकता हैयह सीधे ठंड का वर्णन नहीं है — यह ठंड से बचने का उपाय है। पर ऊन का मोटा कपड़ा जाड़े में ही पहना जाता है, इसलिए यह भी ठंड की ओर ही इशारा करता है। इसे चुनने पर उत्तर ग़लत नहीं माना जाएगा।
(ख) सन-सन चलती हवासही 🌙यह सीधा ठंड का वर्णन है। ‘सन-सन’ शब्द से रात भर चलने वाली तेज़ ठंडी हवा की आवाज़ कानों में आ जाती है। जाड़े की रात की सबसे बड़ी पहचान यही हवा है।
(ग) ठिठुर-ठिठुरकर यात्रासही 🌙‘ठिठुरना’ का अर्थ ही है — ठंड से काँपना। यह शब्द ठंड को आँखों के सामने ला देता है। इससे बड़ा प्रमाण और क्या होगा कि मौसम जाड़े का है!
(घ) भाड़े का कुरताग़लत‘भाड़े का’ का अर्थ है किराए का। इसका ठंड से कोई संबंध नहीं है। यह तो बस यह बताता है कि चाँद नया कुरता न मिलने पर किराए के कुरते से भी काम चला लेगा।
असली अंतर समझिए: प्रश्न पूछ रहा है — ठंड का वर्णन किन शब्दों से हुआ है। ‘सन-सन चलती हवा’ और ‘ठिठुर-ठिठुरकर’ — ये दोनों ठंड को महसूस करा देते हैं। ‘ऊन का मोटा झिंगोला’ ठंड को महसूस नहीं कराता, वह ठंड का इलाज है। और ‘भाड़े का कुरता’ का ठंड से कोई नाता ही नहीं।
एक और बात: कविता में ठंड बताने वाले दो और शब्द-समूह हैं जो विकल्पों में नहीं दिए गए — “जाड़े से मरता हूँ” और “यह मौसम है जाड़े का”। उत्तर लिखते समय इन्हें भी जोड़ लीजिए, आपका उत्तर और पूरा हो जाएगा।
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