कक्षा ५ हिंदी अध्याय 3 बातचीत के लिए के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
आकाश आपको कब-कब बहुत सुंदर दिखाई देता है और क्यों?
उत्तर

आकाश मुझे दिन में भी सुंदर लगता है और रात में भी। सबसे सुंदर वह तब लगता है जब उसका रंग बदलता है — जैसे सुबह और शाम को।

कबआकाश कैसा दिखता हैसुंदर क्यों लगता है
सुबह सूरज निकलते समयपूरब की ओर लाल-नारंगी लाली छा जाती है और धीरे-धीरे सूरज ऊपर आता है।रंग हर पल बदलता है और लगता है कि पूरा दिन अभी बाकी है।
शाम को सूरज डूबते समयपश्चिम में सुनहरा, नारंगी और गुलाबी रंग फैल जाता है। पक्षी झुंड बनाकर घर लौटते हैं।बादलों पर रंग पड़ने से आकाश किसी चित्र जैसा लगता है।
पूर्णिमा की रातपूरा गोल चाँद आकाश में चमकता है और उसकी चाँदनी आँगन तक पहुँच जाती है।बिना बत्ती के भी हल्का उजाला रहता है। बहुत शांत लगता है।
बिना बादल वाली अँधेरी रातअनगिनत तारे टिमटिमाते हैं। कभी-कभी टूटता तारा भी दिखता है।तारे इतने ज़्यादा होते हैं कि गिने नहीं जाते।
बारिश के बादआकाश धुला-धुला साफ़ हो जाता है और कभी इंद्रधनुष निकल आता है।सात रंगों का इंद्रधनुष देखने में सबसे सुंदर लगता है।
वर्षा से पहलेकाले-काले बादल घिर आते हैं और बगुलों की पंक्ति उड़ती दिखती है।ठंडी हवा चलने लगती है और मन खुश हो जाता है।
पतंग वाले दिन (मकर संक्रांति)पूरा आकाश रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है।हर पतंग अलग रंग की होती है और सब मिलकर आकाश को सजा देती हैं।

नमूना उत्तर: मुझे आकाश सबसे सुंदर शाम के समय दिखाई देता है। उस समय पश्चिम में सूरज डूब रहा होता है और पूरा आकाश नारंगी और गुलाबी हो जाता है। बादलों पर भी वही रंग चढ़ जाता है। पक्षी झुंड बनाकर अपने घोंसलों की ओर लौटते हैं। इसके बाद पूर्णिमा की रात मुझे बहुत अच्छी लगती है, जब पूरा गोल चाँद निकलता है और उसकी चाँदनी से आँगन चमक उठता है। बारिश के बाद जब आकाश में इंद्रधनुष निकलता है, तब भी आकाश बहुत सुंदर लगता है। मुझे लगता है कि आकाश इसलिए सुंदर लगता है क्योंकि वह हर दिन अलग दिखता है।

कविता से जोड़िए: इसी कविता में आकाश केवल सुंदर नहीं, चाँद का रास्ता भी है। चाँद कहता है — “आसमान का सफर और यह मौसम है जाड़े का।” यानी जो आकाश हमें बैठे-बैठे सुंदर लगता है, चाँद को उसी में रात भर चलना पड़ता है।
प्र2.
चाँद को ठंड लगती है इसलिए वह झिंगोला माँग रहा है। सूरज क्या कहकर अपनी माँ से कपड़े माँगेगा?
उत्तर

सूरज की तकलीफ़ चाँद से बिलकुल उलटी होगी। चाँद रात में निकलता है, इसलिए उसे ठंड लगती है। सूरज दिन में निकलता है और खुद आग जैसा गरम है, इसलिए उसे गरमी और तेज़ धूप सताएगी। तो वह गरम कपड़े नहीं, पतले और ठंडक देने वाले कपड़े माँगेगा।

सूरज की तकलीफ़वह क्या माँगेगाक्यों
दिन भर की कड़ी धूपपतला सूती कुरतासूती कपड़ा हवा आने देता है और पसीना सोख लेता है।
सिर पर सीधी धूपचौड़े किनारे वाली टोपी या गमछासिर और चेहरा धूप से बचा रहता है।
आँखों में चौंधधूप का चश्मातेज़ रोशनी से आँखें बच जाती हैं।
पसीना और थकानपानी की बोतल, नींबू-पानी, पंखागरमी में शरीर को बार-बार पानी चाहिए।
दिन भर का लंबा सफरछाताछाया मिलती रहे तो चलना आसान हो जाता है।
हल्के कपड़े का रंगसफ़ेद या हल्के रंग का कपड़ाहल्के रंग गरमी को लौटा देते हैं, काले रंग गरमी सोख लेते हैं।

नमूना उत्तर (सूरज की अपनी आवाज़ में):

“सिलवा दो माँ, मुझे सूती का पतला एक कुरता।
दिन भर आग बरसती है, मैं गरमी से मरता।
सिर पर मेरे धूप पड़े, इक टोपी भी दिलवा दो,
और अगर हो सके तो, माँ, छाता भी लिवा दो।”

या साधारण वाक्यों में — “माँ, मुझे बहुत गरमी लगती है। मुझे कोई मोटा कपड़ा मत सिलवाना। मेरे लिए सफ़ेद रंग का पतला सूती कुरता सिलवा दो, एक टोपी और एक चश्मा भी दिला दो, ताकि मैं दिन भर की यात्रा आराम से पूरी कर सकूँ।”

सोचने की बात: कपड़े हम मौसम देखकर चुनते हैं। ठंड में मोटे और ऊनी, गरमी में पतले और सूती। चाँद और सूरज की यह उलटी माँग हमें यही बात याद दिला देती है।
प्र3.
आपने आकाश में क्या-क्या परिवर्तन होते देखे हैं?
उत्तर

आकाश हर दिन बदलता है। सबसे बड़ा बदलाव तो यही है कि दिन में उजाला रहता है और रात में अँधेरा। इसके अलावा भी बहुत-से बदलाव मैंने देखे हैं।

क्र.परिवर्तनवह कैसा दिखता है
1दिन और रात का बदलनासुबह सूरज पूरब से निकलता है और शाम को पश्चिम में डूब जाता है। फिर तारे और चाँद निकल आते हैं।
2चाँद का घटना-बढ़नादूज को चाँद पतली रेखा जैसा, फिर रोज़ बड़ा होते-होते पूर्णिमा को पूरा गोल, फिर घटते-घटते अमावस्या को बिलकुल गायब। यही बात हमारी कविता में है।
3आकाश के रंग का बदलनाभोर में लाली, दिन में नीला, शाम को नारंगी और रात में काला।
4बादलों का आना-जानाकभी रुई जैसे सफ़ेद बादल, कभी वर्षा वाले काले बादल, कभी बिलकुल साफ़ आकाश।
5बिजली चमकना और गरजनावर्षा से पहले बिजली कड़कती है और बादल गरजते हैं।
6इंद्रधनुष निकलनावर्षा के बाद धूप निकलने पर सात रंगों की एक कमान बन जाती है।
7तारों की जगह बदलनारात के शुरू में जो तारे पूरब में दिखते हैं, वे सुबह तक पश्चिम की ओर खिसक जाते हैं।
8टूटता तारा दिखनाकभी-कभी रात में एक चमकती लकीर तेज़ी से आकाश पार करती दिखती है।
9ग्रहण लगनाकभी सूर्य ग्रहण और कभी चंद्र ग्रहण होता है। तब सूरज या चाँद कुछ देर के लिए ढक जाता है।
10कोहरा और धुंधजाड़े की सुबह आकाश धुँधला हो जाता है और सूरज देर से दिखाई देता है।
11पक्षियों और हवाई जहाज़ का उड़नाशाम को पक्षियों की पंक्ति और दिन में जहाज़ की सफ़ेद लकीर दिखाई देती है।

नमूना उत्तर: मैंने आकाश में सबसे पहले यह परिवर्तन देखा है कि दिन में उजाला रहता है और रात में अँधेरा हो जाता है। सुबह सूरज पूरब से निकलता है और शाम को पश्चिम में डूब जाता है। चाँद रोज़ अपना आकार बदलता है — कभी पतली रेखा जैसा, कभी पूरा गोल और अमावस्या को बिलकुल गायब। वर्षा के दिनों में काले बादल घिर आते हैं, बिजली चमकती है और कभी-कभी इंद्रधनुष भी निकल आता है। जाड़े की सुबह कोहरे से आकाश धुँधला हो जाता है। मुझे लगता है कि आकाश कभी एक-सा नहीं रहता, इसीलिए उसे रोज़ देखने में मज़ा आता है।

कविता से जोड़िए: इन सब परिवर्तनों में से एक ही परिवर्तन कविता की जान है — चाँद का घटना-बढ़ना। यही परिवर्तन चाँद के कुरते की सारी समस्या खड़ी कर देता है।
प्र4.
जब आप अपने अभिभावक के साथ नए कपड़े खरीदने जाते हैं तब किन-किन बातों का ध्यान रखते हैं?
उत्तर

कपड़ा खरीदते समय हम सबसे पहले नाप देखते हैं — कपड़ा शरीर में ठीक बैठना चाहिए। इसके बाद मौसम, कपड़े का किस्म, रंग और दाम देखे जाते हैं।

किस बात का ध्यानक्यों ज़रूरी है
नाप (साइज़)बहुत तंग हो तो पहनने में तकलीफ़ होती है, बहुत ढीला हो तो अच्छा नहीं लगता। इसीलिए पहनकर देखना चाहिए।
मौसमजाड़े के लिए ऊनी और मोटे कपड़े, गरमी के लिए पतले सूती कपड़े, बरसात के लिए जल्दी सूखने वाले कपड़े।
कपड़े का किस्मसूती कपड़ा पसीना सोखता है और त्वचा को आराम देता है। ऊन गरमी रोके रखता है।
रंग और डिज़ाइनरंग अपनी पसंद का हो। हल्के रंग गरमी में और गहरे रंग जाड़े में अच्छे रहते हैं।
दामदाम हमारे बजट में हो। दो-तीन दुकानों में दाम पूछ लेना चाहिए।
सिलाई और मज़बूतीसिलाई सीधी और मज़बूत हो, बटन ठीक से लगे हों, धागे बाहर न निकल रहे हों।
धुलाईयह देखना चाहिए कि कपड़ा घर में धुल जाएगा या नहीं, और उसका रंग तो नहीं छूटेगा।
आरामकपड़ा पहनकर दौड़ने, बैठने और खेलने में आसानी हो।
कब पहनना हैविद्यालय, त्योहार, शादी — मौके के हिसाब से कपड़ा चुना जाता है।
थोड़ा बड़ा होनाबच्चों की लंबाई बढ़ती रहती है, इसलिए माता-पिता प्रायः थोड़ा बड़ा नाप लेते हैं ताकि कपड़ा साल भर चले।

नमूना उत्तर: जब मैं अपनी माँ के साथ नए कपड़े खरीदने जाता हूँ तो सबसे पहले हम नाप देखते हैं। माँ मुझसे कपड़ा पहनकर दिखाने को कहती हैं। फिर हम देखते हैं कि कपड़ा किस मौसम के लिए है — जाड़े के लिए ऊनी और गरमी के लिए सूती। मैं अपनी पसंद का रंग चुनता हूँ, पर माँ यह भी देखती हैं कि रंग जल्दी गंदा न दिखे। माँ सिलाई और बटन जाँचती हैं और दाम दो-तीन दुकानों में पूछ लेती हैं। वे प्रायः थोड़ा बड़ा नाप लेती हैं, क्योंकि मेरी लंबाई बढ़ रही है।

कविता से जोड़िए: ऊपर की सूची में पहली ही बात — नाप — वही है जिस पर कविता अटक जाती है। चाँद की माँ बाकी सब कर सकती है, पर नाप नहीं ले सकती, क्योंकि “एक नाप में कभी नहीं तुझको देखा करती हूँ।” यह प्रश्न पूछा ही इसलिए गया है ताकि आप समझें कि नाप कितनी ज़रूरी चीज़ है।
क्या यह उपयोगी रहा?