आकाश मुझे दिन में भी सुंदर लगता है और रात में भी। सबसे सुंदर वह तब लगता है जब उसका रंग बदलता है — जैसे सुबह और शाम को।
| कब | आकाश कैसा दिखता है | सुंदर क्यों लगता है |
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| सुबह सूरज निकलते समय | पूरब की ओर लाल-नारंगी लाली छा जाती है और धीरे-धीरे सूरज ऊपर आता है। | रंग हर पल बदलता है और लगता है कि पूरा दिन अभी बाकी है। |
| शाम को सूरज डूबते समय | पश्चिम में सुनहरा, नारंगी और गुलाबी रंग फैल जाता है। पक्षी झुंड बनाकर घर लौटते हैं। | बादलों पर रंग पड़ने से आकाश किसी चित्र जैसा लगता है। |
| पूर्णिमा की रात | पूरा गोल चाँद आकाश में चमकता है और उसकी चाँदनी आँगन तक पहुँच जाती है। | बिना बत्ती के भी हल्का उजाला रहता है। बहुत शांत लगता है। |
| बिना बादल वाली अँधेरी रात | अनगिनत तारे टिमटिमाते हैं। कभी-कभी टूटता तारा भी दिखता है। | तारे इतने ज़्यादा होते हैं कि गिने नहीं जाते। |
| बारिश के बाद | आकाश धुला-धुला साफ़ हो जाता है और कभी इंद्रधनुष निकल आता है। | सात रंगों का इंद्रधनुष देखने में सबसे सुंदर लगता है। |
| वर्षा से पहले | काले-काले बादल घिर आते हैं और बगुलों की पंक्ति उड़ती दिखती है। | ठंडी हवा चलने लगती है और मन खुश हो जाता है। |
| पतंग वाले दिन (मकर संक्रांति) | पूरा आकाश रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है। | हर पतंग अलग रंग की होती है और सब मिलकर आकाश को सजा देती हैं। |
नमूना उत्तर: मुझे आकाश सबसे सुंदर शाम के समय दिखाई देता है। उस समय पश्चिम में सूरज डूब रहा होता है और पूरा आकाश नारंगी और गुलाबी हो जाता है। बादलों पर भी वही रंग चढ़ जाता है। पक्षी झुंड बनाकर अपने घोंसलों की ओर लौटते हैं। इसके बाद पूर्णिमा की रात मुझे बहुत अच्छी लगती है, जब पूरा गोल चाँद निकलता है और उसकी चाँदनी से आँगन चमक उठता है। बारिश के बाद जब आकाश में इंद्रधनुष निकलता है, तब भी आकाश बहुत सुंदर लगता है। मुझे लगता है कि आकाश इसलिए सुंदर लगता है क्योंकि वह हर दिन अलग दिखता है।