प्र1.
“हठ कर बैठा चाँद एक दिन, माता से यह बोला, / ‘सिलवा दो माँ, मुझे ऊन का मोटा एक झिंगोला। / सन-सन चलती हवा रात भर, जाड़े से मरता हूँ, / ठिठुर-ठिठुरकर किसी तरह यात्रा पूरी करता हूँ। / आसमान का सफर और यह मौसम है जाड़े का, / न हो अगर तो ला दो कुरता ही कोई भाड़े का।’” — इन पंक्तियों का सरल अर्थ और भाव लिखिए।
उत्तर
इन छह पंक्तियों में चाँद अपनी माँ से ज़िद कर रहा है। वह ठंड से परेशान है और गरम कपड़ा माँग रहा है।
हठ कर बैठा चाँद एक दिन, माता से यह बोला,
“सिलवा दो माँ, मुझे ऊन का मोटा एक झिंगोला।
सन-सन चलती हवा रात भर, जाड़े से मरता हूँ,
ठिठुर-ठिठुरकर किसी तरह यात्रा पूरी करता हूँ।
आसमान का सफर और यह मौसम है जाड़े का,
न हो अगर तो ला दो कुरता ही कोई भाड़े का।”
“सिलवा दो माँ, मुझे ऊन का मोटा एक झिंगोला।
सन-सन चलती हवा रात भर, जाड़े से मरता हूँ,
ठिठुर-ठिठुरकर किसी तरह यात्रा पूरी करता हूँ।
आसमान का सफर और यह मौसम है जाड़े का,
न हो अगर तो ला दो कुरता ही कोई भाड़े का।”
पहले कठिन शब्द समझ लीजिए —
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| हठ करना | ज़िद करना, अपनी बात पर अड़ जाना |
| झिंगोला | ढीला-ढाला लंबा कुरता या चोगा |
| सन-सन | तेज़ हवा चलने की आवाज़ |
| जाड़ा | सर्दी, ठंड का मौसम |
| ठिठुरना | ठंड से काँपना |
| सफर | यात्रा |
| भाड़े का | किराए का, कुछ दिन के लिए लिया हुआ |
अब पंक्ति-दर-पंक्ति अर्थ देखिए —
| पंक्ति | सरल अर्थ |
|---|---|
| “हठ कर बैठा चाँद एक दिन, माता से यह बोला,” | एक दिन चाँद ज़िद पकड़कर बैठ गया और अपनी माँ से यह बात कही। |
| “सिलवा दो माँ, मुझे ऊन का मोटा एक झिंगोला।” | माँ, मेरे लिए ऊन का एक मोटा और ढीला कुरता सिलवा दो। |
| “सन-सन चलती हवा रात भर, जाड़े से मरता हूँ,” | रात भर सन-सन करती ठंडी हवा चलती रहती है। मैं ठंड से मरा जा रहा हूँ। |
| “ठिठुर-ठिठुरकर किसी तरह यात्रा पूरी करता हूँ।” | ठंड से काँपते-काँपते मैं जैसे-तैसे अपनी रात भर की यात्रा पूरी करता हूँ। |
| “आसमान का सफर और यह मौसम है जाड़े का,” | ऊपर से मेरा सफर खुले आसमान का है, और वह भी जाड़े के मौसम में। |
| “न हो अगर तो ला दो कुरता ही कोई भाड़े का।” | अगर नया न सिलवा सको तो किराए का ही कोई कुरता ला दो। |
भाव: यहाँ चाँद बिलकुल एक छोटे बच्चे जैसा लगता है। उसे ठंड लग रही है, इसलिए वह माँ के पास जाकर ज़िद कर बैठता है। सबसे मन को छू लेने वाली पंक्ति आखिरी है — “ला दो कुरता ही कोई भाड़े का।” बच्चा जानता है कि नया कपड़ा सिलवाने में ख़र्च होता है, इसलिए वह किराए के कपड़े पर भी राज़ी हो जाता है। इससे पता चलता है कि उसे ठंड कितनी सता रही है और वह अपनी माँ को कितना समझता भी है।
ध्यान दीजिए: “सन-सन” और “ठिठुर-ठिठुरकर” — ये दो शब्द ठंड को सुनाई और दिखाई दे जाने वाला बना देते हैं। ‘सन-सन’ से हवा की आवाज़ कानों में आ जाती है और ‘ठिठुर-ठिठुरकर’ से काँपता हुआ चाँद आँखों के सामने आ जाता है।