कक्षा ५ हिंदी अध्याय 3 अभिभावक और आप के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
जब आप ठंडी रात में सोते समय अपने पैरों से कंबल या रजाई उतार फेंकते हैं।
उत्तर

तब मेरे अभिभावक चुपचाप उठकर मुझे फिर से ओढ़ा देते हैं — और सुबह प्यार से डाँटते भी हैं।

वे क्या कहते हैंवे क्या करते हैं
“बेटा, रजाई मत फेंको, सर्दी लग जाएगी।”रात में दो-तीन बार उठकर रजाई फिर से ओढ़ा देते हैं।
“ठंड में पैर खुले रह गए तो सुबह गला ख़राब हो जाएगा।”पैरों में ऊनी मोज़े पहना देते हैं।
“रजाई को अच्छी तरह दबा लो।”रजाई के किनारे शरीर के नीचे दबा देते हैं, ताकि हवा भीतर न आए।
“सर्दी में खिड़की खुली मत छोड़ो।”खिड़की और दरवाज़ा बंद कर देते हैं, कभी परदा भी डाल देते हैं।

नमूना उत्तर: ठंडी रात में जब मैं सोते-सोते रजाई पैरों से हटा देता हूँ, तब मेरी माँ उठकर मुझे फिर से ओढ़ा देती हैं। वे कहती हैं — “बेटा, ठंड लग जाएगी, रजाई मत फेंको।” कभी-कभी वे मेरे पैरों में ऊनी मोज़े पहना देती हैं। सुबह वे हँसकर बताती हैं कि रात में उन्हें तीन बार उठना पड़ा। तब मुझे लगता है कि माँ मेरे सोने के बाद भी मेरा ध्यान रखती हैं।

कविता से जोड़िए: जैसे चाँद की माँ को उसकी ठंड की चिंता है, वैसे ही आपके अभिभावक को आपकी ठंड की चिंता रहती है। बच्चा सो जाता है, माँ जागती रहती है — यही बात दोनों जगह एक जैसी है।
प्र2.
जब आप ठंड में आइसक्रीम खाने का हठ करते हैं।
उत्तर

तब मेरे अभिभावक पहले समझाते हैं, फिर कोई गरम चीज़ का लालच देते हैं, और कभी-कभी थोड़ी-सी खाने की छूट भी दे देते हैं।

वे क्या कहते हैंवे क्या करते हैं
“इस मौसम में ठंडी चीज़ खाओगे तो गला पकड़ जाएगा।”आइसक्रीम की जगह गरम दूध, हलवा या गजक दे देते हैं।
“खाँसी हो गई तो विद्यालय नहीं जा पाओगे।”याद दिलाते हैं कि पिछली बार ठंडा खाकर क्या हुआ था।
“अभी नहीं, गरमी आने दो — तब जितनी चाहे खाना।”एक दिन तय कर देते हैं, ताकि बात टलने पर भी बुरा न लगे।
“ठीक है, पर थोड़ी-सी और धूप में बैठकर।”दोपहर की धूप में थोड़ी-सी आइसक्रीम खाने दे देते हैं।

नमूना उत्तर: जब मैं ठंड में आइसक्रीम खाने की ज़िद करता हूँ तो पिताजी कहते हैं — “इस मौसम में ठंडी चीज़ खाओगे तो गला ख़राब हो जाएगा और खाँसी हो जाएगी।” माँ मुझे उसकी जगह गरम दूध या गजक दे देती हैं। कभी-कभी वे कहती हैं कि दोपहर में धूप में बैठकर थोड़ी-सी खा लो। तब मैं मान जाता हूँ।

कविता से जोड़िए: कविता का चाँद भी हठ ही करता है — “हठ कर बैठा चाँद एक दिन।” और उसकी माँ भी मना नहीं करती, बस असली कठिनाई समझा देती है। समझदार बड़े लोग यही करते हैं — डाँटते नहीं, कारण बताते हैं
प्र3.
जब आप दूध पीने, हरी सब्ज़ियाँ और फल आदि खाने से कतराते हैं।
उत्तर

तब मेरे अभिभावक बताते हैं कि इनसे शरीर को क्या मिलता है, और उन्हें ऐसे बना देते हैं कि मुझे अच्छे लगने लगें।

वे क्या कहते हैंवे क्या करते हैं
“दूध पिओगे तो हड्डियाँ मज़बूत होंगी और लंबाई बढ़ेगी।”दूध में हल्दी, केसर या थोड़ा-सा गुड़ मिला देते हैं ताकि स्वाद अच्छा लगे।
“हरी सब्ज़ियों से ख़ून बनता है और आँखें अच्छी रहती हैं।”पालक को पराँठे में भर देते हैं, लौकी का हलवा या सब्ज़ी की टिक्की बना देते हैं।
“फल खाओगे तो जल्दी बीमार नहीं पड़ोगे।”फल काटकर, नमक-चाट डालकर सामने रख देते हैं।
“थोड़ा-सा तो चखकर देखो।”पूरी थाली नहीं, थोड़ी-सी मात्रा देते हैं और रोज़ थोड़ी बढ़ाते जाते हैं।
“देखो, मैं भी खा रहा हूँ।”सबके साथ बैठकर खाते हैं, जिससे बच्चे का मन बन जाता है।

नमूना उत्तर: जब मैं दूध पीने या हरी सब्ज़ी खाने से कतराता हूँ तो माँ मुझे समझाती हैं कि दूध से हड्डियाँ मज़बूत होती हैं और हरी सब्ज़ियों से ख़ून बनता है। वे दूध में थोड़ी-सी हल्दी डाल देती हैं और पालक को पराँठे में भर देती हैं, जिससे मुझे स्वाद अच्छा लगने लगता है। दादी फल काटकर उस पर थोड़ा-सा नमक डाल देती हैं। घर के सब लोग साथ बैठकर खाते हैं, इसलिए मैं भी खा लेता हूँ।

याद रखिए: दूध, हरी सब्ज़ियाँ और फल हमें ताकत, ख़ून और रोगों से लड़ने की शक्ति देते हैं। बड़े लोग ये चीज़ें ज़बरदस्ती नहीं, हमारे भले के लिए खिलाते हैं।
प्र4.
जब आप देर तक सोते हैं।
उत्तर

तब मेरे अभिभावक पहले प्यार से जगाते हैं, फिर याद दिलाते हैं कि देर हो रही है, और सुबह जल्दी उठने के फ़ायदे बताते हैं।

वे क्या कहते हैंवे क्या करते हैं
“उठो बेटा, सूरज निकल आया है।”परदा हटा देते हैं, जिससे धूप कमरे में आ जाए।
“देर हो जाएगी, बस निकल जाएगी।”घड़ी दिखाते हैं और बस्ता तैयार करने लगते हैं।
“सुबह जल्दी उठने से पढ़ा हुआ याद रहता है।”रात को जल्दी सोने का नियम बनवाते हैं।
“सुबह की हवा सेहत के लिए अच्छी होती है।”सुबह टहलने या खेलने साथ ले जाते हैं।
“चलो, मुँह धो लो, नाश्ता तैयार है।”पानी और तौलिया पास रख देते हैं।

नमूना उत्तर: जब मैं देर तक सोता रहता हूँ तो माँ आकर परदा हटा देती हैं और कहती हैं — “उठो बेटा, सूरज निकल आया है।” वे घड़ी दिखाकर बताती हैं कि विद्यालय के लिए देर हो रही है। पिताजी कहते हैं कि सुबह जल्दी उठने से दिन भर मन ताज़ा रहता है और पढ़ा हुआ याद रहता है। इसलिए अब मैं रात को जल्दी सो जाता हूँ।

इस पाठ से जोड़िए: इसी अध्याय के अंत में छपी कविता जागो प्यारे में भी माँ यही कर रही है — “उठो लाल, अब आँखें खोलो। पानी लाई हूँ, मुँह धो लो।” वह डाँटती नहीं, बल्कि बाहर का सुंदर दृश्य दिखाकर बच्चे को जगाती है।
प्र5.
जब कोई आपके घर आपकी शिकायत करने आता है।
उत्तर

तब मेरे अभिभावक पहले पूरी बात शांति से सुनते हैं, फिर मुझसे मेरा पक्ष पूछते हैं, और तब कोई निर्णय लेते हैं।

वे क्या कहते हैंवे क्या करते हैं
“आप बैठिए, पूरी बात बताइए।”शिकायत करने वाले की बात बिना बीच में टोके सुनते हैं।
“बेटा, तुम भी अपनी बात कहो। सच-सच बताना।”मुझसे भी पूछते हैं, ताकि दोनों पक्ष सामने आ जाएँ।
“ग़लती हुई है तो माफ़ी माँगो।”ग़लती मेरी हो तो मुझसे माफ़ी मँगवाते हैं और नुकसान की भरपाई करवाते हैं।
“आगे से ऐसा नहीं होगा।”बाद में अकेले में समझाते हैं कि ऐसा क्यों नहीं करना चाहिए।
“इसमें मेरे बच्चे की ग़लती नहीं है।”यदि मेरी ग़लती न हो तो वे मेरा साथ भी देते हैं।

नमूना उत्तर: जब कोई मेरी शिकायत लेकर घर आता है तो मेरे पिताजी पहले उनकी पूरी बात शांति से सुनते हैं। वे बीच में नहीं बोलते। इसके बाद वे मुझे बुलाकर पूछते हैं कि असल में क्या हुआ था। यदि ग़लती मेरी होती है तो वे मुझसे माफ़ी मँगवाते हैं और बाद में अकेले में समझाते हैं। यदि ग़लती मेरी नहीं होती तो वे मेरा साथ भी देते हैं। मुझे यह अच्छा लगता है कि वे बिना सुने कोई फ़ैसला नहीं करते।

अच्छी बात: किसी की शिकायत सुनकर तुरंत डाँट देना ठीक नहीं। दोनों पक्ष सुनने के बाद ही न्याय होता है। यही बात इसी पुस्तक के पाठ 2 न्याय की कुर्सी में भी सिखाई गई है।
प्र6.
जब आपके अच्छे कामों के लिए आपकी प्रशंसा होती है अथवा पुरस्कार मिलता है।
उत्तर

तब मेरे अभिभावक बहुत खुश होते हैं, सबको बताते हैं, और साथ ही यह भी कहते हैं कि घमंड मत करना

वे क्या कहते हैंवे क्या करते हैं
“शाबाश! तुम्हारी मेहनत काम आई।”पीठ थपथपाते हैं और गले लगा लेते हैं।
“यह देखो, हमारे बच्चे को पुरस्कार मिला है।”दादा-दादी, नाना-नानी और पड़ोसियों को फ़ोन करके बताते हैं।
“कुछ मीठा हो जाए!”घर में मिठाई या मेरी पसंद का खाना बनवाते हैं।
“इसे सँभालकर रखो।”प्रमाण-पत्र या पदक घर में सबसे दिखने वाली जगह पर लगा देते हैं।
“अब घमंड मत करना, आगे और मेहनत करना।”अगली बार के लिए कोई नया लक्ष्य तय करने में मदद करते हैं।

नमूना उत्तर: जब मुझे मेरे अच्छे काम के लिए पुरस्कार मिलता है तो मेरे माता-पिता बहुत खुश होते हैं। माँ मेरी पीठ थपथपाकर कहती हैं — “शाबाश! तुम्हारी मेहनत काम आई।” पिताजी दादा-दादी को फ़ोन करके बताते हैं। घर में मेरी पसंद का खाना बनता है। मेरा प्रमाण-पत्र दीवार पर लगा दिया जाता है। साथ ही माँ यह भी कहती हैं कि इससे घमंड नहीं करना चाहिए और आगे और मेहनत करनी चाहिए।

सोचने की बात: प्रशंसा से हिम्मत बढ़ती है, इसलिए वह ज़रूरी है। पर प्रशंसा सुनकर मेहनत छोड़ देना ठीक नहीं। इसीलिए बड़े लोग तारीफ़ के साथ यह भी कह देते हैं — “आगे और मेहनत करना।”
क्या यह उपयोगी रहा?